• मोम के पास कभी:

    मोम के पास कभी आग को लाकर देखूँ,
    सोचता हूँ कि तुझे हाथ लगा कर देखूँ;

    कभी चुपके से चला आऊँ तेरी खिलवत में,
    और तुझे तेरी निगाहों से बचा कर देखूँ;

    मैंने देखा है ज़माने को शराब पी कर,
    दम निकल जाये अगर होश में आकर देखूँ;

    दिल का मंदिर बड़ा वीरान नज़र आता है,
    सोचता हूँ तेरी तस्वीर लगा कर देखूँ;

    तेरे बारे में सुना ये है कि तू सूरज है,
    मैं ज़रा थोड़ी देर तेरे साये में आ कर देखूँ;

    याद आता है कि पहले भी कई बार यूँ ही,
    मैंने सोचा था कि मैं तुझको भुला कर देखूँ।
    ~ Rahat Indori
  • अब ना मैं हूँ, ना बाकी हैं ज़माने मेरे,<br/>
फिर भी मशहूर हैं, शहरों में फ़साने मेरे;<br/>
ज़िंदगी है तो नए ज़ख्म भी लग जाएंगे,<br/>
अब भी बाकी हैं कई दोस्त पुराने मेरे|Upload to Facebook
    अब ना मैं हूँ, ना बाकी हैं ज़माने मेरे,
    फिर भी मशहूर हैं, शहरों में फ़साने मेरे;
    ज़िंदगी है तो नए ज़ख्म भी लग जाएंगे,
    अब भी बाकी हैं कई दोस्त पुराने मेरे|
    ~ Rahat Indori
  • गुलाब, ख्वाब, दवा, ज़हर, जाम क्या क्या हैं;<br/>
मैं आ गया हूँ, बता इंतज़ाम क्या क्या हैं;<br/>
फ़क़ीर, शाह, कलंदर, इमाम क्या क्या हैं;<br/>
तुझे पता नहीं तेरा गुलाम क्या क्या है।Upload to Facebook
    गुलाब, ख्वाब, दवा, ज़हर, जाम क्या क्या हैं;
    मैं आ गया हूँ, बता इंतज़ाम क्या क्या हैं;
    फ़क़ीर, शाह, कलंदर, इमाम क्या क्या हैं;
    तुझे पता नहीं तेरा गुलाम क्या क्या है।
    ~ Rahat Indori
  • सूरज, सितारे, चाँद मेरे साथ में रहें;<br/>
जब तक तुम्हारे हाथ मेरे हाथ में रहें;<br/>
शाखों से टूट जायें वो पत्ते नहीं हैं हम;<br/>
आँधियों से कोई कह दे कि औकात में रहें।Upload to Facebook
    सूरज, सितारे, चाँद मेरे साथ में रहें;
    जब तक तुम्हारे हाथ मेरे हाथ में रहें;
    शाखों से टूट जायें वो पत्ते नहीं हैं हम;
    आँधियों से कोई कह दे कि औकात में रहें।
    ~ Rahat Indori
  • आँखों में पानी रखो, होंठो पे चिंगारी रखो;<br/>
जिंदा रहना है तो तरकीबें बहुत सारी रखो;<br/>
राह के पत्थर से बढ के, कुछ नहीं हैं मंजिलें;<br/>
रास्ते आवाज़ देते हैं, सफ़र जारी रखो।Upload to Facebook
    आँखों में पानी रखो, होंठो पे चिंगारी रखो;
    जिंदा रहना है तो तरकीबें बहुत सारी रखो;
    राह के पत्थर से बढ के, कुछ नहीं हैं मंजिलें;
    रास्ते आवाज़ देते हैं, सफ़र जारी रखो।
    ~ Rahat Indori
  • जागने की भी, जगाने की भी, आदत हो जाए;<br/>
काश तुझको किसी शायर से मोहब्बत हो जाए;<br/>
दूर हम कितने दिन से हैं, ये कभी गौर किया;<br/>
फिर न कहना जो अमानत में खयानत हो जाए।Upload to Facebook
    जागने की भी, जगाने की भी, आदत हो जाए;
    काश तुझको किसी शायर से मोहब्बत हो जाए;
    दूर हम कितने दिन से हैं, ये कभी गौर किया;
    फिर न कहना जो अमानत में खयानत हो जाए।
    ~ Rahat Indori
  • अब हम मकान में ताला लगाने वाले हैं;<br/>
पता चला हैं कि मेहमान आने वाले हैं।Upload to Facebook
    अब हम मकान में ताला लगाने वाले हैं;
    पता चला हैं कि मेहमान आने वाले हैं।
    ~ Rahat Indori
  • रात में कौन वहां जाये जहाँ आग लगी,
    सुबह अख़बार में पढ़ लेंगे कहाँ आग लगी;

    आग से आग बुझाने का अमल जारी था,
    हम भी पानी लिए बैठे थे जहाँ आग लगी;

    वो भी अब आग बुझाने को चले आएं हैं,
    जिनको ये भी नहीं मालूम कहाँ आग लगी;

    किसको फुरसत थी जो देता किसी आवाज़ पे ध्यान,
    चीखता फिरता था आवारा धुंआ आग लगी;

    सुबह तक सारे निशानात मिटा डालेंगे,
    कोई पूछेगा तो कह देंगे कहाँ आग लगी।
    ~ Rahat Indori
  • दिलों में आग लबों पर गुलाब रखते हैं;
    सब अपने चेहरों पे दोहरी नका़ब रखते हैं;

    हमें चराग समझ कर बुझा न पाओगे;
    हम अपने घर में कई आफ़ताब रखते हैं;

    बहुत से लोग कि जो हर्फ़-आश्ना भी नहीं;
    इसी में खुश हैं कि तेरी किताब रखते हैं;

    ये मैकदा है, वो मस्जिद है, वो है बुत-खाना;
    कहीं भी जाओ फ़रिश्ते हिसाब रखते हैं;

    हमारे शहर के मंजर न देख पायेंगे;
    यहाँ के लोग तो आँखों में ख्वाब रखते हैं।
    ~ Rahat Indori
  • उसकी कत्थई आँखों में...

    उसकी कत्थई आँखों में हैं जंतर-मंतर सब;
    चाक़ू-वाक़ू, छुरियाँ-वुरियाँ, ख़ंजर-वंजर सब;

    जिस दिन से तुम रूठीं मुझ से रूठे-रूठे हैं;
    चादर-वादर, तकिया-वकिया, बिस्तर-विस्तर सब;

    मुझसे बिछड़ कर वह भी कहाँ अब पहले जैसी है;
    फीके पड़ गए कपड़े-वपड़े, ज़ेवर-वेवर सब;

    आखिर मै किस दिन डूबूँगा फ़िक्रें करते है;
    कश्ती-वश्ती, दरिया-वरिया लंगर-वंगर सब।
    ~ Rahat Indori