• ​सोचा था घर बना कर बैठुंगा सुकून से;<br/>पर घर की ज़रूरतों ने मुसाफ़िर बना डाला​।Upload to Facebook
    ​सोचा था घर बना कर बैठुंगा सुकून से;
    पर घर की ज़रूरतों ने मुसाफ़िर बना डाला​।
    ~ JD Ghai
  • ना इश्क़ का इज़हार किया, ना ठुकरा सके हमें वो;<br/>
हम तमाम ज़िंदगी मज़लूम रहे, उनके वादा मोहब्बत के।Upload to Facebook
    ना इश्क़ का इज़हार किया, ना ठुकरा सके हमें वो;
    हम तमाम ज़िंदगी मज़लूम रहे, उनके वादा मोहब्बत के।
    ~ JD Ghai
  • ​इश्क़ की बंदगी दी है तो हुस्न की इबादत जरूरी है;<br/>
इश्क़ से जीने की आस रहेगी और हुस्न से तड़प का सकून​।Upload to Facebook
    ​इश्क़ की बंदगी दी है तो हुस्न की इबादत जरूरी है;
    इश्क़ से जीने की आस रहेगी और हुस्न से तड़प का सकून​।
    ~ JD Ghai
  • आँखों में इश्क़, लब पे ख़ामोशी;<br/>
अंदाज़ में इकरार, जिस्म में इंकार;<br/>
कहाँ जाएं मोहब्बत करने वाले;<br/>
एक तरफ जन्नत, दूसरी तरफ जहन्नुम।Upload to Facebook
    आँखों में इश्क़, लब पे ख़ामोशी;
    अंदाज़ में इकरार, जिस्म में इंकार;
    कहाँ जाएं मोहब्बत करने वाले;
    एक तरफ जन्नत, दूसरी तरफ जहन्नुम।
    ~ JD Ghai
  • हुस्न भी था, कशिश भी थी;<br/>
अंदाज़ भी था, नक़ाब भी था;<br/>
हया भी थी, प्यार भी था;<br/>
अगर कुछ ना था तो बस इकरार।Upload to Facebook
    हुस्न भी था, कशिश भी थी;
    अंदाज़ भी था, नक़ाब भी था;
    हया भी थी, प्यार भी था;
    अगर कुछ ना था तो बस इकरार।
    ~ JD Ghai
  • हमें अपने हबीब से यही एक शिकायत है;<br/>
ज़िंदगी में तो आए नहीं, लेकिन हमें सपनों में सताते रहे।Upload to Facebook
    हमें अपने हबीब से यही एक शिकायत है;
    ज़िंदगी में तो आए नहीं, लेकिन हमें सपनों में सताते रहे।
    ~ JD Ghai
  • ख्याल में वो...

    ख्याल में वो, बेसुरती में वो;
    आँखों में वो, अक्स में वो;

    ख़ुशी में वो, दर्द में वो;
    आब में वो, शराब में वो;

    लाभ में वो, बेहिसाब में वो;
    मेरे अब हो लो, या जान मेरी लो।
    ~ JD Ghai
  • ये इश्क़ के घाव बहुत गहरे है;<br/>
दर्द भी देते हैं और भरते भी नहीं।Upload to Facebook
    ये इश्क़ के घाव बहुत गहरे है;
    दर्द भी देते हैं और भरते भी नहीं।
    ~ JD Ghai