• या वो थे ख़फ़ा हम से, या हम हैं ख़फ़ा उन से;<br/>
कल उन का ज़माना था, आज अपना ज़माना है!
    या वो थे ख़फ़ा हम से, या हम हैं ख़फ़ा उन से;
    कल उन का ज़माना था, आज अपना ज़माना है!
    ~ Jigar Moradabadi
  • जो तूफ़ानों में पलते जा रहे हैं;<br/>
वही दुनिया बदलते जा रहे हैं!
    जो तूफ़ानों में पलते जा रहे हैं;
    वही दुनिया बदलते जा रहे हैं!
    ~ Jigar Moradabadi
  • ज़िंदगी एक हादसा है और कैसा हादसा;<br/>
मौत से भी ख़त्म जिस का सिलसिला होता नहीं!
    ज़िंदगी एक हादसा है और कैसा हादसा;
    मौत से भी ख़त्म जिस का सिलसिला होता नहीं!
    ~ Jigar Moradabadi
  • एक लफ़्ज़-ए-मोहब्बत का अदना ये फ़साना है;<br/>
सिमटे तो दिल-ए-आशिक़ फैले तो ज़माना है!
    एक लफ़्ज़-ए-मोहब्बत का अदना ये फ़साना है;
    सिमटे तो दिल-ए-आशिक़ फैले तो ज़माना है!
    ~ Jigar Moradabadi
  • तेरी आँखों का कुछ क़ुसूर नहीं;<br/>
हाँ मुझ ही को ख़राब होना था!
    तेरी आँखों का कुछ क़ुसूर नहीं;
    हाँ मुझ ही को ख़राब होना था!
    ~ Jigar Moradabadi
  • आँखों में नमी सी है चुप चुप से वो बैठे हैं;<br/>
नाज़ुक सी निगाहों में नाज़ुक सा फ़साना है!
    आँखों में नमी सी है चुप चुप से वो बैठे हैं;
    नाज़ुक सी निगाहों में नाज़ुक सा फ़साना है!
    ~ Jigar Moradabadi
  • हमीं जब न होंगे तो क्या रंग-ए-महफ़िल;<br/>
किसे देख कर आप शरमाइएगा!
    हमीं जब न होंगे तो क्या रंग-ए-महफ़िल;
    किसे देख कर आप शरमाइएगा!
    ~ Jigar Moradabadi
  • बहुत हसीन सही सोहबतें गुलों की मगर;<br/>
वो ज़िंदगी है जो काँटों के दरमियाँ गुज़रे!
    बहुत हसीन सही सोहबतें गुलों की मगर;
    वो ज़िंदगी है जो काँटों के दरमियाँ गुज़रे!
    ~ Jigar Moradabadi
  • क्या हुस्न ने समझा है क्या इश्क़ ने जाना है; <br/>
हम ख़ाक-नशीनों की ठोकर में ज़माना है!
    क्या हुस्न ने समझा है क्या इश्क़ ने जाना है;
    हम ख़ाक-नशीनों की ठोकर में ज़माना है!
    ~ Jigar Moradabadi
  • गुनाहगार के दिल से न बच के चल ज़ाहिद;<br/>
यहीं कहीं तिरी जन्नत भी पाई जाती है!<br/><br/>

ज़ाहिद  =  धार्मिक व्यक्ति
    गुनाहगार के दिल से न बच के चल ज़ाहिद;
    यहीं कहीं तिरी जन्नत भी पाई जाती है!

    ज़ाहिद = धार्मिक व्यक्ति
    ~ Jigar Moradabadi