• दिल नाशिकेब, रूह परेशान, नज़र उदास;<br/>
ये क्या बना दिया है तिरे इंतिज़ार ने!
    दिल नाशिकेब, रूह परेशान, नज़र उदास;
    ये क्या बना दिया है तिरे इंतिज़ार ने!
    ~ Seemab Akbarabadi
  • दिल की बिसात क्या थी निगाह-ए-जमाल में;<br/>
इक आइना था टूट गया देख-भाल में!
    दिल की बिसात क्या थी निगाह-ए-जमाल में;
    इक आइना था टूट गया देख-भाल में!
    ~ Seemab Akbarabadi
  • तेरे जल्वों ने मुझे घेर लिया है ऐ दोस्त,
    अब तो तन्हाई के लम्हे भी हसीं लगते हैं।
    ~ Seemab Akbarabadi