• उम्र कैद की तरह होते हैं कुछ रिश्ते,
    जहाँ ज़मानत देकर भी रिहाई मुमकिन नहीं।
  • इश्क़ पर ज़ोर नहीं है ये वो आतश ग़ालिब,
    कि लगाए न लगे और बुझाए न बने।
    ~ Mirza Ghalib
  • डूबी हैं मेरी उँगलियाँ मेरे ही खून में,
    ये काँच के टुकड़ों पर भरोसे की सजा है।
  • मेरी यादो मे तुम हो, या मुझ मे ही तुम हो,
    मेरे खयालो मे तुम हो, या मेरा खयाल ही तुम हो,
    दिल मेरा धडक के पूछे, बार बार एक ही बात,
    मेरी जान मे तुम हो, या मेरी जान ही तुम हो।
  • मुझे वो दिन के उजाले में क्यों नहीं दिखता,
    जो ख़्वाब रात में आँखें निचोड़ जाता है,
    मेरी नज़र को सलीके से मोड़ जाता है,
    मेरा वजूद वो ऐसे झंझोड़ जाता है।
  • कुछ हिज्र के मौसम ने सताया नहीं इतना,
    कुछ हम ने तेरा सोग मनाया नहीं इतना;

    कुछ तेरी जुदाई की अज़िय्यत भी कड़ी थी,
    कुछ दिल ने भी ग़म तेरा मनाया नहीं इतना;

    क्यूँ सब की तरह भीग गई हैं तेरी पलकें,
    हम ने तो तुझे हाल सुनाया नहीं इतना;

    कुछ रोज़ से दिल ने तेरी राहें नहीं देखीं,
    क्या बात है तू याद भी आया नहीं इतना;

    क्या जानिए इस बे-सर-ओ-सामानी-ए-दिल ने,
    पहले तो कभी हम को रुलाया नहीं इतना।
    ~ Adeem Hashmi
  • अशआर मेरे यूँ तो ज़माने के लिए हैं,,
    कुछ शेर फ़क़त उन को सुनाने के लिए हैं।
    ~ Jaan Nisar Akhtar
  • एक आरज़ू है अगर पूरी परवरदिगार करे,
    मैं देर से जाऊं और वो मेरा इंतज़ार करे।
  • अज़ीज़ इतना ही रखो कि जी संभल जाये,
    अब इस कदर भी ना चाहो कि दम निकल जाये।
  • मुझको चाहते होंगे और भी बहुत लोग,
    मगर मुझे मोहब्बत सिर्फ अपनी मोहब्बत से है।