• डूबी हैं मेरी उँगलियाँ खुद अपने लहू में;
    ये काँच के टुकड़ों को उठाने के सज़ा है।
    ~ Parveen Shakir
  • खुशबू की तरह मेरी हर साँस में;<br />
प्यार अपना बसाने का वादा करो;<br />
रंग जितने तुम्हारी मोहब्बत के हैं;<br />
मेरे दिल में सजाने का वादा करो।Upload to Facebook
    खुशबू की तरह मेरी हर साँस में;
    प्यार अपना बसाने का वादा करो;
    रंग जितने तुम्हारी मोहब्बत के हैं;
    मेरे दिल में सजाने का वादा करो।
  • तन्हाइयों में मुस्कुराना इश्क़ है;<br />
एक बात को सब से छुपाना इश्क़ है;<br />
यूँ तो नींद नहीं आती हमें रात भर;<br />
मगर सोते-सोते जागना और जागते-जागते सोना ही इश्क़ है।Upload to Facebook
    तन्हाइयों में मुस्कुराना इश्क़ है;
    एक बात को सब से छुपाना इश्क़ है;
    यूँ तो नींद नहीं आती हमें रात भर;
    मगर सोते-सोते जागना और जागते-जागते सोना ही इश्क़ है।
  • कोई शाम आती है आपकी याद लेकर;
    कोई शाम जाती है आपकी याद देकर;
    हमें तो इंतज़ार है उस हसीन शाम का;
    जो आये कभी आपको साथ लेकर।
  • होशियारी दिल-ए-नादान...

    होशियारी दिल-ए-नादान बहुत करता है;
    रंज कम सहता है एलान बहुत करता है;

    रात को जीत तो पाता नहीं लेकिन ये चिराग;
    कम से कम रात का नुकसान बहुत करता है;

    आज कल अपना सफर तय नहीं करता कोई;
    हाँ सफर का सर-ओ-सामान बहुत करता है;

    अब ज़ुबान खंज़र-ए-कातिल की सना करती है;
    हम वो ही करते है जो खल्त-ए-खुदा करती है;

    हूँ का आलम है गिराफ्तारों की आबादी में;
    हम तो सुनते थे की ज़ंज़ीर सदा करती है।
    ~ Irfan Siddiqi
  • मुझ से बहुत क़रीब है तू फिर भी ऐ 'मुनीर';
    पर्दा सा कोई मेरे तिरे दरमियाँ तो है।
    ~ Munir Niazi
  • कच्ची दीवार हूँ ठोकर ना लगाना मुझे;<br />
अपनी नज़रों में बसा कर ना गिराना मुझे;<br />
तुम को आँखों में तसावुर की तरह रखता हूँ; <br />
दिल में धड़कन की तरह तुम भी बसाना मुझे।Upload to Facebook
    कच्ची दीवार हूँ ठोकर ना लगाना मुझे;
    अपनी नज़रों में बसा कर ना गिराना मुझे;
    तुम को आँखों में तसावुर की तरह रखता हूँ;
    दिल में धड़कन की तरह तुम भी बसाना मुझे।
  • काम आ सकीं ना अपनी वफ़ाएं तो क्या करें;<br />
उस बेवफा को भूल ना जाएं तो क्या करें।Upload to Facebook
    काम आ सकीं ना अपनी वफ़ाएं तो क्या करें;
    उस बेवफा को भूल ना जाएं तो क्या करें।
  • छूटा जो तेरा हाथ तो हम टूट के रोये;
    तुम जो ना रहे साथ तो हम टूट के रोये;
    चाहत की तमन्ना थी और ज़ख़्म दिए तुमने;
    पायी जो यह सौगात तो हम टूट के रोये।
  • कहाँ तक आँख रोएगी...

    कहाँ तक आँख रोएगी कहाँ तक किसका ग़म होगा;
    मेरे जैसा यहाँ कोई न कोई रोज़ कम होगा;

    तुझे पाने की कोशिश में कुछ इतना रो चुका हूँ मैं;
    कि तू मिल भी अगर जाये तो अब मिलने का ग़म होगा;

    समंदर की ग़लतफ़हमी से कोई पूछ तो लेता;
    ज़मीन का हौसला क्या ऐसे तूफ़ानों से कम होगा;

    मोहब्बत नापने का कोई पैमाना नहीं होता;
    कहीं तू बढ़ भी सकता है, कहीं तू मुझ से कम होगा।
    ~ Wasim Barelvi