• दिल ही तो है न संग-ओ-ख़िश्त दर्द से भर न आए क्यों;<br/>
रोयेंगे हम हज़ार बार कोई हमें सताए क्यों।Upload to Facebook
    दिल ही तो है न संग-ओ-ख़िश्त दर्द से भर न आए क्यों;
    रोयेंगे हम हज़ार बार कोई हमें सताए क्यों।
    ~ Mirza Ghalib
  • क़र्ज़ की पीते थे मय लेकिन समझते थे कि हाँ;<br/>
रंग लावेगी हमारी फ़ाक़ा-मस्ती एक दिन।Upload to Facebook
    क़र्ज़ की पीते थे मय लेकिन समझते थे कि हाँ;
    रंग लावेगी हमारी फ़ाक़ा-मस्ती एक दिन।
    ~ Mirza Ghalib
  • रगों में दौड़ते फिरने के हम नहीं कायल;<br/>
जब आँख से ही न टपका तो फिर लहू क्या है।Upload to Facebook
    रगों में दौड़ते फिरने के हम नहीं कायल;
    जब आँख से ही न टपका तो फिर लहू क्या है।
    ~ Mirza Ghalib
  • इश्क से तबियत ने जीस्त का मजा पाया;<br/>
दर्द की दवा पाई दर्द बे-दवा पाया।Upload to Facebook
    इश्क से तबियत ने जीस्त का मजा पाया;
    दर्द की दवा पाई दर्द बे-दवा पाया।
    ~ Mirza Ghalib
  • की वफ़ा हम से तो ग़ैर इस को जफ़ा कहते हैं;<br/>
होती आई है कि अच्छों को बुरा कहते हैं।Upload to Facebook
    की वफ़ा हम से तो ग़ैर इस को जफ़ा कहते हैं;
    होती आई है कि अच्छों को बुरा कहते हैं।
    ~ Mirza Ghalib
  • इशरत-ए-क़तरा है दरिया में फ़ना हो जाना;<br/>
दर्द का हद से गुज़रना है दवा हो जाना!<br/><br/>
Meaning:<br/>
इशरत-ए-क़तरा  =  बूंद का सुखUpload to Facebook
    इशरत-ए-क़तरा है दरिया में फ़ना हो जाना;
    दर्द का हद से गुज़रना है दवा हो जाना!

    Meaning:
    इशरत-ए-क़तरा = बूंद का सुख
    ~ Mirza Ghalib
  • आह को चाहिए इक उम्र असर होते तक;<br/>
कौन जीता है तिरी ज़ुल्फ़ के सर होते तक।<br/><br/>

Meaning:<br/>
सर  -  सुलझानाUpload to Facebook
    आह को चाहिए इक उम्र असर होते तक;
    कौन जीता है तिरी ज़ुल्फ़ के सर होते तक।

    Meaning:
    सर - सुलझाना
    ~ Mirza Ghalib
  • अपनी गली में मुझ को न कर दफ़्न बाद-ए-क़त्ल;<br/>
मेरे पते से ख़ल्क़ को क्यों तेरा घर मिले।Upload to Facebook
    अपनी गली में मुझ को न कर दफ़्न बाद-ए-क़त्ल;
    मेरे पते से ख़ल्क़ को क्यों तेरा घर मिले।
    ~ Mirza Ghalib
  • बस-कि दुश्वार है हर काम का आसाँ होना;<br/>
आदमी को भी मयस्सर नहीं इंसाँ होना।Upload to Facebook
    बस-कि दुश्वार है हर काम का आसाँ होना;
    आदमी को भी मयस्सर नहीं इंसाँ होना।
    ~ Mirza Ghalib
  • उनके देखने से जो आ जाती है चेहरे पर रौनक;<br/>
वो समझते हैं कि बीमार का हाल अच्छा है।Upload to Facebook
    उनके देखने से जो आ जाती है चेहरे पर रौनक;
    वो समझते हैं कि बीमार का हाल अच्छा है।
    ~ Mirza Ghalib