• जैसा कि बिल्डर कहते हैं; बड़े पत्थर बिना छोटे पत्थरों के सही से नहीं लग सकते हैं|Upload to Facebook
    जैसा कि बिल्डर कहते हैं; बड़े पत्थर बिना छोटे पत्थरों के सही से नहीं लग सकते हैं|
    ~ Plato
  • अज्ञानी होना उतनी शर्म की बात नहीं है जितना कि सीखने की इच्छा ना रखना|Upload to Facebook
    अज्ञानी होना उतनी शर्म की बात नहीं है जितना कि सीखने की इच्छा ना रखना|
    ~ Benjamin Franklin
  • अगर किसी देश को भ्रष्टाचार - मुक्त और सुन्दर-मन वाले लोगों का देश बनाना है तो, मेरा दृढ़तापूर्वक मानना है कि समाज के तीन प्रमुख सदस्य ये कर सकते हैं। पिता, माता और गुरु। 
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    अगर किसी देश को भ्रष्टाचार - मुक्त और सुन्दर-मन वाले लोगों का देश बनाना है तो, मेरा दृढ़तापूर्वक मानना है कि समाज के तीन प्रमुख सदस्य ये कर सकते हैं। पिता, माता और गुरु।
    ~ Dr. APJ Abdul Kalam
  • अपनी क्षमताओं को जान कर और उनमे यकीन करके ही हम एक बेहतर विश्व का नित्मान कर सकते हैं|Upload to Facebook
    अपनी क्षमताओं को जान कर और उनमे यकीन करके ही हम एक बेहतर विश्व का नित्मान कर सकते हैं|
    ~ Dalai Lama
  • मौन सबसे सशक्त भाषण है। धीरे-धीरे दुनिया आपको सुनेगी।Upload to Facebook
    मौन सबसे सशक्त भाषण है। धीरे-धीरे दुनिया आपको सुनेगी।
    ~ Mahatma Gandhi
  • स्वस्थ रहने का रास्ता है रोज एरोमेटिक बाथ और सेंटेड मसाज लेना।Upload to Facebook
    स्वस्थ रहने का रास्ता है रोज एरोमेटिक बाथ और सेंटेड मसाज लेना।
    ~ Hippocrates
  • उथल -पुथल  और  अराजकता के बीच अपने भीतर शांति बनाये रखें।Upload to Facebook
    उथल -पुथल और अराजकता के बीच अपने भीतर शांति बनाये रखें।
    ~ Deepak Chopra
  • जो आप खुद नहीं पसंद करते उसे दूसरों पर मत थोपिए!Upload to Facebook
    जो आप खुद नहीं पसंद करते उसे दूसरों पर मत थोपिए!
    ~ Confucius
  • एक बुद्धिमान पुरुष की प्रशंसा उसकी अनुपस्थिति में करनी चाहिए, किन्तु स्त्री की प्रशंसा उसके मुख पर।Upload to Facebook
    एक बुद्धिमान पुरुष की प्रशंसा उसकी अनुपस्थिति में करनी चाहिए, किन्तु स्त्री की प्रशंसा उसके मुख पर।
  • अपनी प्रशंसा सुनकर हम इतने मतवाले हो जाते हैं कि फिर हम में विवेक की शक्ति भी लुप्त हो जाती है। बड़े-से -बड़ा महात्मा भी अपनी प्रशंसा सुनकर फूल उठता है।Upload to Facebook
    अपनी प्रशंसा सुनकर हम इतने मतवाले हो जाते हैं कि फिर हम में विवेक की शक्ति भी लुप्त हो जाती है। बड़े-से -बड़ा महात्मा भी अपनी प्रशंसा सुनकर फूल उठता है।
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