• ग़म है न अब ख़ुशी है न उम्मीद है न आस;<br/>
सब से नजात पाए ज़माने गुज़र गए!
    ग़म है न अब ख़ुशी है न उम्मीद है न आस;
    सब से नजात पाए ज़माने गुज़र गए!
    ~ Khumar Barabankvi
  • भूले हैं रफ़्ता रफ़्ता उन्हें मु्द्दतों में हम;<br/>
किश्तों में ख़ुदकुशी का मज़ा हम से पूछिये!
    भूले हैं रफ़्ता रफ़्ता उन्हें मु्द्दतों में हम;
    किश्तों में ख़ुदकुशी का मज़ा हम से पूछिये!
    ~ Khumar Barabankvi
  • तेरे दर से उठकर...

    तेरे दर से उठकर जिधर जाऊं मैं;
    चलूँ दो कदम और ठहर जाऊं मैं;

    अगर तू ख़फा हो तो परवा नहीं;
    तेरा गम ख़फा हो तो मर जाऊं मैं;

    तब्बसुम ने इतना डसा है मुझे;
    कली मुस्कुराए तो डर जाऊं मैं;

    सम्भाले तो हूँ खुदको, तुझ बिन मगर;
    जो छू ले कोई तो बिखर जाऊं मैं।
    ~ Khumar Barabankvi
  • ये वफ़ा की सख़्त राहें ये तुम्हारे पाँव नाज़ुक;<br />
ना लो इंतिक़ाम मुझ से मेरे साथ साथ चल के।
    ये वफ़ा की सख़्त राहें ये तुम्हारे पाँव नाज़ुक;
    ना लो इंतिक़ाम मुझ से मेरे साथ साथ चल के।
    ~ Khumar Barabankvi
  • वो खफा है तो कोई बात नहीं;
    इश्क मोहताज-ए-इल्त्फाक नहीं;

    दिल बुझा हो अगर तो दिन भी है रात नहीं;
    दिन हो रोशन तो रात रात नहीं;

    दिल-ए-साकी मैं तोड़ू-ए-वाइल;
    जा मुझे ख्वाइश-ए-नजात नहीं;

    ऐसी भूली है कायनात मुझे;
    जैसे मैं जिस्ब-ए-कायनात नहीं;

    पीर की बस्ती जा रही है मगर;
    सबको ये वहम है कि रात नहीं;

    मेरे लायक नहीं हयात "ख़ुमार";
    और मैं लायक-ए-हयात नहीं।
    ~ Khumar Barabankvi
  • दुनिया के ज़ोर प्यार के दिन याद आ गये;
    दो बाज़ुओ की हार के दिन याद आ गये;
    गुज़रे वो जिस तरफ से बज़ाए महक उठी;
    सबको भरी बहार के दिन याद आ गये।
    ~ Khumar Barabankvi
  • मुझ को शिकस्त-ए-दिल का मज़ा याद आ गया;
    तुम क्यों उदास हो गए क्या याद आ गया;
    कहने को ज़िन्दगी थी बहुत मुख्तसर मगर;
    कुछ यूँ बसर हुई कि खुदा याद आ गया।
    ~ Khumar Barabankvi
  • कहीं शेर ओ नग़्मा बन के कहीं आँसुओं में ढल के;
    वो मुझे मिले तो लेकिन कई सूरतें बदल के।
    ~ Khumar Barabankvi
  • तेरे दर से उठकर...

    तेरे दर से उठकर जिधर जाऊं मैं;
    चलूँ दो कदम और ठहर जाऊं मैं;

    अगर तू ख़फा हो तो परवाह नहीं;
    तेरा गम ख़फा हो तो मर जाऊं मैं;

    तब्बसुम ने इतना डसा है मुझे;
    कली मुस्कुराए तो डर जाऊं मैं;

    सम्भाले तो हूँ खुदको, तुझ बिन मगर;
    जो छू ले कोई तो बिखर जाऊं मैं।
    ~ Khumar Barabankvi
  • दुनिया के ज़ोर...

    दुनिया के ज़ोर प्यार के दिन याद आ गये;
    दो बाज़ुओ की हार के दिन याद आ गये;

    गुज़रे वो जिस तरफ से बज़ाए महक उठी;
    सबको भरी बहार के दिन याद आ गये;

    ये क्या कि उनके होते हुए भी कभी-कभी;
    फ़िरदौस-ए-इंत्ज़ार के दिन याद आ गये;

    वादे का उनके आज खयाल आ गया मुझे;
    शक और ऐतबार के दिन याद आ गये;

    नादा थे जब्त-ए-गम का बहुत हज़रत-ए-'खुमार';
    रो-रो जिए थे जब वो याद आ गये।
    ~ Khumar Barabankvi