• जब भी आप कुछ निर्मित करना चाहें, बाह्य स्रोत पर निर्भर मत करिए: अन्दर गहराई तक जाइए और अनंत स्रोत को खोजिये।
    जब भी आप कुछ निर्मित करना चाहें, बाह्य स्रोत पर निर्भर मत करिए: अन्दर गहराई तक जाइए और अनंत स्रोत को खोजिये।
    ~ Shree Paramhansa Yogananda
  • मन को केवल कुछ चीजें ही याद रहती हैं। शरीर को सबकुछ याद रहता है। जो सूचना ये रखता है वो अस्तित्व के प्रारम्भ तक जाती हैं।
    मन को केवल कुछ चीजें ही याद रहती हैं। शरीर को सबकुछ याद रहता है। जो सूचना ये रखता है वो अस्तित्व के प्रारम्भ तक जाती हैं।
    ~ Sadhguru Jaggi Vasudev
  • ज्ञानी व्यक्ति ज्ञान और कर्म को एक रूप में देखता है, वही सही मायने में  देखता है!
    ज्ञानी व्यक्ति ज्ञान और कर्म को एक रूप में देखता है, वही सही मायने में देखता है!
    ~ Srimad Bhagavad Gita
  • जैसे एक फूल बहुत प्यारा और सुंदर है, पर खुशबू नहीं है। ठीक वैसे किसी की कही हुई अच्छी बातें व्यर्थ हैं, अगर वो उनको अमल में नहीं लाता।
    जैसे एक फूल बहुत प्यारा और सुंदर है, पर खुशबू नहीं है। ठीक वैसे किसी की कही हुई अच्छी बातें व्यर्थ हैं, अगर वो उनको अमल में नहीं लाता।
    ~ Buddha
  • जब स्वभाव को धर्म के सिद्धांतों के अनुसार बदला जाता है, तब हमें संस्कृति और सभ्यता प्राप्त होती है।
    जब स्वभाव को धर्म के सिद्धांतों के अनुसार बदला जाता है, तब हमें संस्कृति और सभ्यता प्राप्त होती है।
    ~ Pundit Deendayal Upadhyaya
  • सबसे उत्तम तीर्थ अपना मन है जो विशेष रूप से शुद्ध किया हुआ हो!
    सबसे उत्तम तीर्थ अपना मन है जो विशेष रूप से शुद्ध किया हुआ हो!
    ~ Swami Shankaracharya
  • जो लोग परमात्मा तक पहुंचना चाहते हैं उन्हें वाणी मन इन्द्रियों की पवित्रता और एक दयालु ह्रदय की आवश्यकता होती है!
    जो लोग परमात्मा तक पहुंचना चाहते हैं उन्हें वाणी मन इन्द्रियों की पवित्रता और एक दयालु ह्रदय की आवश्यकता होती है!
    ~ Swami Vivekananda
  • भगवान के चेहरे पर एक मुस्कुराहट है!
    भगवान के चेहरे पर एक मुस्कुराहट है!
    ~ Psalm 42:5
  • आपकी दया मेरी सामाजिक स्थिति है!
    आपकी दया मेरी सामाजिक स्थिति है!
    ~ Guru Nanak Dev Ji
  • सबसे उत्तम तीर्थ अपना मन है जो विशेष रूप से शुद्ध किया हुआ हो!
    ~ Swami Shankaracharya