• अर्ज़-ओ-समा कहाँ तिरी वुसअत को पा सके;<br/>
मेरा ही दिल है वो कि जहाँ तू समा सके!<br/><br/>

अर्ज़-ओ-समा  =  धरती और आकाश<br/>  
वुसअत  =  विशालता, सम्पूर्णता
    अर्ज़-ओ-समा कहाँ तिरी वुसअत को पा सके;
    मेरा ही दिल है वो कि जहाँ तू समा सके!

    अर्ज़-ओ-समा = धरती और आकाश
    वुसअत = विशालता, सम्पूर्णता
    ~ Khwaja Mir Dard
  • जग में आकर इधर उधर देखा...

    जग में आकर इधर उधर देखा;
    तू ही आया नज़र जिधर देखा;

    जान से हो गए बदन ख़ाली;
    जिस तरफ़ तूने आँख भर देखा;

    नाला, फ़रियाद, आह और ज़ारी;
    आप से हो सका सो कर देखा;

    उन लबों ने की न मसीहाई;
    हम ने सौ-सौ तरह से मर देखा;

    ज़ोर आशिक़ मिज़ाज है कोई;
    'दर्द' को क़िस्स:-ए- मुख्तसर देखा।
    ~ Khwaja Mir Dard
  • हम तुझ से किस हवस की फ़लक जुस्तुजू करें;
    दिल ही नहीं रहा है कि कुछ आरज़ू करें।
    ~ Khwaja Mir Dard
  • 'दर्द' के मिलने से ऐ यार बुरा क्यों माना;
    उस को कुछ और सिवा दीद के मंज़ूर न था।
    ~ Khwaja Mir Dard
  • अगर यूँ ही ये दिल सताता रहेगा;
    तो एक दिन मेरा जी जाता रहेगा;
    मैं जाता हूँ दिल को पास तेरे छोड़े;
    मेरी याद तुझको दिलाता रहेगा।
    ~ Khwaja Mir Dard
  • मुझे शिकवा नहीं कुछ बेवफ़ाई का तेरी हरगिज़;
    गिला तब हो अगर तू ने किसी से भी निभाई हो।
    ~ Khwaja Mir Dard
  • तुम आज हँसते हो हंस लो मुझ पर ये आज़माइश ना बार-बार होगी;
    मैं जानता हूं मुझे ख़बर है कि कल फ़ज़ा ख़ुशगवार होगी;
    रहे मुहब्बत में ज़िन्दगी भर रहेगी ये कशमकश बराबर;
    ना तुमको क़ुरबत में जीत होगी ना मुझको फुर्कत में हार होगी।
    ~ Khwaja Mir Dard
  • मुझे शिकवा नहीं कुछ बेवफ़ाई का तेरी हरगिज़;
    गिला तब हो अगर तूने किसी से भी निभाई हो।
    ~ Khwaja Mir Dard
  • मेरा जी है जब तक...

    मेरा जी है जब तक तेरी जुस्तजू है;
    ज़बाँ जब तलक है यही गुफ़्तगू है;

    ख़ुदा जाने क्या होगा अंजाम इसका;
    मै बेसब्र इतना हूँ वो तुन्द ख़ू है;

    तमन्ना है तेरी अगर है तमन्ना;
    तेरी आरज़ू है अगर आरज़ू है;

    किया सैर सब हमने गुलज़ार-ए-दुनिया;
    गुल-ए-दोस्ती में अजब रंग-ओ-बू है;

    ग़नीमत है ये दीद वा दीद-ए-याराँ;
    जहाँ मूँद गयी आँख, मैं है न तू है;

    नज़र मेरे दिल की पड़ी 'दर्द' किस पर;
    जिधर देखता हूँ वही रू-ब-रू है।
    ~ Khwaja Mir Dard
  • अगर यूँ ही ये दिल...

    अगर यूँ ही ये दिल सताता रहेगा;
    तो इक दिन मेरा जी ही जाता रहेगा;

    मैं जाता हूँ दिल को तेरे पास छोड़े;
    मेरी याद तुझको दिलाता रहेगा;

    गली से तेरी दिल को ले तो चला हूँ;
    मैं पहुँचूँगा जब तक ये आता रहेगा;

    क़फ़स में कोई तुम से ऐ हम-सफ़ीरों;
    ख़बर कल की हमको सुनाता रहेगा;

    ख़फ़ा हो कि ऐ 'दर्द' मर तो चला तू;
    कहाँ तक ग़म अपना छुपाता रहेगा।
    ~ Khwaja Mir Dard