• सत्य उसी वाणी को सम्भालता है जो वाणी सत्य को सम्भालती है|
    सत्य उसी वाणी को सम्भालता है जो वाणी सत्य को सम्भालती है|
    ~ Vinoba Bhave
  • इन्सान का आभूषण उसकी नम्रता और उसके मीठे वचन होते हैं। और बाकी सब नाम मात्र के भूषण हैं।
    इन्सान का आभूषण उसकी नम्रता और उसके मीठे वचन होते हैं। और बाकी सब नाम मात्र के भूषण हैं।
    ~ Saint Thiruvalluvar
  • वह एक बहुत मजबूत आदमी है, जो केवल न्याय करता है, और वह बहुत दुखद व्यक्ति है जो केवल बुद्धिमान है।
    वह एक बहुत मजबूत आदमी है, जो केवल न्याय करता है, और वह बहुत दुखद व्यक्ति है जो केवल बुद्धिमान है।
    ~ Voltaire
  • शूरवीरता, विद्या, बल, दक्षता और धैर्य, ये पांच इन्सान के स्वाभाविक मित्र हैं। और एक बुद्धिमान इन्सान हमेशा इनके साथ रहता हैं।
    शूरवीरता, विद्या, बल, दक्षता और धैर्य, ये पांच इन्सान के स्वाभाविक मित्र हैं। और एक बुद्धिमान इन्सान हमेशा इनके साथ रहता हैं।
    ~ Maharshi Vedvyas
  • लोग अभी तक याद रखते हैं जब तक उनकी सांसे चलती है जैसे ही सांसे चलानी बंद हो जाती है सबसे करीबी रिश्तेदार, मित्र यहां तक कि पत्नी भी अपनों से दूर चली जाती है ।
    लोग अभी तक याद रखते हैं जब तक उनकी सांसे चलती है जैसे ही सांसे चलानी बंद हो जाती है सबसे करीबी रिश्तेदार, मित्र यहां तक कि पत्नी भी अपनों से दूर चली जाती है ।
    ~ Adi Shankaracharya
  • लोग अभी तक याद रखते हैं जब तक उनकी सांसे चलती है जैसे ही सांसे चलानी बंद हो जाती है सबसे करीबी रिश्तेदार ,मित्र यहां तक कि पत्नी भी अपनों से दूर चली जाती है ।
    लोग अभी तक याद रखते हैं जब तक उनकी सांसे चलती है जैसे ही सांसे चलानी बंद हो जाती है सबसे करीबी रिश्तेदार ,मित्र यहां तक कि पत्नी भी अपनों से दूर चली जाती है ।
    ~ Adi Shankaracharya
  • नम्रता की ऊंचाई को नापा नहीं जा सकता |
    नम्रता की ऊंचाई को नापा नहीं जा सकता |
    ~ Vinoba Bhave
  • शरीर का दुःख तभी मिटता है, जब मन का दुःख मिटता है |
    शरीर का दुःख तभी मिटता है, जब मन का दुःख मिटता है |
    ~ Maharshi Vedvyas
  • जिस प्रकार अन्न नमक के बिना स्वादरहित और फीका लगता है, ठीक उसी तरह से वाचाल की कही हुई बाते निस्सार होते हैं, और लोगो को रुचिकर नहीं लगते |
    जिस प्रकार अन्न नमक के बिना स्वादरहित और फीका लगता है, ठीक उसी तरह से वाचाल की कही हुई बाते निस्सार होते हैं, और लोगो को रुचिकर नहीं लगते |
    ~ Saint Tukaram
  • यदि आप एक दरवाजे से अंदर नहीं जा पा रहे हो, तो आप दूसरे दरवाजे से अन्दर जावो, क्योकि वर्तमान चाहे कितना भी अंधकार क्यों न हो जाए, कुछ तो शानदार सामने आएगा ही|

Rabindranath Tagore'
    यदि आप एक दरवाजे से अंदर नहीं जा पा रहे हो, तो आप दूसरे दरवाजे से अन्दर जावो, क्योकि वर्तमान चाहे कितना भी अंधकार क्यों न हो जाए, कुछ तो शानदार सामने आएगा ही| Rabindranath Tagore'