• आते हैं आने दो ये तूफ़ान क्या ले जाएंगे;<br/>
मैं तो जब डरता कि मेरा हौसला ले जाएंगे!
    आते हैं आने दो ये तूफ़ान क्या ले जाएंगे;
    मैं तो जब डरता कि मेरा हौसला ले जाएंगे!
    ~ Wasim Barelvi
  • आज पी लेने दे साक़ी मुझे जी लेने दे;<br/>
कल मिरी रात ख़ुदा जाने कहाँ गुज़रेगी!
    आज पी लेने दे साक़ी मुझे जी लेने दे;
    कल मिरी रात ख़ुदा जाने कहाँ गुज़रेगी!
    ~ Wasim Barelvi
  • अपने चेहरे से जो ज़ाहिर है छुपाएँ कैसे;<br/>
तेरी मर्ज़ी के मुताबिक़ नज़र आएँ कैसे!
    अपने चेहरे से जो ज़ाहिर है छुपाएँ कैसे;
    तेरी मर्ज़ी के मुताबिक़ नज़र आएँ कैसे!
    ~ Wasim Barelvi
  • दरिया का सारा नशा:

    दरिया का सारा नशा उतरता चला गया,
    मुझको डुबोया और मैं उभरता चला गया;

    वो पैरवी तो झूठ की करता चला गया,
    लेकिन बस उसका चेहरा उतरता चला गया;

    हर साँस उम्र भर किसी मरहम से कम न थी,
    मैं जैसे कोई जख्म था भरता चला गया।
    ~ Wasim Barelvi
  • मैं इस उम्मीद पे डूबा के तू बचा लेगा;
    अब इसके बाद मेरा इम्तेहान क्या लेगा;

    ये एक मेला है वादा किसी से क्या लेगा;
    ढलेगा दिन तो हर एक अपना रास्ता लेगा;

    मैं बुझ गया तो हमेशा को बुझ ही जाऊँगा;
    कोई चराग़ नहीं हूँ जो फिर जला लेगा;

    कलेजा चाहिए दुश्मन से दुश्मनी के लिए;
    जो बे-अमल है वो बदला किसी से क्या लेगा;

    मैं उसका हो नहीं सकता बता न देना उसे;
    सुनेगा तो लकीरें हाथ की अपनी जला लेगा;

    हज़ार तोड़ के आ जाऊँ उस से रिश्ता वसीम;
    मैं जानता हूँ वो जब चाहेगा बुला लेगा।
    ~ Wasim Barelvi
  • आसमाँ इतनी बुलंदी पे जो इतराता है;<br />
भूल जाता है ज़मीं से ही नज़र आता है।
    आसमाँ इतनी बुलंदी पे जो इतराता है;
    भूल जाता है ज़मीं से ही नज़र आता है।
    ~ Wasim Barelvi
  • शर्तें लगाई जाती नहीं दोस्ती के साथ;
    कीजिये मुझे क़ुबूल मेरी हर कमी के साथ।
    ~ Wasim Barelvi
  • क्या दुख है समुंदर को बता भी नहीं सकता;
    आँसू की तरह आँख तक आ भी नहीं सकता।
    ~ Wasim Barelvi
  • कहाँ तक आँख रोएगी...

    कहाँ तक आँख रोएगी कहाँ तक किसका ग़म होगा;
    मेरे जैसा यहाँ कोई न कोई रोज़ कम होगा;

    तुझे पाने की कोशिश में कुछ इतना रो चुका हूँ मैं;
    कि तू मिल भी अगर जाये तो अब मिलने का ग़म होगा;

    समन्दर की ग़लतफ़हमी से कोई पूछ तो लेता;
    ज़मीं का हौसला क्या ऐसे तूफ़ानों से कम होगा;

    मोहब्बत नापने का कोई पैमाना नहीं होता;
    कहीं तू बढ़ भी सकता है, कहीं तू मुझ से कम होगा।
    ~ Wasim Barelvi
  • उन से कह दो मुझे ख़ामोश ही रहने दे 'वसीम';
    लब पे आएगी तो हर बात गिराँ गुज़रेगी।
    ~ Wasim Barelvi