Hindi Shayari

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तपिश से बच के घटाओं में बैठ जाते हैं;
गए हुए कि सदाओं में बैठ जाते हैं;
हम इर्द-गिर्द के मौसम से घबरायें;
तेरे ख्यालों की छाओं में बैठ जाते हैं।
~ Farhat Abbas Shah
कोई मिलता ही नहीं हमसे हमारा बनकर;<br/>
वो मिले भी तो एक किनारा बनकर;<br/>
हर ख्वाब टूट के बिखरा काँच की तरह;<br/>
बस एक इंतज़ार है साथ, सहारा बनकर।
कोई मिलता ही नहीं हमसे हमारा बनकर;
वो मिले भी तो एक किनारा बनकर;
हर ख्वाब टूट के बिखरा काँच की तरह;
बस एक इंतज़ार है साथ, सहारा बनकर।
एहसास बहुत होगा जब छोड़ के जायेंगे;<br/>
रोयेंगे बहुत मगर आँसू नहीं आयेंगे;<br/>
जब साथ ना दे कोई तो आवाज़ हमे देना;<br/>
आसमान पर भी होंगे तो लौट आयेंगे।
एहसास बहुत होगा जब छोड़ के जायेंगे;
रोयेंगे बहुत मगर आँसू नहीं आयेंगे;
जब साथ ना दे कोई तो आवाज़ हमे देना;
आसमान पर भी होंगे तो लौट आयेंगे।
पल भर के लिए अगर वो हमे अपना बना ले;
अपनी ज़िंदगी का अगर वो सपना बना ले;
फिर भले ही दम निकल जाये हमारा;
बस एक रात के लिए वो मुझे अपना बना ले।
कौन कहता है कि...

कौन कहता है कि मौत आयी तो मर जाऊँगा;
मैं तो दरिया हूं, समंदर में उतर जाऊँगा;

तेरा दर छोड़ के मैं और किधर जाऊँगा;
घर में घिर जाऊँगा, सहरा में बिखर जाऊँगा;

तेरे पहलू से जो उठूँगा तो मुश्किल ये है;
सिर्फ़ इक शख्स को पाऊंगा, जिधर जाऊँगा;

अब तेरे शहर में आऊँगा मुसाफ़िर की तरह;
साया-ए-अब्र की मानिंद गुज़र जाऊँगा;

तेरा पैमान-ए-वफ़ा राह की दीवार बना;
वरना सोचा था कि जब चाहूँगा, मर जाऊँगा;

ज़िन्दगी शमा की मानिंद जलाता हूं 'नदीम';
बुझ तो जाऊँगा मगर, सुबह तो कर जाऊँगा।
~ Ahmad Nadeem Qasimi
हम जानते तो इश्क़ न करते किसी के साथ;
ले जाते दिल को ख़ाक में इस आरज़ू के साथ।
~ Meer Taqi Meer
इस बहते दर्द को मत रोको;<br/>
यह तो सज़ा है किसी के इंतज़ार की;<br/>
लोग इन्हे आँसू कहे या दीवानगी;<br/>
पर यह तो निशानी है किसी के प्यार की।
इस बहते दर्द को मत रोको;
यह तो सज़ा है किसी के इंतज़ार की;
लोग इन्हे आँसू कहे या दीवानगी;
पर यह तो निशानी है किसी के प्यार की।
तुमसे दूरी का एहसास जब सताने लगा;<br/>
तेरे साथ गुज़ारा हर लम्हा याद आने लगा;<br/>
जब भी कोशिश की तुम्हें भुलाने की;<br/>
तू और भी इस दिल के करीब आने लगा।
तुमसे दूरी का एहसास जब सताने लगा;
तेरे साथ गुज़ारा हर लम्हा याद आने लगा;
जब भी कोशिश की तुम्हें भुलाने की;
तू और भी इस दिल के करीब आने लगा।
वो निकल गए मेरे रास्ते से इस कदर कि;
जैसे कि वो मुझे पहचानते ही नहीं;
कितने ज़ख्म खाए हैं मेरे इस दिल ने;
फिर भी हम उस बेवफ़ा को बेवफ़ा मानते ही नहीं।
आपको देख कर...

आपको देख कर देखता रह गया;
क्या कहूँ और कहने को क्या रह गया;

आते-आते मेरा नाम-सा रह गया;
उस के होंठों पे कुछ काँपता रह गया;

वो मेरे सामने ही गया और मैं;
रास्ते की तरह देखता रह गया;

झूठ वाले कहीं से कहीं बढ़ गये;
और मैं था कि सच बोलता रह गया;

आँधियों के इरादे तो अच्छे न थे;
ये दिया कैसे जलता हुआ रह गया।
~ Wasim Barelvi

Quotes

मनुष्य को उसको सवालों से पहचानो जवाबों से नहीं।

Trivia

The average male spends 43 minutes a day staring at 10 different women.

Graffiti

When she saw her 1st strand of grey hair... she thought she would 'Dye'!