• कभी-कभी लोग कुछ कह कर अपनी एक प्रभावशाली छाप बना देते हैं, और कभी-कभी लोग चुप रहकर अपनी एक प्रभावशाली छाप बना देते हैं।Upload to Facebook
    कभी-कभी लोग कुछ कह कर अपनी एक प्रभावशाली छाप बना देते हैं, और कभी-कभी लोग चुप रहकर अपनी एक प्रभावशाली छाप बना देते हैं।
    ~ Dalai Lama
  • मंदिरों की आवश्यकता नहीं है, ना ही जटिल तत्त्वज्ञान की। मेरा मस्तिष्क और मेरा हृदय मेरे मंदिर हैं; मेरा दर्शन दयालुता है।Upload to Facebook
    मंदिरों की आवश्यकता नहीं है, ना ही जटिल तत्त्वज्ञान की। मेरा मस्तिष्क और मेरा हृदय मेरे मंदिर हैं; मेरा दर्शन दयालुता है।
    ~ Dalai Lama
  • हम बाहरी दुनिया में कभी शांति नहीं पा सकते हैं, जब तक हम अन्दर से शांत ना हों।Upload to Facebook
    हम बाहरी दुनिया में कभी शांति नहीं पा सकते हैं, जब तक हम अन्दर से शांत ना हों।
    ~ Dalai Lama
  • यदि भगवान छु-अछूत को मानता है तो मैं उसे भगवान नहीं कहूँगा।Upload to Facebook
    यदि भगवान छु-अछूत को मानता है तो मैं उसे भगवान नहीं कहूँगा।
    ~ Bal Gangadhar Tilak
  • चरित्र को हम अपनी बात मनवाने का सबसे प्रभावी माध्यम कह सकते हैं!Upload to Facebook
    चरित्र को हम अपनी बात मनवाने का सबसे प्रभावी माध्यम कह सकते हैं!
    ~ Aristotle
  • अपने गुरु में पूर्ण रूप से विश्वास करें, यही साधना है!Upload to Facebook
    अपने गुरु में पूर्ण रूप से विश्वास करें, यही साधना है!
    ~ Sai Baba
  • व्यक्ति अकेले पैदा होता है और अकेले मर जाता है, और वो अपने अच्छे और बुरे कर्मों का फल खुद ही भुगतता है, और वह अकेले ही नर्क या स्वर्ग जाता है!
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    व्यक्ति अकेले पैदा होता है और अकेले मर जाता है, और वो अपने अच्छे और बुरे कर्मों का फल खुद ही भुगतता है, और वह अकेले ही नर्क या स्वर्ग जाता है!
    ~ Chanakya
  • यदि मानव जाति को जीवित रखना है, तो हमें बिलकुल नयी सोच की आवश्यकता होगी!
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    यदि मानव जाति को जीवित रखना है, तो हमें बिलकुल नयी सोच की आवश्यकता होगी!
    ~ Albert Einstein
  • यदि बोलने की स्वतंत्रता छीन ली जाये तो शायद गूंगे और मौन हम उसी तरह संचालित होंगे जैसे भेड़ को बलि के लिए ले जाया जा रहा हो!Upload to Facebook
    यदि बोलने की स्वतंत्रता छीन ली जाये तो शायद गूंगे और मौन हम उसी तरह संचालित होंगे जैसे भेड़ को बलि के लिए ले जाया जा रहा हो!
    ~ George Washington
  • बीस साल की उम्र में इंसान अपनी इच्छा से चलता है, तीस में बुद्धि से और चालीस में अपने अनुमान से!Upload to Facebook
    बीस साल की उम्र में इंसान अपनी इच्छा से चलता है, तीस में बुद्धि से और चालीस में अपने अनुमान से!
    ~ Benjamin Franklin
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