• ऐ ज़ौक़ देख दुख़्तर-ए-रज़ को न मुँह लगा,<br/>
छुटती नहीं है मुँह से ये काफ़र लगी हुई।Upload to Facebook
    ऐ ज़ौक़ देख दुख़्तर-ए-रज़ को न मुँह लगा,
    छुटती नहीं है मुँह से ये काफ़र लगी हुई।
    ~ Sheikh Ibrahim Zauq
  • मालूम जो होता हमें अंजाम-ए-मोहब्बत;
    लेते न कभी भूल के हम नाम-ए-मोहब्बत।
    ~ Sheikh Ibrahim Zauq
  • दुनिया ने किस का राह-ए-वफ़ा में दिया है साथ;
    तुम भी चले चलो यूँ ही जब तक चली चले।
    ~ Sheikh Ibrahim Zauq
  • चुपके चुपके कोई गम का खाना हम से सीख जाये;
    जी ही जी में तिलमिलाना कोई हम से सीख जाये;
    अब्र क्या आँसू बहाना कोई हमसे सीख जाये;
    बर्क क्या है तिलमिलाना कोई हम से सीख जाये।
    ~ Sheikh Ibrahim Zauq
  • क्या आये तुम जो आये घडी दो घडी के बाद;
    सीने में होगी सांस अड़ी दो घडी के बाद;
    क्या रोका अपने गिर्ये को हम ने कि लग गयी;
    फिर वही आँसुओं की झड़ी दो घडी के बाद।
    ~ Sheikh Ibrahim Zauq
  • किसी बेकस को ऐ बेदाद गर मारा तो क्या मारा;
    जो आप ही मर रहा हो उस को गर मारा तो क्या मारा।
    ~ Sheikh Ibrahim Zauq