• जहान-ए-रंग-ओ-बू में क्यों तलाश-ए-हुस्न हो मुझको;<br/>
हजारों जलवे रख्शिंदा है मेरे दिल के पर्दे में!<br/><br/>
जहान-ए-रंग-ओ-बू = रंग और खुश्बू की दुनिया,<br/>
जलवा = नज्जारा,<br/>
दृश्य, तमाशा,<br/>
रख्शिंदा = चमकने वाले, दीप्त, प्रकाशमानUpload to Facebook
    जहान-ए-रंग-ओ-बू में क्यों तलाश-ए-हुस्न हो मुझको;
    हजारों जलवे रख्शिंदा है मेरे दिल के पर्दे में!

    जहान-ए-रंग-ओ-बू = रंग और खुश्बू की दुनिया,
    जलवा = नज्जारा,
    दृश्य, तमाशा,
    रख्शिंदा = चमकने वाले, दीप्त, प्रकाशमान
    ~ Shakeel Badayuni
  • दिल की बर्बादियों पे नाज़ाँ हूँ;<br/>
फ़तेह पा कर शिकस्त खाई है।
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    दिल की बर्बादियों पे नाज़ाँ हूँ;
    फ़तेह पा कर शिकस्त खाई है।
    ~ Shakeel Badayuni
  • छुपे हैं लाख हक़ के मरहले गुम-नाम होंटों पर;
    उसी की बात चल जाती है जिस का नाम चलता है।
    ~ Shakeel Badayuni
  • भेज दी तस्वीर अपनी उन को ये लिख कर 'शकील';
    आप की मर्ज़ी है चाहे जिस नज़र से देखिए।
    ~ Shakeel Badayuni
  • आँख से आँख...

    आँख से आँख मिलाता है कोई;
    दिल को खींचे लिए जाता है कोई;

    वा-ए-हैरत के भरी महफ़िल में;
    मुझ को तन्हा नज़र आता है कोई;

    चाहिए ख़ुद पे यक़ीन-ए-कामिल;
    हौंसला किस का बढ़ाता है कोई;

    सब करिश्मात-ए-तसव्वुर है 'शकील';
    वरना आता है न जाता है कोई।
    ~ Shakeel Badayuni
  • मुश्किल था कुछ तो इश्क़ की बाज़ी को जीतना;
    कुछ जीतने के ख़ौफ़ से हारे चले गए।
    ~ Shakeel Badayuni