• दिल तोड़ने की सज़ा नहीं मिलती;
    दिल टूटने की वजह नहीं मिलती;
    लड़कियां तो बहुत फंस जाती हैं मेरे दोस्त;
    बस उन्हें ठोकने की जगह नहीं मिलती!
  • गम में भी हमको जीना आता है;
    सेक्स करके भी पसीना आता है;
    एक हम हैं कि तुम्हें अक्सर मैसेज करते हैं;
    एक तुम्हारा मैसेज है, जैसे औरतों को महीना आता है!
  • तेरी आँखों में आँसू और चेहरे पे हँसी है;
    वाह! वाह!
    तेरी आँखों में आँसू और चेहरे पे हँसी है;
    ऐसा लगता है जैसे तेरी लुल्ली ज़िप में फंसी है!
  • अर्ज़ किया है:
    उसने होंठों से छू कर लौड़े पे नशा कर दिया;
    लंड की बात तो और थी यारो उसने तो झांटों को भी खड़ा कर दिया।
  • मिली बहुत सजा उनसे दिल लगाने की;
    नज़र लग गयी हमारे प्यार को ज़माने की;
    क़ब्र से निकले हुए दोनों हाथ कहते हैं, "बस आरज़ू रह गयी उसकी चूचियाँ दबाने की।"
  • लंड के भरोसे जिया नहीं करते;
    चूत के प्यालों को पिया नहीं करते;
    कुछ दोस्त भोसड़ी के ऐसे भी होते हैं;
    जिनके गांड में उँगली न करो तो वो याद किया भी नहीं करते!
  • यूँ हम को सताने की ज़रूरत क्या थी; गांड मेरी जलाने की ज़रूरत क्या थी; जो नहीं था इश्क़ तो कह दिया होता;
    बेवजह हमें चुतिया बनाने की ज़रुरत क्या थी;
    मालूम था अगर यह ख्वाब टूट जायेगा;
    नींद में आकर चुदने की ज़रुरत क्या थी;
    मान लूँ अगर कि एक तरफ़ा मोहब्बत थी;
    तो साली मुझे देख कर मुस्कुराने की ज़रुरत क्या थी!
  • गांड के साथ अक्सर यह घटना घट जाती है;
    वाह! वाह!
    .
    ..
    ...
    ....
    .....
    गांड के साथ अक्सर यह घटना घट जाती है;
    मुसीबत कोसों दूर होती है बहनचोद गांड पहले फट जाती है।
  • तूफानों में छत्तरी नहीं खोली जाती;
    ब्रा से पहले पैंटी नहीं खोली जाती;
    विआग्रा (वियाग्रा) खाना शुरू कर मेरे दोस्त;
    क्योंकि ज़ुबान और उंगली से औरत नहीं चोदी जाती।
  • श्रीमती ग़ालिब:
    तुम्हें पाकर लगा दुआ हमारी कबूल हो गई;
    तुम्हें पाकर लगा दुआ हमारी कबूल हो गई;
    जब से देखा है आपका मुर्दा लंड;
    लगता है ये बड़ी भूल हो गई।