• इस अनजान शहर में पत्थर कहाँ से आ कर लगा मुझे,ऐ दोस्त
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    लगता है गैरों की इस भीड़ में,
    कोई अपना ही माँ चुदा रहा है।
  • आसमान पे काली घटा छाई है;
    आज फिर घरवाली ने दो बात सुनाई है;
    दिल करता है सुधर जाऊँ, मगर;
    बाजूवाली आज फिर भीग कर आई है।
  • दिल तोड़ने की सज़ा नहीं मिलती;
    दिल टूटने की वजह नहीं मिलती;
    लड़कियां तो बहुत फंस जाती हैं मेरे दोस्त;
    बस उन्हें ठोकने की जगह नहीं मिलती!
  • गम में भी हमको जीना आता है;
    सेक्स करके भी पसीना आता है;
    एक हम हैं कि तुम्हें अक्सर मैसेज करते हैं;
    एक तुम्हारा मैसेज है, जैसे औरतों को महीना आता है!
  • तेरी आँखों में आँसू और चेहरे पे हँसी है;
    वाह! वाह!
    तेरी आँखों में आँसू और चेहरे पे हँसी है;
    ऐसा लगता है जैसे तेरी लुल्ली ज़िप में फंसी है!
  • अर्ज़ किया है:
    उसने होंठों से छू कर लौड़े पे नशा कर दिया;
    लंड की बात तो और थी यारो उसने तो झांटों को भी खड़ा कर दिया।
  • मिली बहुत सजा उनसे दिल लगाने की;
    नज़र लग गयी हमारे प्यार को ज़माने की;
    क़ब्र से निकले हुए दोनों हाथ कहते हैं, "बस आरज़ू रह गयी उसकी चूचियाँ दबाने की।"
  • लंड के भरोसे जिया नहीं करते;
    चूत के प्यालों को पिया नहीं करते;
    कुछ दोस्त भोसड़ी के ऐसे भी होते हैं;
    जिनके गांड में उँगली न करो तो वो याद किया भी नहीं करते!
  • यूँ हम को सताने की ज़रूरत क्या थी; गांड मेरी जलाने की ज़रूरत क्या थी; जो नहीं था इश्क़ तो कह दिया होता;
    बेवजह हमें चुतिया बनाने की ज़रुरत क्या थी;
    मालूम था अगर यह ख्वाब टूट जायेगा;
    नींद में आकर चुदने की ज़रुरत क्या थी;
    मान लूँ अगर कि एक तरफ़ा मोहब्बत थी;
    तो साली मुझे देख कर मुस्कुराने की ज़रुरत क्या थी!
  • गांड के साथ अक्सर यह घटना घट जाती है;
    वाह! वाह!
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    गांड के साथ अक्सर यह घटना घट जाती है;
    मुसीबत कोसों दूर होती है बहनचोद गांड पहले फट जाती है।