• शाम-ए-फ़िराक़ अब न पूछ आई और आ के टल गई:

    शाम-ए-फ़िराक़ अब न पूछ आई और आ के टल गई,
    दिल था कि फिर बहल गया जाँ थी कि फिर सँभल गई;

    बज़्म-ए-ख़याल में तेरे हुस्न की शमा जल गई,
    दर्द का चाँद बुझ गया हिज्र की रात ढल गई;

    जब तुझे याद कर लिया सुब्ह महक महक उठी,
    जब तेरा ग़म जगा लिया रात मचल मचल गई;

    दिल से तो हर मुआमला कर के चले थे साफ़ हम,
    कहने में उन के सामने बात बदल बदल गई;

    आख़िर-ए-शब के हम-सफ़र 'फ़ैज़' न जाने क्या हुए,
    रह गई किस जगह सबा सुब्ह किधर निकल गई!
    ~ Faiz Ahmad Faiz
  • और भी दुख हैं ज़माने में मोहब्बत के सिवा; <br/>
राहतें और भी हैं वस्ल की राहत के सिवा! x
    और भी दुख हैं ज़माने में मोहब्बत के सिवा;
    राहतें और भी हैं वस्ल की राहत के सिवा! x
    ~ Faiz Ahmad Faiz
  • दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है;<br/>
लम्बी है गम की शाम मगर शाम ही तो है!
    दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है;
    लम्बी है गम की शाम मगर शाम ही तो है!
    ~ Faiz Ahmad Faiz
  • तुझ पे उठ्ठी हैं वो खोई हुयी साहिर आँखें;<br/>
तुझ को मालूम है क्यों उम्र गवाँ दी हमने!
    तुझ पे उठ्ठी हैं वो खोई हुयी साहिर आँखें;
    तुझ को मालूम है क्यों उम्र गवाँ दी हमने!
    ~ Faiz Ahmad Faiz
  • इक फ़ुर्सत-ए-गुनाह मिली वो भी चार दिन;<br/>
देखे हैं हम ने हौसले पर्वरदिगार के!
    इक फ़ुर्सत-ए-गुनाह मिली वो भी चार दिन;
    देखे हैं हम ने हौसले पर्वरदिगार के!
    ~ Faiz Ahmad Faiz
  • आए कुछ अब्र कुछ शराब आए;
    उस के बाद आए जो अज़ाब आए!

    अब्र: बादल,
    अज़ाब: दुख़, संकट, विपदा
    ~ Faiz Ahmad Faiz
  • उठकर तो आ गये हैं तेरी बज़्म से मगर;<br/>
कुछ दिल ही जानता है कि किस दिल से आये हैं!
    उठकर तो आ गये हैं तेरी बज़्म से मगर;
    कुछ दिल ही जानता है कि किस दिल से आये हैं!
    ~ Faiz Ahmad Faiz
  • नहीं निग़ाह में मंज़िल तो जुस्त-जू ही सही;<br/>
नहीं विसाल मयस्सर तो आरज़ू ही सही!
    नहीं निग़ाह में मंज़िल तो जुस्त-जू ही सही;
    नहीं विसाल मयस्सर तो आरज़ू ही सही!
    ~ Faiz Ahmad Faiz
  • दिल ना-उम्मीद तो नहीं नाकाम ही तो है;<br/>
लंबी है गम की शाम, मगर शाम ही तो है।
    दिल ना-उम्मीद तो नहीं नाकाम ही तो है;
    लंबी है गम की शाम, मगर शाम ही तो है।
    ~ Faiz Ahmad Faiz
  • इक तर्जे-तगाफुल है सो वह उनको मुबारक;<br/>
इक अर्जे-तमन्ना है, सो हम करते रहेंगे। <br/><br/>
अर्थ:<br/>
1. तर्जे-तगाफुल - उपेक्षा या बेतवज्जुही की आदत या स्वभाव<br/>
2. अर्जे-तमन्ना - ख्वाहिश या आरजू की अभिव्यक्ति
    इक तर्जे-तगाफुल है सो वह उनको मुबारक;
    इक अर्जे-तमन्ना है, सो हम करते रहेंगे।

    अर्थ:
    1. तर्जे-तगाफुल - उपेक्षा या बेतवज्जुही की आदत या स्वभाव
    2. अर्जे-तमन्ना - ख्वाहिश या आरजू की अभिव्यक्ति
    ~ Faiz Ahmad Faiz