• अगर आप हर रगड़ से चिढ़ कर रहे हैं, तो अपने दर्पण को कैसे पॉलिश करेंगे।
    ~ Rumi
  • अपने शब्दों को ऊँचा करो आवाज़ को नहीं। यह बारिश है जो फूलों को बढ़ने देती है इसकी ग़रज़ नहीं।
    ~ Rumi
  • अगर आप रगड़ से चिढ़ते हैं तो पॉलिश कैसे हो पाओगे।
    अगर आप रगड़ से चिढ़ते हैं तो पॉलिश कैसे हो पाओगे।
    ~ Rumi
  • अपने शब्दों को ऊँचा करो आवाज़ को नहीं। यह बारिश है जो फूलों को बढ़ने देती है इसकी ग़रज़ नहीं।
    अपने शब्दों को ऊँचा करो आवाज़ को नहीं। यह बारिश है जो फूलों को बढ़ने देती है इसकी ग़रज़ नहीं।
    ~ Rumi
  • जब आप हर रगड़ से चिढ़ोगे तो खुद को निखारोगे कैसे।
    ~ Rumi
  • तुम समंदर की एक बूँद नहीं हो। तुम एक पूरा समंदर हो।
    ~ Rumi
  • अपने काम में सुन्दरता तलाशो। उससे सुंदर और कुछ हो ही नहीं सकता।
    ~ Rumi
  • दुनिया हमे यह बताकर मूर्ख बनाती है कि हमें कल का इंतज़ार करना चाहिए, जबकि जीवन का आनंद इसी क्षण में है जिसमे आप जी रहे हैं।
    दुनिया हमे यह बताकर मूर्ख बनाती है कि हमें कल का इंतज़ार करना चाहिए, जबकि जीवन का आनंद इसी क्षण में है जिसमे आप जी रहे हैं।
    ~ Rumi
  • कहीं भी जाने की कोई जरूरत नहीं है। अपने भीतर का सफर तय करो।
    ~ Rumi
  • अपने काम में सुन्दरता तलाशो, उससे सुंदर और कुछ हों ही नहीं सकता।
    ~ Rumi