• मिलने को तो हर शख्स एहतराम से मिला;<br/>
पर जो मिला किसी न किसी काम से मिला।
    मिलने को तो हर शख्स एहतराम से मिला;
    पर जो मिला किसी न किसी काम से मिला।
  • क़त्ल तो लाजिम है इस बेवफा शहर में;<br/>
जिसे देखो दिल में नफरत लिये फिरता है।
    क़त्ल तो लाजिम है इस बेवफा शहर में;
    जिसे देखो दिल में नफरत लिये फिरता है।
  • कहीं बेहतर है तेरी अमीरी से मुफलिसी मेरी,<br/>
चंद सिक्कों की खातिर तूने क्या नहीं खोया है;<br/>
माना नहीं है मखमल का बिछौना मेरे पास,<br/>
पर तू ये बता कितनी रातें चैन से सोया है।
    कहीं बेहतर है तेरी अमीरी से मुफलिसी मेरी,
    चंद सिक्कों की खातिर तूने क्या नहीं खोया है;
    माना नहीं है मखमल का बिछौना मेरे पास,
    पर तू ये बता कितनी रातें चैन से सोया है।
  • हम भी बरगद के दरख़्तों की तरह हैं;<br/>
जहाँ दिल लग जाए वहाँ ताउम्र खड़े रहते हैं।
    हम भी बरगद के दरख़्तों की तरह हैं;
    जहाँ दिल लग जाए वहाँ ताउम्र खड़े रहते हैं।
  • इक टूटी-सी ज़िंदगी को समेटने की चाहत थी;<br/>
न खबर थी उन टुकड़ों को ही बिखेर बैठेंगे हम।
    इक टूटी-सी ज़िंदगी को समेटने की चाहत थी;
    न खबर थी उन टुकड़ों को ही बिखेर बैठेंगे हम।
  • फिक्र है सबको खुद को सही साबित करने की;<br/>
जैसे ये ज़िंदगी, ज़िंदगी नहीं, कोई इल्जाम है।
    फिक्र है सबको खुद को सही साबित करने की;
    जैसे ये ज़िंदगी, ज़िंदगी नहीं, कोई इल्जाम है।
  • तेरे गमों को तेरी ख़ुशी कर दें,<br/>
हर सुबह तेरी दुनिया में रौशनी भर दें;<br/>
जब भी टूटने लगें तेरी साँसे,<br/>
खुदा तुझमें शामिल मेरी जिंदगी कर दे।
    तेरे गमों को तेरी ख़ुशी कर दें,
    हर सुबह तेरी दुनिया में रौशनी भर दें;
    जब भी टूटने लगें तेरी साँसे,
    खुदा तुझमें शामिल मेरी जिंदगी कर दे।
  • तेरा ख़याल तेरी तलब और तेरी आरज़ू;<br/>
इक भीड़ सी लगी है मेरे दिल के शहर में।
    तेरा ख़याल तेरी तलब और तेरी आरज़ू;
    इक भीड़ सी लगी है मेरे दिल के शहर में।
  • तुम खफा हो गए तो कोई ख़ुशी न रहेगी,<br/>
तुम्हारे बिना चिरागों में रोशनी न रहेगी;<br/>
क्या कहे क्या गुजरेगी इस दिल पर,<br/>
जिंदा तो रहेंगे पर ज़िन्दगी न रहेगी।
    तुम खफा हो गए तो कोई ख़ुशी न रहेगी,
    तुम्हारे बिना चिरागों में रोशनी न रहेगी;
    क्या कहे क्या गुजरेगी इस दिल पर,
    जिंदा तो रहेंगे पर ज़िन्दगी न रहेगी।
  • घरों पे नाम थे नामों के साथ ओहदे थे;<br/>
बहुत तलाश किया कोई आदमी न मिला!
    घरों पे नाम थे नामों के साथ ओहदे थे;
    बहुत तलाश किया कोई आदमी न मिला!
    ~ Bashir Badr