• हमारे मुल्क की अफ़वाहों की सब से बड़ी खराबी ये है कि वो सच निकलती हैं।
    हमारे मुल्क की अफ़वाहों की सब से बड़ी खराबी ये है कि वो सच निकलती हैं।
    ~ Mushtaq Ahmad Yusufi
  • फूल जो कुछ ज़मीं से लेते हैं, उससे कहीं ज़्यादा लौटा देते हैं।
    फूल जो कुछ ज़मीं से लेते हैं, उससे कहीं ज़्यादा लौटा देते हैं।
    ~ Mushtaq Ahmad Yusufi
  • हुकूमतों के अलावा कोई भी अपनी मौजूदा तरक्की से खुश नहीं होता।
    हुकूमतों के अलावा कोई भी अपनी मौजूदा तरक्की से खुश नहीं होता।
    ~ Mushtaq Ahmad Yusufi
  • सिर्फ 99 प्रतिशत पुलिस वालों की वजह से बाकी 1 प्रतिशत भी बदनाम हैं।
    सिर्फ 99 प्रतिशत पुलिस वालों की वजह से बाकी 1 प्रतिशत भी बदनाम हैं।
    ~ Mushtaq Ahmad Yusufi
  • हमारे ज़माने में तरबूज़ इस तरह खरीदा जाता था जैसे आज कल शादी होती है- सिर्फ सूरत देखकर।
    हमारे ज़माने में तरबूज़ इस तरह खरीदा जाता था जैसे आज कल शादी होती है- सिर्फ सूरत देखकर।
    ~ Mushtaq Ahmad Yusufi
  • मेरा ताल्लुक उस भोली भाली नस्ल से है जो ये समझती है कि बच्चे बुज़ुर्गों की दुआओं से पैदा होते हैं।
    मेरा ताल्लुक उस भोली भाली नस्ल से है जो ये समझती है कि बच्चे बुज़ुर्गों की दुआओं से पैदा होते हैं।
    ~ Mushtaq Ahmad Yusufi
  • कुछ लोग इतने मज़हबी होते है कि जूता पसंद करने के लिए भी मस्ज़िद का रुख़ करते हैं।
    कुछ लोग इतने मज़हबी होते है कि जूता पसंद करने के लिए भी मस्ज़िद का रुख़ करते हैं।
    ~ Mushtaq Ahmad Yusufi
  • दुनिया में ग़ालिब वो अकेला शायर है जो समझ में ना आये तो दुगना मज़ा देता है।
    दुनिया में ग़ालिब वो अकेला शायर है जो समझ में ना आये तो दुगना मज़ा देता है।
    ~ Mushtaq Ahmad Yusufi
  • वो ज़हर दे के मारती तो दुनिया की नज़र में आ जाती, अंदाज़-ए-क़त्ल तो देखो - हमसे शादी कर ली।
    वो ज़हर दे के मारती तो दुनिया की नज़र में आ जाती, अंदाज़-ए-क़त्ल तो देखो - हमसे शादी कर ली।
    ~ Mushtaq Ahmad Yusufi
  • उस शहर की गलियां इतनी तंग थीं, कि गर मुख्तलिफ जीन्स आमने सामने हो जायें, तो निकाह के अलावा कोई गुंजाईश नहीं रहती।
    उस शहर की गलियां इतनी तंग थीं, कि गर मुख्तलिफ जीन्स आमने सामने हो जायें, तो निकाह के अलावा कोई गुंजाईश नहीं रहती।
    ~ Mushtaq Ahmad Yusufi