• मुझ से लाग़र तेरी आँखों में खटकते तो रहे;<br/>
तुझ से नाज़ुक मेरी नज़रों में समाते भी नहीं!
    मुझ से लाग़र तेरी आँखों में खटकते तो रहे;
    तुझ से नाज़ुक मेरी नज़रों में समाते भी नहीं!
    ~ Daagh Dehlvi
  • अर्ज़-ए-अहवाल को गिला समझे;<br/>
क्या कहा मैंने आप क्या समझे|
    अर्ज़-ए-अहवाल को गिला समझे;
    क्या कहा मैंने आप क्या समझे|
    ~ Daagh Dehlvi
  • फलक देता है जिसको ऐश उसको गम भी देता है;<br/>
जहाँ बजते हैं नक्कारे, वहीं मातम भी होते हैं।<br/><br/>

फलक - आकाश, आसमान, अर्
    फलक देता है जिसको ऐश उसको गम भी देता है;
    जहाँ बजते हैं नक्कारे, वहीं मातम भी होते हैं।

    फलक - आकाश, आसमान, अर्
    ~ Daagh Dehlvi
  • अब उतर आये हैं वह तारीफ पर,<br/>
हम जो आदी हो गये दुश्नाम के।
    अब उतर आये हैं वह तारीफ पर,
    हम जो आदी हो गये दुश्नाम के।
    ~ Daagh Dehlvi
  • अजल को दोष दें, तकदीर को रोयें, मुझे कोसें;<br/>
मेरे कातिल का चर्चा क्यों है मेरे सोगवारों में।<br/><br/>

1. अजल - मृत्यु<br/>
2. सोगवारों - शोक करने वालों
    अजल को दोष दें, तकदीर को रोयें, मुझे कोसें;
    मेरे कातिल का चर्चा क्यों है मेरे सोगवारों में।

    1. अजल - मृत्यु
    2. सोगवारों - शोक करने वालों
    ~ Daagh Dehlvi
  • ख़ूब पर्दा है कि चिलमन से लगे बैठे हैं,
    साफ़ छुपते भी नहीं सामने आते भी नहीं।
    ~ Daagh Dehlvi
  • इस नहीं का कोई इलाज नहीं,
    रोज़ कहते हैं आप आज नहीं।
    ~ Daagh Dehlvi
  • ये तो नहीं कि तुम सा जहान में हसीन नहीं,<br/>
इस दिल का क्या करूँ ये बहलता कहीं नहीं।
    ये तो नहीं कि तुम सा जहान में हसीन नहीं,
    इस दिल का क्या करूँ ये बहलता कहीं नहीं।
    ~ Daagh Dehlvi
  • न जाओ हाल-ए-दिल-ए-ज़ार देखते जाओ;
    कि जी न चाहे तो नाचार देखते जाओ;

    बहार-ए-उमर् में बाग़-ए-जहाँ की सैर करो;
    खिला हुआ है ये गुलज़ार देखते जाओ;

    उठाओ आँख, न शरमाओ ,ये तो महिफ़ल है;
    ग़ज़ब से जानिब-ए-अग़यार देखते जाओ;

    हुआ है क्या अभी हंगामा अभी कुछ होगा;
    फ़ुगां में हश्र के आसार देखते जाओ;

    तुम्हारी आँख मेरे दिल से बेसबब-बेवजह;
    हुई है लड़ने को तय्यार देखते जाओ;

    न जाओ बंद किए आँख रहरवान-ए-अदम;
    इधर-उधर भी ख़बरदार देखते जाओ;

    कोई न कोई हर इक शेर में है बात ज़रूर;
    जनाबे-दाग़ के अशआर देखते जाओ।
    ~ Daagh Dehlvi
  • दिल को क्या हो गया...

    दिल को क्या हो गया ख़ुदा जाने;
    क्यों है ऐसा उदास क्या जाने;

    कह दिया मैं ने हाल-ए-दिल अपना;
    इस को तुम जानो या ख़ुदा जाने;

    जानते जानते ही जानेगा;
    मुझ में क्या है वो अभी क्या जाने;

    तुम न पाओगे सादा दिल मुझसा;
    जो तग़ाफ़ुल को भी हया जाने।
    ~ Daagh Dehlvi