• यहाँ लिबास की क़ीमत है आदमी की नहीं,<br/>
मुझे गिलास बड़े दे शराब कम कर दे।Upload to Facebook
    यहाँ लिबास की क़ीमत है आदमी की नहीं,
    मुझे गिलास बड़े दे शराब कम कर दे।
    ~ Bashir Badr
  • फ़िज़ा की महकती शाम हो तुम,<br/>
प्यार में छलकता जाम हो तुम,<br/>
सीने में छुपाये फिरता हूँ यादें तुम्हारी,<br/>
इसलिए मेरी ज़िन्दगी का दूसरा नाम हो तुम!Upload to Facebook
    फ़िज़ा की महकती शाम हो तुम,
    प्यार में छलकता जाम हो तुम,
    सीने में छुपाये फिरता हूँ यादें तुम्हारी,
    इसलिए मेरी ज़िन्दगी का दूसरा नाम हो तुम!
  • कितने अरमानो को दफनाये बैठा हूँ,<br/>
कितने ज़ख्मो को दबाये बैठा हूँ,<br/>
मिलना मुश्किल है उनसे इस दौर में,<br/>
फिर भी दीदार की आस लगाये बैठा हूँ।Upload to Facebook
    कितने अरमानो को दफनाये बैठा हूँ,
    कितने ज़ख्मो को दबाये बैठा हूँ,
    मिलना मुश्किल है उनसे इस दौर में,
    फिर भी दीदार की आस लगाये बैठा हूँ।
  • कहाँ ले जाऊँ दिल दोनों जहाँ में इसकी मुश्किल है;
    यहाँ परियों का मजमा है, वहाँ हूरों की महफ़िल है;

    इलाही कैसी-कैसी सूरतें तूने बनाई हैं;
    के हर सूरत कलेजे से लगा लेने के क़ाबिल है;

    ये दिल लेते ही शीशे की तरह पत्थर पे दे मारा;
    मैं कहता रह गया ज़ालिम मेरा दिल है, मेरा दिल;

    है जो देखा अक्स आईने में अपना बोले झुंजलाकर;
    अरे तू कौन है, हट सामने से क्यों मुक़ाबिल है;

    हज़ारों दिल मसल कर पांओ से झुंजला के फ़रमाया;
    लो पहचानो तुम्हारा इन दिलों में कौन सा दिल है।
    ~ Akbar Allahabadi
  • जब से मुँह को लग गई अख़्तर मोहब्बत की शराब,<br/>
बे-पिए आठों पहर मदहोश रहना आ गया।Upload to Facebook
    जब से मुँह को लग गई अख़्तर मोहब्बत की शराब,
    बे-पिए आठों पहर मदहोश रहना आ गया।
    ~ Akhtar Ansari
  • ना कोई एहसास हैं, ना कोई जज्बात हैं;<br/>
बस एक रूह हैं, और कुछ अनकहे अल्फाज हैं।Upload to Facebook
    ना कोई एहसास हैं, ना कोई जज्बात हैं;
    बस एक रूह हैं, और कुछ अनकहे अल्फाज हैं।
  • मोहब्बत मुझे तुम से नहीं तेरे किरदार से है,<br/>
वरना हसीन लोग तो बाजार में आम मिला करते हैं।Upload to Facebook
    मोहब्बत मुझे तुम से नहीं तेरे किरदार से है,
    वरना हसीन लोग तो बाजार में आम मिला करते हैं।
  • उस की बाहों में सोने का अभी तक शौंक है मुझको,<br/>
मोहब्बत में उजड़ कर भी मेरी आदत नहीं बदली।Upload to Facebook
    उस की बाहों में सोने का अभी तक शौंक है मुझको,
    मोहब्बत में उजड़ कर भी मेरी आदत नहीं बदली।
  • अपने हाथों की लकीरों में बसा ले मुझको,
    मैं हूँ तेरा तो नसीब अपना बना ले मुझको;

    मुझसे तू पूछने आया है वफ़ा के माने,
    ये तेरी सादा-दिली मार ना डाले मुझको;

    ख़ुद को मैं बाँट ना डालूँ कहीं दामन-दामन,
    कर दिया तूने अगर मेरे हवाले मुझको;

    बादाह फिर बादाह है मैं ज़हर भी पी जाऊँ 'क़तील',
    शर्त ये है कोई बाहों में सम्भाले मुझको।
    ~ Qateel Shifai
  • कहीं वो आ के मिटा दें न इंतज़ार का लुत्फ़,<br/>
कहीं क़ुबूल न हो जाए इल्तिजा मेरी।Upload to Facebook
    कहीं वो आ के मिटा दें न इंतज़ार का लुत्फ़,
    कहीं क़ुबूल न हो जाए इल्तिजा मेरी।
    ~ Hasrat Jaipuri