• चापलूसी का ज़हरीला प्याला आपको तब तक नुकसान नहीं पहुँचा सकता जब तक कि आपके कान उसे अमृत समझ कर पी न जाएँ।
    ~ Premchand
  • क्रोध में मनुष्य अपने मन की बात नहीं कहता, वह केवल दूसरों का दिल दुखाना चाहता है।Upload to Facebook
    क्रोध में मनुष्य अपने मन की बात नहीं कहता, वह केवल दूसरों का दिल दुखाना चाहता है।
    ~ Premchand
  • जिस प्रकार नेत्रहीन के लिए दर्पण बेकार है उसी प्रकार बुद्धिहीन के लिए विद्या बेकार है।Upload to Facebook
    जिस प्रकार नेत्रहीन के लिए दर्पण बेकार है उसी प्रकार बुद्धिहीन के लिए विद्या बेकार है।
    ~ Premchand
  • निराशा सम्भव को असम्भव बना देती है।Upload to Facebook
    निराशा सम्भव को असम्भव बना देती है।
    ~ Premchand
  • युवावस्था आवेशमय होती है, वह क्रोध से आग हो जाती है तो करुणा से पानी भी।
    ~ Premchand
  • कमज़ोर प्राणियों में सत्य भी गूंगा हो जाता है।
    ~ Premchand
  • ​अपनी भूल अपने ही हाथों से सुधर जाए तो यह उससे कहीं अच्छा है कि कोई दूसरा उसे सुधारे।
    ~ Premchand
  • धन खोकर अगर हम अपनी आत्मा को पा सकें तो यह कोई महंगा सौदा नहीं।Upload to Facebook
    धन खोकर अगर हम अपनी आत्मा को पा सकें तो यह कोई महंगा सौदा नहीं।
    ~ Premchand
  • आत्म सम्मान की रक्षा, हमारा सबसे पहला धर्म है।Upload to Facebook
    आत्म सम्मान की रक्षा, हमारा सबसे पहला धर्म है।
    ~ Premchand
  • निराशा सम्भव को असम्भव बना देती है।
    ~ Premchand
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