• अब उतर आये हैं वह तारीफ पर,<br/>
हम जो आदी हो गये दुश्नाम के।Upload to Facebook
    अब उतर आये हैं वह तारीफ पर,
    हम जो आदी हो गये दुश्नाम के।
    ~ Daagh Dehlvi
  • अजल को दोष दें, तकदीर को रोयें, मुझे कोसें;<br/>
मेरे कातिल का चर्चा क्यों है मेरे सोगवारों में।<br/><br/>

1. अजल - मृत्यु<br/>
2. सोगवारों - शोक करने वालोंUpload to Facebook
    अजल को दोष दें, तकदीर को रोयें, मुझे कोसें;
    मेरे कातिल का चर्चा क्यों है मेरे सोगवारों में।

    1. अजल - मृत्यु
    2. सोगवारों - शोक करने वालों
    ~ Daagh Dehlvi
  • ख़ूब पर्दा है कि चिलमन से लगे बैठे हैं,
    साफ़ छुपते भी नहीं सामने आते भी नहीं।
    ~ Daagh Dehlvi
  • इस नहीं का कोई इलाज नहीं,
    रोज़ कहते हैं आप आज नहीं।
    ~ Daagh Dehlvi
  • ये तो नहीं कि तुम सा जहान में हसीन नहीं,<br/>
इस दिल का क्या करूँ ये बहलता कहीं नहीं।Upload to Facebook
    ये तो नहीं कि तुम सा जहान में हसीन नहीं,
    इस दिल का क्या करूँ ये बहलता कहीं नहीं।
    ~ Daagh Dehlvi
  • न जाओ हाल-ए-दिल-ए-ज़ार देखते जाओ;
    कि जी न चाहे तो नाचार देखते जाओ;

    बहार-ए-उमर् में बाग़-ए-जहाँ की सैर करो;
    खिला हुआ है ये गुलज़ार देखते जाओ;

    उठाओ आँख, न शरमाओ ,ये तो महिफ़ल है;
    ग़ज़ब से जानिब-ए-अग़यार देखते जाओ;

    हुआ है क्या अभी हंगामा अभी कुछ होगा;
    फ़ुगां में हश्र के आसार देखते जाओ;

    तुम्हारी आँख मेरे दिल से बेसबब-बेवजह;
    हुई है लड़ने को तय्यार देखते जाओ;

    न जाओ बंद किए आँख रहरवान-ए-अदम;
    इधर-उधर भी ख़बरदार देखते जाओ;

    कोई न कोई हर इक शेर में है बात ज़रूर;
    जनाबे-दाग़ के अशआर देखते जाओ।
    ~ Daagh Dehlvi
  • दिल को क्या हो गया...

    दिल को क्या हो गया ख़ुदा जाने;
    क्यों है ऐसा उदास क्या जाने;

    कह दिया मैं ने हाल-ए-दिल अपना;
    इस को तुम जानो या ख़ुदा जाने;

    जानते जानते ही जानेगा;
    मुझ में क्या है वो अभी क्या जाने;

    तुम न पाओगे सादा दिल मुझसा;
    जो तग़ाफ़ुल को भी हया जाने।
    ~ Daagh Dehlvi
  • अजब अपना हाल होता...

    अजब अपना हाल होता जो विसाल-ए-यार होता;
    कभी जान सदक़े होती कभी दिल निसार होता;

    न मज़ा है दुश्मनी में न है लुत्फ़ दोस्ती में;
    कोई ग़ैर ग़ैर होता कोई यार यार होता;

    ये मज़ा था दिल्लगी का कि बराबर आग लगती;
    न तुम्हें क़रार होता न हमें क़रार होता;

    तेरे वादे पर सितमगर अभी और सब्र करते;
    अगर अपनी जिन्दगी का हमें ऐतबार होता।
    ~ Daagh Dehlvi
  • पूछिये मयकशों से लुत्फ़-ए-शराब;
    ये मज़ा पाक-बाज़ क्या जाने।
    ~ Daagh Dehlvi
  • मुझे याद करने से ये मुद्दा था;
    निकल जाए दम हिचकियाँ आते आते।
    ~ Daagh Dehlvi