• तुझ को खबर नहीं मगर इक सादा-लौह को;<br/>
बर्बाद कर दिया तेरे दो दिन के प्यार ने।Upload to Facebook
    तुझ को खबर नहीं मगर इक सादा-लौह को;
    बर्बाद कर दिया तेरे दो दिन के प्यार ने।
    ~ Sahir Ludhianvi
  • चंद कलियाँ नशात की चुन कर मुद्दतों महव-ए-यास रहता हूँ;<br/>
तेरा मिलना ख़ुशी की बात सही तुझ से मिल कर उदास रहता हूँ।<br/><br/>
नशात  =  ख़ुशी<br/>  
महव-ए-यास  =  दुःख में खोनाUpload to Facebook
    चंद कलियाँ नशात की चुन कर मुद्दतों महव-ए-यास रहता हूँ;
    तेरा मिलना ख़ुशी की बात सही तुझ से मिल कर उदास रहता हूँ।

    नशात = ख़ुशी
    महव-ए-यास = दुःख में खोना
    ~ Sahir Ludhianvi
  • अभी रात कुछ है बाक़ी न उठा नक़ाब साक़ी;<br/>
तिरा रिन्द गिरते गिरते कहीं फिर संभल न जाए।Upload to Facebook
    अभी रात कुछ है बाक़ी न उठा नक़ाब साक़ी;
    तिरा रिन्द गिरते गिरते कहीं फिर संभल न जाए।
    ~ Sahir Ludhianvi
  • गर जिंदगी में मिल गए फिर इत्तेफ़ाक़ से;<br/>
पूछेंगे अपना हाल तेरी बेबसी से हम।Upload to Facebook
    गर जिंदगी में मिल गए फिर इत्तेफ़ाक़ से;
    पूछेंगे अपना हाल तेरी बेबसी से हम।
    ~ Sahir Ludhianvi
  • अपनी तबाहियों का मुझे कोई गम नहीं;<br/>
तुमने किसी के साथ मोहब्बत निभा तो दी।Upload to Facebook
    अपनी तबाहियों का मुझे कोई गम नहीं;
    तुमने किसी के साथ मोहब्बत निभा तो दी।
    ~ Sahir Ludhianvi
  • वह अफसाना जिसे अंजाम तक, लाना न हो मुमकिन;<br/>
उसे एक खूबसूरत मोड़ देकर, छोड़ना अच्छा।Upload to Facebook
    वह अफसाना जिसे अंजाम तक, लाना न हो मुमकिन;
    उसे एक खूबसूरत मोड़ देकर, छोड़ना अच्छा।
    ~ Sahir Ludhianvi
  • उभरेंगे एक बार अभी दिल के वलवले;<br/>
गो दब गए हैं बार-ए-गम-ए-जिन्दगी से हम।<br/><br/>
अर्थ:<br/>
वलवले - उत्साह, हौंसला, उम्मीद<br/>
बारे - बोझ, भार, वजनUpload to Facebook
    उभरेंगे एक बार अभी दिल के वलवले;
    गो दब गए हैं बार-ए-गम-ए-जिन्दगी से हम।

    अर्थ:
    वलवले - उत्साह, हौंसला, उम्मीद
    बारे - बोझ, भार, वजन
    ~ Sahir Ludhianvi
  • उम्मीद वक्त का सबसे बड़ा सहारा है;<br/>
गर हौंसला है तो हर मौज में किनारा है।Upload to Facebook
    उम्मीद वक्त का सबसे बड़ा सहारा है;
    गर हौंसला है तो हर मौज में किनारा है।
    ~ Sahir Ludhianvi
  • कौन रोता है किसी और की ख़ातिर ऐ दोस्त,<br/>
सब को अपनी ही किसी बात पे रोना आया।Upload to Facebook
    कौन रोता है किसी और की ख़ातिर ऐ दोस्त,
    सब को अपनी ही किसी बात पे रोना आया।
    ~ Sahir Ludhianvi
  • हर चीज़ ज़माने की जहाँ पर थी वहीं है,
    एक तू ही नहीं है;

    नज़रें भी वही और नज़ारे भी वही हैं,
    ख़ामोश फ़ज़ाओं के इशारे भी वही हैं,
    कहने को तो सब कुछ है, मगर कुछ भी नहीं है;

    हर अश्क में खोई हुई ख़ुशियों की झलक है,
    हर साँस में बीती हुई घड़ियों की कसक है,
    तू चाहे कहीं भी हो, तेरा दर्द यहीं है;

    हसरत नहीं, अरमान नहीं, आस नहीं है,
    यादों के सिवा कुछ भी मेरे पास नहीं है,
    यादें भी रहें या न रहें किसको यक़ीं है।
    ~ Sahir Ludhianvi