• तुझ पे उठ्ठी हैं वो खोई हुयी साहिर आँखें;<br/>
तुझ को मालूम है क्यों उम्र गवाँ दी हमने!
    तुझ पे उठ्ठी हैं वो खोई हुयी साहिर आँखें;
    तुझ को मालूम है क्यों उम्र गवाँ दी हमने!
    ~ Faiz Ahmad Faiz
  • इक फ़ुर्सत-ए-गुनाह मिली वो भी चार दिन;<br/>
देखे हैं हम ने हौसले पर्वरदिगार के!
    इक फ़ुर्सत-ए-गुनाह मिली वो भी चार दिन;
    देखे हैं हम ने हौसले पर्वरदिगार के!
    ~ Faiz Ahmad Faiz
  • आए कुछ अब्र कुछ शराब आए;
    उस के बाद आए जो अज़ाब आए!

    अब्र: बादल,
    अज़ाब: दुख़, संकट, विपदा
    ~ Faiz Ahmad Faiz
  • उठकर तो आ गये हैं तेरी बज़्म से मगर;<br/>
कुछ दिल ही जानता है कि किस दिल से आये हैं!
    उठकर तो आ गये हैं तेरी बज़्म से मगर;
    कुछ दिल ही जानता है कि किस दिल से आये हैं!
    ~ Faiz Ahmad Faiz
  • नहीं निग़ाह में मंज़िल तो जुस्त-जू ही सही;<br/>
नहीं विसाल मयस्सर तो आरज़ू ही सही!
    नहीं निग़ाह में मंज़िल तो जुस्त-जू ही सही;
    नहीं विसाल मयस्सर तो आरज़ू ही सही!
    ~ Faiz Ahmad Faiz
  • दिल ना-उम्मीद तो नहीं नाकाम ही तो है;<br/>
लंबी है गम की शाम, मगर शाम ही तो है।
    दिल ना-उम्मीद तो नहीं नाकाम ही तो है;
    लंबी है गम की शाम, मगर शाम ही तो है।
    ~ Faiz Ahmad Faiz
  • इक तर्जे-तगाफुल है सो वह उनको मुबारक;<br/>
इक अर्जे-तमन्ना है, सो हम करते रहेंगे। <br/><br/>
अर्थ:<br/>
1. तर्जे-तगाफुल - उपेक्षा या बेतवज्जुही की आदत या स्वभाव<br/>
2. अर्जे-तमन्ना - ख्वाहिश या आरजू की अभिव्यक्ति
    इक तर्जे-तगाफुल है सो वह उनको मुबारक;
    इक अर्जे-तमन्ना है, सो हम करते रहेंगे।

    अर्थ:
    1. तर्जे-तगाफुल - उपेक्षा या बेतवज्जुही की आदत या स्वभाव
    2. अर्जे-तमन्ना - ख्वाहिश या आरजू की अभिव्यक्ति
    ~ Faiz Ahmad Faiz
  • आते-आते आयेगा उनको ख्याल;<br/>
जाते-जाते बेख्याली जायेगी।<br/><br/>
Meaning:<br/>
बेख्याली - बेखुदी, बेखबरी
    आते-आते आयेगा उनको ख्याल;
    जाते-जाते बेख्याली जायेगी।

    Meaning:
    बेख्याली - बेखुदी, बेखबरी
    ~ Faiz Ahmad Faiz
  • कर रहा था गम-ए-जहान का हिसाब;<br/>
आज तुम याद बेहिसाब आये।
    कर रहा था गम-ए-जहान का हिसाब;
    आज तुम याद बेहिसाब आये।
    ~ Faiz Ahmad Faiz
  • वो आ रहे हैं वो आते हैं आ रहे होंगे,<br/>
शब-ए-फ़िराक़ ये कह कर गुज़ार दी हम ने।
    वो आ रहे हैं वो आते हैं आ रहे होंगे,
    शब-ए-फ़िराक़ ये कह कर गुज़ार दी हम ने।
    ~ Faiz Ahmad Faiz