• हम उस से थोड़ी दूरी पर हमेशा रुक से जाते हैं;
    न जाने उस से मिलने का इरादा कैसा लगता है;
    मैं धीरे धीरे उन का दुश्मन-ए-जाँ बनता जाता हूँ;
    वो आँखें कितनी क़ातिल हैं वो चेहरा कैसा लगता है।
    ~ Syed Abdul Hameed Adam
  • साग़र से लब लगा के...

    साग़र से लब लगा के बहुत ख़ुश है ज़िन्दगी;
    सहन-ए-चमन में आके बहुत ख़ुश है ज़िन्दगी;

    आ जाओ और भी ज़रा नज़दीक जान-ए-मन;
    तुम को क़रीब पाके बहुत ख़ुश है ज़िन्दगी;

    होता कोई महल भी तो क्या पूछते हो फिर;
    बे-वजह मुस्कुरा के बहुत ख़ुश है ज़िन्दगी;

    साहिल पे भी तो इतनी शगुफ़ता रविश न थी;
    तूफ़ाँ के बीच आके बहुत ख़ुश है ज़िन्दगी;

    वीरान दिल है और 'अदम' ज़िन्दगी का रक़्स;
    जंगल में घर बनाके बहुत ख़ुश है ज़िन्दगी।
    ~ Syed Abdul Hameed Adam
  • उम्र भर भी अगर सदाएं दें;
    ​बीत कर वक़्त फिर नहीं मरते;​
    ​सोच कर तोड़ना इन्हें साक़ी;
    ​टूट कर जाम फिर नहीं जुड़ते।​
    ~ Syed Abdul Hameed Adam