• इंसान तभी कुछ करता है जब वो अपने<br/>
काम के औचित्य को लेकर सुनिश्चित होता है,<br/> 
जैसाकि हम विधान सभा में बम फेंकने को लेकर थे.
    इंसान तभी कुछ करता है जब वो अपने
    काम के औचित्य को लेकर सुनिश्चित होता है,
    जैसाकि हम विधान सभा में बम फेंकने को लेकर थे.
    ~ Bhagat Singh
  • आम तौर पर लोग चीजें जैसी हैं उसके आदि हो जाते हैं और बदलाव के विचार से ही कांपने लगते हैं। हमें इसी निष्क्रियता की भावना को क्रांतिकारी भावना से बदलने की ज़रुरत है|
    आम तौर पर लोग चीजें जैसी हैं उसके आदि हो जाते हैं और बदलाव के विचार से ही कांपने लगते हैं। हमें इसी निष्क्रियता की भावना को क्रांतिकारी भावना से बदलने की ज़रुरत है|
    ~ Bhagat Singh
  • ज़रूरी नहीं था की क्रांति में अभिशप्त संघर्ष शामिल हो। यह बम और पिस्तौल का पंथ नहीं था|
    ज़रूरी नहीं था की क्रांति में अभिशप्त संघर्ष शामिल हो। यह बम और पिस्तौल का पंथ नहीं था|
    ~ Bhagat Singh
  • क्रांतिकारी सोच के 2 लक्षण होते हैं एक बेरहम निंदा और दूसरा स्वतंत्र सोच |
    क्रांतिकारी सोच के 2 लक्षण होते हैं एक बेरहम निंदा और दूसरा स्वतंत्र सोच |
    ~ Bhagat Singh
  • मैं एक मानव हूँ और जो कुछ भी मानवता को प्रभावित करता है, उससे मुझे मतलब है|
    मैं एक मानव हूँ और जो कुछ भी मानवता को प्रभावित करता है, उससे मुझे मतलब है|
    ~ Bhagat Singh
  • जो व्यक्ति भी विकास के लिए खड़ा है उसे हर एक रूढ़िवादी चीज की आलोचना करनी होगी, उसमें अविश्वास करना होगा तथा उसे चुनौती देनी होगी!
    जो व्यक्ति भी विकास के लिए खड़ा है उसे हर एक रूढ़िवादी चीज की आलोचना करनी होगी, उसमें अविश्वास करना होगा तथा उसे चुनौती देनी होगी!
    ~ Bhagat Singh
  • इंसान तभी कुछ करता है जब वो अपने काम के औचित्य को लेकर सुनिश्चित होता है, जैसाकि हम विधान सभा में बम फेंकने को लेकर थे​।
    इंसान तभी कुछ करता है जब वो अपने काम के औचित्य को लेकर सुनिश्चित होता है, जैसाकि हम विधान सभा में बम फेंकने को लेकर थे​।
    ~ Bhagat Singh
  • इस कदर वाकिफ है मेरी कलम मेरे जज़्बातों से, अगर मैं इश्क़ लिखना भी चाहूँ तो इंक़लाब लिखा जाता है।
    इस कदर वाकिफ है मेरी कलम मेरे जज़्बातों से, अगर मैं इश्क़ लिखना भी चाहूँ तो इंक़लाब लिखा जाता है।
    ~ Bhagat Singh
  • आम तौर पर लोग चीजें जैसी हैं उसके आदि हो जाते हैं और बदलाव के विचार से ही कांपने लगते हैं। हमें इसी निष्क्रियता की भावना को क्रांतिकारी भावना से बदलने की ज़रुरत है।
    आम तौर पर लोग चीजें जैसी हैं उसके आदि हो जाते हैं और बदलाव के विचार से ही कांपने लगते हैं। हमें इसी निष्क्रियता की भावना को क्रांतिकारी भावना से बदलने की ज़रुरत है।
    ~ Bhagat Singh
  • ​इंसान तभी कुछ करता है जब वो अपने काम के औचित्य को लेकर सुनिश्चित होता है, जैसाकि हम विधान सभा में बम फेंकने को लेकर थे​।
    ~ Bhagat Singh