• क्या जाने किसी की प्यास बुझाने किधर गयीं;<br/>
उस सिर पे झूम के जो घटाएँ गुज़र गयीं!Upload to Facebook
    क्या जाने किसी की प्यास बुझाने किधर गयीं;
    उस सिर पे झूम के जो घटाएँ गुज़र गयीं!
    ~ Kaifi Azmi
  • बस इक झिजक है यही हाल-ए-दिल सुनाने में;<br/>
कि तेरा ज़िक्र भी आएगा इस फ़साने में।Upload to Facebook
    बस इक झिजक है यही हाल-ए-दिल सुनाने में;
    कि तेरा ज़िक्र भी आएगा इस फ़साने में।
    ~ Kaifi Azmi
  • गर डूबना ही अपना मुक़द्दर है तो सुनो;<br/>
डूबेंगे हम ज़रूर मगर नाख़ुदा के साथ।<br/><br/>

Meaning:<br/>
नाख़ुदा  =  नाविकUpload to Facebook
    गर डूबना ही अपना मुक़द्दर है तो सुनो;
    डूबेंगे हम ज़रूर मगर नाख़ुदा के साथ।

    Meaning:
    नाख़ुदा = नाविक
    ~ Kaifi Azmi
  • बरस पड़ी थी जो रुख़ से नक़ाब उठाने में;<br/>
वो चाँदनी है अभी तक मेरे ग़रीब-ख़ाने में|Upload to Facebook
    बरस पड़ी थी जो रुख़ से नक़ाब उठाने में;
    वो चाँदनी है अभी तक मेरे ग़रीब-ख़ाने में|
    ~ Kaifi Azmi
  • अब जिस तरफ़ से चाहे गुज़र जाए कारवाँ,<br/>
वीरानियाँ तो सब मेरे दिल में उतर गईं।Upload to Facebook
    अब जिस तरफ़ से चाहे गुज़र जाए कारवाँ,
    वीरानियाँ तो सब मेरे दिल में उतर गईं।
    ~ Kaifi Azmi
  • ऐ सबा, लौट के...

    ऐ सबा, लौट के किस शहर से तू आती है;
    तेरी हर लहर से बारूद की बू आती है;

    खून कहाँ बहता है इंसान का पानी की तरह;
    जिस से तू रोज़ यहाँ करके वजू आती है;

    धज्जियाँ तूने नकाबों की गिनी तो होंगी;
    यूँ ही लौट आती है या कर के रफ़ू आती है;

    अपने सीने में चुरा लाई है किस की आहें;
    मल के रुखसार पे किस किस का लहू आती है।
    ~ Kaifi Azmi
  • जब भी चूम लेता हूँ...

    जब भी चूम लेता हूँ उन हसीन आँखों को;
    सौ चिराग अँधेरे में जगमगाने लगते हैं;

    फूल क्या शगूफे क्या चाँद क्या सितारे क्या;
    सब रकीब कदमों पर सर झुकाने लगते हैं;

    रक्स करने लगतीं हैं मूरतें अजंता की;
    मुद्दतों के लब-बस्ता ग़ार गाने लगते हैं;

    फूल खिलने लगते हैं उजड़े-उजड़े गुलशन में;
    प्यासी-प्यासी धरती पर अब्र छाने लगते हैं;

    लम्हें भर को ये दुनिया ज़ुल्म छोड़ देती है;
    लम्हें भर को सब पत्थर मुस्कुराने लगते हैं।
    ~ Kaifi Azmi
  • इतना तो ज़िंदगी में...

    इतना तो ज़िंदगी में किसी की ख़लल पड़े;
    हँसने से हो सुकून ना रोने से कल पड़े;

    जिस तरह हँस रहा हूँ मैं पी-पी के अश्क-ए-ग़म;
    यूँ दूसरा हँसे तो कलेजा निकल पड़े;

    एक तुम के तुम को फ़िक्र-ए-नशेब-ओ-फ़राज़ है;
    एक हम के चल पड़े तो बहरहाल चल पड़े;

    मुद्दत के बाद उस ने जो की लुत्फ़ की निगाह;
    जी ख़ुश तो हो गया मगर आँसू निकल पड़े;

    साक़ी सभी को है ग़म-ए-तश्नालबी मगर;
    मय है उसी के नाम पे जिस के उबल पड़े।
    ~ Kaifi Azmi
  • चांदनी रात बड़ी देर के बाद आयी;
    ये मुलाक़ात बड़ी देर के बाद आयी;
    आज आये हैं वो मिलने को बड़ी देर के बाद;
    आज की रात बड़ी देर के बाद आयी।
    ~ Kaifi Azmi
  • रहने को सदा...

    ​रहने को सदा दहर में​ आता नहीं कोई​;
    तुम जैसे गए ऐसे भी​ जाता नहीं कोई;​​​

    ​एक बार तो​ खुद मौत भी​ घबरा गयी होगी​;​
    यूँ मौत को​ सीने से लगाता नहीं कोई;​

    ​​डरता हूँ​ कहीं खुश्क़ न हो जाए समुन्दर​;​
    राख अपनी कभी आप बहाता नहीं कोई;​​

    ​​ साक़ी से गिला था तुम्हें मैख़ाने से शिकवा​;​
    अब ज़हर से भी प्यास बुझाता नहीं कोई;​​
    ​​
    ​​माना कि उजालों ने तुम्हे दाग़ दिए थे​;​
    बे-रात ढले​ शम्मा​ बुझाता नहीं कोई​।
    ~ Kaifi Azmi