• यादों की बौछारों से जब पलकें भीगने लगती हैं;<br/>
सोंधी सोंधी लगती है तब माज़ी की रुस्वाई भी!
    यादों की बौछारों से जब पलकें भीगने लगती हैं;
    सोंधी सोंधी लगती है तब माज़ी की रुस्वाई भी!
    ~ Gulzar
  • बहुत मुश्किल से करता हूँ, तेरी यादों का कारोबार;<br/>
मुनाफा कम है, पर गुज़ारा हो ही जाता है!
    बहुत मुश्किल से करता हूँ, तेरी यादों का कारोबार;
    मुनाफा कम है, पर गुज़ारा हो ही जाता है!
    ~ Gulzar
  • एक सपने के टूटकर चकनाचूर हो जाने के बाद;<br/>
दूसरा सपना देखने के हौसले को 'ज़िंदगी' कहते हैं!
    एक सपने के टूटकर चकनाचूर हो जाने के बाद;
    दूसरा सपना देखने के हौसले को 'ज़िंदगी' कहते हैं!
    ~ Gulzar
  • आज हर ख़ामोशी को मिटा देने का मन है;<br/>
जो भी छिपा रखा है मन में लूटा देने का मन है!
    आज हर ख़ामोशी को मिटा देने का मन है;
    जो भी छिपा रखा है मन में लूटा देने का मन है!
    ~ Gulzar
  • तेरे उतारे हुए दिन पहन के, अब भी मैं,<br/>
तेरी महक में कई रोज़ काट देता हूँ।
    तेरे उतारे हुए दिन पहन के, अब भी मैं,
    तेरी महक में कई रोज़ काट देता हूँ।
    ~ Gulzar
  • वक़्त रहता नहीं कहीं टिक कर,<br/>
आदत इस की भी आदमी सी है।
    वक़्त रहता नहीं कहीं टिक कर,
    आदत इस की भी आदमी सी है।
    ~ Gulzar
  • ये फ़ासले तेरी गलियों के हमसे तय ना हुए;
    हज़ार बार रुके हम हज़ार बार चले।
    ~ Gulzar
  • आदतन तुमने कर दिए वादे, आदतन हमने ऐतबार किया;<br/> 
तेरी राहों में बारहा रुक हमने अपना ही इंतज़ार किया; <br/>
अब ना मांगेंगे ज़िन्दगी या रब, ये गुनाह हमने एक बार किया!
    आदतन तुमने कर दिए वादे, आदतन हमने ऐतबार किया;
    तेरी राहों में बारहा रुक हमने अपना ही इंतज़ार किया;
    अब ना मांगेंगे ज़िन्दगी या रब, ये गुनाह हमने एक बार किया!
    ~ Gulzar