• सेक्स गुरु ने अर्ज़ किया है:
    ना चोदो किसी को इतना;
    कि उसकी चूत तुम्हारी कमजोरी बन जाये;
    उसे चोदो कुछ इस तरह;
    कि तुम्हारे लंड उसके लिए जरूरी बन जाये!
  • उस कच्ची कली को चोदने में गांड से धुआं निकल गया;
    उस कच्ची कली को चोदने में गांड से धुआं निकल गया;
    हम भी रात भर चोदते रहे;
    सुबह देखा तो चूत में कुआँ निकल गया।
  • दुखी आशिक की शायरी:
    गरीबी का आलम कुछ इस तरह है मेरे यार;
    दोस्त भी गांडू हैं, फिर भी हम गांड को तरसते हैं!
  • मैं अकेला ही चला था अपनी मंजिल के लिए;
    अनुभवी लोग मिलते गए और मैं चूतिया बनता गया!
  • अर्ज़ किया है:
    नादान है कितनी वो, कुछ समझती ही नहीं;
    सीने से लिपटकर पूछती है, "ये नीचे से क्या चुभ रहा है?"
  • चिकन ऐसे पकाओ कि कच्चा ना हो;
    वाह वाह!
    चिकन ऐसे पकाओ कि कच्चा ना हो;
    और
    मोहब्बत ऐसे निभाओ कि बच्चा ना हो!
  • लंड पे ऐतबार किसको है;
    मिल जाए चोदने को तो इंकार किसको है;
    कुछ मुश्किलें हैं चूत पाने में दोस्त;
    वरना मुट्ठ मारने से प्यार किसको है!
  • धोती ने कहा पज़ामे से;
    हम दोनों बने हैं धागे से;
    फर्क तो सिर्फ इतना है कि;
    मैं खुलता हूँ पीछे से और;
    तुम खुलते हो आगे से।
  • ब्रा खोलो तो शकालका बूम बूम;
    पैंटी खोलो तो खुलजा सिम सिम;
    अंदर डालो तो क्या मस्ती क्या धूम धूम;
    बाहर निकालो तो ठंडा-ठंडा झिम झिम!
  • जहान की खिलावट में जुलूल नहीं आएगा;
    गम-ए-तोहीन से कुबूल नहीं आएगा;
    मक्लूल की इबरात है, यह कुर्फा ग़ालिब;
    तुम्हारी फट जाएगी पर यह शेर समझ नहीं आएगा!