• दिल की बर्बादियों पे नाज़ाँ हूँ;<br/>
फ़तेह पा कर शिकस्त खाई है।
Upload to Facebook
    दिल की बर्बादियों पे नाज़ाँ हूँ;
    फ़तेह पा कर शिकस्त खाई है।
    ~ Shakeel Badayuni
  • छुपे हैं लाख हक़ के मरहले गुम-नाम होंटों पर;
    उसी की बात चल जाती है जिस का नाम चलता है।
    ~ Shakeel Badayuni
  • भेज दी तस्वीर अपनी उन को ये लिख कर 'शकील';
    आप की मर्ज़ी है चाहे जिस नज़र से देखिए।
    ~ Shakeel Badayuni
  • आँख से आँख...

    आँख से आँख मिलाता है कोई;
    दिल को खींचे लिए जाता है कोई;

    वा-ए-हैरत के भरी महफ़िल में;
    मुझ को तन्हा नज़र आता है कोई;

    चाहिए ख़ुद पे यक़ीन-ए-कामिल;
    हौंसला किस का बढ़ाता है कोई;

    सब करिश्मात-ए-तसव्वुर है 'शकील';
    वरना आता है न जाता है कोई।
    ~ Shakeel Badayuni
  • मुश्किल था कुछ तो इश्क़ की बाज़ी को जीतना;
    कुछ जीतने के ख़ौफ़ से हारे चले गए।
    ~ Shakeel Badayuni