• क्यों डरे कि ज़िन्दग़ी में क्या होगा, हर वक़्त क्यों सोचे कि बुरा होगा;<br/>
बढ़ते रहे बस मंज़िलो की ओर, हमे कुछ मिले या ना मिले, तज़ुर्बा तो नया होगा!
    क्यों डरे कि ज़िन्दग़ी में क्या होगा, हर वक़्त क्यों सोचे कि बुरा होगा;
    बढ़ते रहे बस मंज़िलो की ओर, हमे कुछ मिले या ना मिले, तज़ुर्बा तो नया होगा!
    ~ Javed Akhtar
  • ये ज़िंदगी भी अजब कारोबार है कि मुझे;<br/>
ख़ुशी है पाने की कोई न रंज खोने का!
    ये ज़िंदगी भी अजब कारोबार है कि मुझे;
    ख़ुशी है पाने की कोई न रंज खोने का!
    ~ Javed Akhtar
  • जिधर जाते हैं सब जाना उधर अच्छा नहीं लगता;<br/>
मुझे पामाल रस्तों का सफ़र अच्छा नहीं लगता!
    जिधर जाते हैं सब जाना उधर अच्छा नहीं लगता;
    मुझे पामाल रस्तों का सफ़र अच्छा नहीं लगता!
    ~ Javed Akhtar
  • जिधर जाते हैं सब जाना उधर अच्छा नहीं लगता;<br/>
मुझे पामाल रस्तों का सफ़र अच्छा नहीं लगता!
    जिधर जाते हैं सब जाना उधर अच्छा नहीं लगता;
    मुझे पामाल रस्तों का सफ़र अच्छा नहीं लगता!
    ~ Javed Akhtar
  • मैं खुद भी सोचता हूँ...

    मैं खुद भी सोचता हूँ ये क्या मेरा हाल है;
    जिसका जवाब चाहिए, वो क्या सवाल है;

    घर से चला तो दिल के सिवा पास कुछ न था;
    क्या मुझसे खो गया है, मुझे क्या मलाल है;

    आसूदगी से दिल के सभी दाग धुल गए;
    लेकिन वो कैसे जाए, जो शीशे में बल है;

    बे-दस्तो-पा हू आज तो इल्जाम किसको दूँ;
    कल मैंने ही बुना था, ये मेरा ही जाल है;

    फिर कोई ख्वाब देखूं, कोई आरजू करूँ;
    अब ऐ दिल-ए-तबाह, तेरा क्या ख्याल है।
    ~ Javed Akhtar
  • दर्द अपनाता है...

    दर्द अपनाता है पराए कौन;
    कौन सुनता है और सुनाए कौन;

    कौन दोहराए वो पुरानी बात;
    ग़म अभी सोया है जगाए कौन;

    वो जो अपने हैं क्या वो अपने हैं;
    कौन दुख झेले आज़माए कौन;

    अब सुकूँ है तो भूलने में है;
    लेकिन उस शख़्स को भुलाए कौन;

    आज फिर दिल है कुछ उदास उदास;
    देखिये आज याद आए कौन।
    ~ Javed Akhtar
  • ऊँची इमारतों से मकां मेरा घिर गया​;
    ​कुछ लोग मेरे हिस्से का सूरज भी खा गए।
    ~ Javed Akhtar