• सारी शिकायत एक पल में दूर हो जाती है, जब वो कहती है...
    मुझको आदत है नखरे दिखाने की, आप तो बस चढ़ जाया करो।
  • ये पढ़ाई-लिखाई, नौकरी-चाकरी, घर-बार, पता नही किस भोसडी वाले का आईडिया था।
    आराम से गुफ़ाओं में रहते, कन्द मुल खाते, चूत मारते, बच्चे पैदा करते और सुकून से मर जाते।
  • अगर मेडिकल स्टोर पर कोई ग्राहक डरा हुआ है और अपने से बाद में आये कस्टमर को समान लेने दे रहा है तो
    समझ लो वो "कंडोम" खरीदने आया है।
  • आज का घंटा ज्ञान:
    हर हिलती हुई झाड़ी मे भूत नही होता।
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    हो सकता है कोई उसमे अपनी मोहब्बत को 'अन्जाम' दे रहा हो।
  • जब किस्मत ने `उंगली` करना बंद किया तो हम बहुत खुश हुए
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    हमें क्या पता था कि किस्मत `बांस` लेने गई है।
  • कोई और गुनाह करवा दे मुझ से मेरे खुदा, मोहब्बत करना अब मेरे बस की बात नहीं।
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    भावार्थ:-
    प्रस्तुत पद में कवि सिर्फ पेलना चाहते हैं।
  • आज का घंटा ज्ञान:
    गूगल खोल के कुछ नहीं मिलेगा, जो मिलेगा वो...
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    सलवार खोल के ही मिलेगा।
  • कोशिश आखरी सांस तक करनी चाहिये यारो...
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    मिल गयी तो चूत और नहीं मिली तो उसकी माँ की चूत।
  • अर्थ का अनर्थ:
    एक लिफ्ट पर दो नोट लिखे थे।
    1. महिलाओ का खास ख्याल रखें
    2. एक बार में 6 से ज्यादा आदमी न चढें
  • घर वाले चूँकि 'चूतिया' शब्द का इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं इसलिए अक्सर कह देते हैं:
    "भोला रह गया ये लड़का"।