• जिगर की आग बुझे जिससे जल्द वो शय ला,
    लगा के बर्फ़ में साक़ी, सुराही-ए-मय ला।
    ~ Insha Allah Khan Insha
  • झूठा निकला क़रार तेरा;
    अब किसको है ऐतबार तेरा;

    दिल में सौ लाख चुटकियाँ लीं;
    देखा बस हम ने प्यार तेरा;

    दम नाक में आ रहा था अपने;
    था रात ये इंतिज़ार तेरा;

    कर ज़बर जहाँ तलक़ तू चाहे;
    मेरा क्या, इख्तियार तेरा;

    लिपटूँ हूँ गले से आप अपने;
    समझूँ कि है किनार तेरा;

    "इंशा" से मत रूठ, खफा हो;
    है बंदा जानिसार तेरा।
    ~ Insha Allah Khan Insha
  • छेड़ने का तो मज़ा तब है कहो और सुनो;
    बात में तुम तो ख़फ़ा हो गये, लो और सुनो;

    तुम कहोगे जिसे कुछ, क्यूँ न कहेगा तुम को;
    छोड़ देवेगा भला, देख तो लो, और सुनो;

    यही इंसाफ़ है कुछ सोचो तो अपने दिल में;
    तुम तो सौ कह लो, मेरी एक न सुनो और सुनो;

    आफ़रीं तुम पे, यही चाहिए शाबाश तुम्हें;
    देख रोता मुझे यूँ हँसने लगो और सुनो;

    बात मेरी नहीं सुनते जो अकेले मिल कर;
    ऐसे ही ढँग से सुनाऊँ के सुनो और सुनो।
    ~ Insha Allah Khan Insha
  • झूठा निकला क़रार तेरा;
    अब किसको है ऐतबार तेरा;

    दिल में सौ लाख चुटकियाँ लीं;
    देखा बस हम ने प्यार तेरा;

    दम नाक में आ रहा था अपने;
    था रात ये इंतिज़ार तेरा;

    कर ज़बर जहाँ तलक़ तू चाहे;
    मेरा क्या, इख्तियार तेरा;

    लिपटूँ हूँ गले से आप अपने;
    समझूँ कि है किनार तेरा;

    'इंशा' से मत रूठ, खफा हो;
    है बंदा जानिसार तेरा।
    ~ Insha Allah Khan Insha
  • झूठा निकला...

    झूठा निकला क़रार तेरा;
    अब किसको है ऐतबार तेरा;

    दिल में सौ लाख चुटकियाँ लीं;
    देखा बस हम ने प्यार तेरा;

    दम नाक में आ रहा था अपने;
    था रात ये इंतज़ार तेरा;

    कर ज़बर जहाँ तलक़ तू चाहे;
    मेरा क्या, इख्तियार तेरा;

    लिपटूँ हूँ गले से आप अपने;
    समझूँ कि है किनार तेरा;

    'इंशा' से मत रूठ, खफा हो;
    है बंदा जानिसार तेरा।
    ~ Insha Allah Khan Insha
  • झूठा निकला...

    झूठा निकला क़रार तेरा;
    अब किसको है ऐतबार तेरा

    ; दिल में सौ लाख चुटकियाँ लीं;
    देखा बस हम ने प्यार तेरा;

    दम नाक में आ रहा था अपने;
    था रात ये इंतज़ार तेरा;

    कर ज़बर जहाँ तलक़ तू चाहे;
    मेरा क्या, इख्तियार तेरा;

    लिपटूँ हूँ गले से आप अपने;
    समझूँ कि है किनार तेरा;

    'इंशा' से मत रूठ, खफा हो;
    है बंदा जानिसार तेरा।
    ~ Insha Allah Khan Insha
  • अजीब लुत्फ़ कुछ आपस की छेड़-छाड़ में है;
    कहाँ मिलाप में वो बात जो बिगाड़ में है।
    ~ Insha Allah Khan Insha
  • झूठा निकला क़रार तेरा...

    झूठा निकला क़रार तेरा;
    अब किसको है ऐतबार तेरा;

    दिल में सौ लाख चुटकियाँ लीं;
    देखा बस हम ने प्यार तेरा;

    दम नाक में आ रहा था अपने;
    था रात से इंतज़ार तेरा;

    कर ज़बर जहाँ तलक़ तू चाहे;
    मेरा क्या, इख्तियार तेरा;

    लिपटूँ हूँ गले से आप अपने;
    समझूँ कि है किनार तेरा;

    'इंशा' से मत रूठ, खफा हो;
    है बंदा जानिसार तेरा।
    ~ Insha Allah Khan Insha