• अपने आनंद से पुनः जुड़ने से महत्त्वपूर्ण और कुछ भी नहीं है. कुछ भी इतना समृद्ध नहीं है.कुछ भी इतना वास्तविक नहीं है!
    अपने आनंद से पुनः जुड़ने से महत्त्वपूर्ण और कुछ भी नहीं है. कुछ भी इतना समृद्ध नहीं है.कुछ भी इतना वास्तविक नहीं है!
    ~ Deepak Chopra
  • बुद्धि सत्य पर विजय पाना चाहती है। भक्ति सत्य को बस अपना लेती है।
    बुद्धि सत्य पर विजय पाना चाहती है। भक्ति सत्य को बस अपना लेती है।
    ~ Sadhguru
  • अधिक बलवान तो वे ही होते हैं जिनके पास बुद्धि बल होता है। जिनमें केवल शारीरिक बल होता है, वे वास्तविक बलवान नहीं होते।
    अधिक बलवान तो वे ही होते हैं जिनके पास बुद्धि बल होता है। जिनमें केवल शारीरिक बल होता है, वे वास्तविक बलवान नहीं होते।
    ~ Veda Vyasa
  • सबसे बड़ा गुरु मंत्र, अपने राज किसी को भी मत बताओ। ये तुम्हे खत्म कर देगा।
    सबसे बड़ा गुरु मंत्र, अपने राज किसी को भी मत बताओ। ये तुम्हे खत्म कर देगा।
    ~ Chanakya
  • जहाँ अज्ञानता हमारा स्वामी है, वहाँ वास्तविक शांति की कोई संभावना नहीं है।
    जहाँ अज्ञानता हमारा स्वामी है, वहाँ वास्तविक शांति की कोई संभावना नहीं है।
    ~ Dalai Lama
  • आपकी कीमत इसमें है कि आप क्या हैं, इसमें नहीं कि आपके पास क्या है!
    आपकी कीमत इसमें है कि आप क्या हैं, इसमें नहीं कि आपके पास क्या है!
    ~ Thomas A. Edison
  • आस्था एक अन्तरंग ज्ञान है, प्रमाण से परे!
    आस्था एक अन्तरंग ज्ञान है, प्रमाण से परे!
    ~ Khalil Gibran
  • अपने दुश्मनों को हमेशा माफ़ कर दीजिये! उन्हें इससे अधिक और कुछ नहीं परेशान करता!
    अपने दुश्मनों को हमेशा माफ़ कर दीजिये! उन्हें इससे अधिक और कुछ नहीं परेशान करता!
    ~ Oscar Wilde
  • मनुष्‍य पुण्‍य का फल सुख चाहता है, परंतु पुण्‍य करना नहीं चाहता और पाप का फल दु:ख नहीं चाहता है पर पाप छोड़ना नहीं चाहता है। इसीलिए सुख मिलता नहीं है और दु:ख भोगना पड़ता है।
    मनुष्‍य पुण्‍य का फल सुख चाहता है, परंतु पुण्‍य करना नहीं चाहता और पाप का फल दु:ख नहीं चाहता है पर पाप छोड़ना नहीं चाहता है। इसीलिए सुख मिलता नहीं है और दु:ख भोगना पड़ता है।
    ~ Author Unknown
  • बुद्धि, करुणा, और साहस, व्यक्ति के लिए तीन सार्वभौमिक मान्यता प्राप्त नैतिक गुण हैं!
    बुद्धि, करुणा, और साहस, व्यक्ति के लिए तीन सार्वभौमिक मान्यता प्राप्त नैतिक गुण हैं!
    ~ Confucius