• अब इस सादा कहानी को नया एक मोड़ देना था,<br/>
ज़रा सी बात पर अहद-ए-वफ़ा ही तोड़ देना था,<br/>
महकता था बदन हर वक़्त जिस के लम्स-ए-खुशबू से,<br/>
वही गुलदस्ता दहलीज़-ए-खिजाँ पर छोड़ देना था।Upload to Facebook
    अब इस सादा कहानी को नया एक मोड़ देना था,
    ज़रा सी बात पर अहद-ए-वफ़ा ही तोड़ देना था,
    महकता था बदन हर वक़्त जिस के लम्स-ए-खुशबू से,
    वही गुलदस्ता दहलीज़-ए-खिजाँ पर छोड़ देना था।
    ~ Anjum Irfani
  • गुफ्तगू उनसे होती यह किस्मत कहाँ,<br/>
ये भी उनका करम है कि वो नज़र तो आये।Upload to Facebook
    गुफ्तगू उनसे होती यह किस्मत कहाँ,
    ये भी उनका करम है कि वो नज़र तो आये।
  • इस कश्मकश में उलझा है दिल आपका,<br/>
पढ़ लिया है सब कुछ मगर जवाब नहीं आया कोई।Upload to Facebook
    इस कश्मकश में उलझा है दिल आपका,
    पढ़ लिया है सब कुछ मगर जवाब नहीं आया कोई।
  • वो चुपके से ज़रूर आएंगे मिलने मुझसे,<br/>
हकीकत में नहीं तो सपने में ही सही।Upload to Facebook
    वो चुपके से ज़रूर आएंगे मिलने मुझसे,
    हकीकत में नहीं तो सपने में ही सही।
  • बुझा है दिल भरी महफ़िल में रौशनी देकर,
    मरूँगा भी तो हज़ारों को ज़िन्दगी देकर;

    क़दम-क़दम पे रहे अपनी आबरू का ख़याल,
    गई तो हाथ न आएगी जान भी देकर;

    बुज़ुर्गवार ने इसके लिए तो कुछ न कहा,
    गए हैं मुझको दुआ-ए-सलामती देकर;

    हमारी तल्ख़-नवाई को मौत आ न सकी,
    किसी ने देख लिया हमको ज़हर भी देकर;

    न रस्मे दोस्ती उठ जाए सारी दुनिया से,
    उठा न बज़्म से इल्ज़ामे दुश्मनी देकर;

    तिरे सिवा कोई क़ीमत चुका नहीं सकता,
    लिया है ग़म तिरा दो नयन की ख़ुशी देकर।
    ~ Nazeer Banarsi
  • हुस्न के समझने को उम्र चाहिए जानाँ,<br/>
दो घड़ी की चाहत में लड़कियाँ नहीं खुलतीं।Upload to Facebook
    हुस्न के समझने को उम्र चाहिए जानाँ,
    दो घड़ी की चाहत में लड़कियाँ नहीं खुलतीं।
    ~ Parveen Shakir
  • ना वो मिलती है ना मैं रुकता हूँ,<br/>
पता नहीं रास्ता गलत है या मंज़िल।Upload to Facebook
    ना वो मिलती है ना मैं रुकता हूँ,
    पता नहीं रास्ता गलत है या मंज़िल।
  • सुना है कि तुम रातों को देर तक जागते हो,<br/>
यादों के मारे हो या मोहब्बत मे हारे हो।Upload to Facebook
    सुना है कि तुम रातों को देर तक जागते हो,
    यादों के मारे हो या मोहब्बत मे हारे हो।
  • ग़म खुद ही ख़ुशी में बदल जायेंगे,<br/>
सिर्फ मुस्कुराने की आदत होनी चाहिए।Upload to Facebook
    ग़म खुद ही ख़ुशी में बदल जायेंगे,
    सिर्फ मुस्कुराने की आदत होनी चाहिए।
  • हर एक शाम का मंज़र धुआँ उगलने लगा,
    वो देखो दूर कहीं आसमाँ पिघलने लगा;

    तो क्या हुआ जो मयस्सर कोई लिबास नहीं,
    पहन के धूप मैं अपने बदन पे चलने लगा;

    मैं पिछली रात तो बेचैन हो गया इतना,
    कि उस के बाद ये दिल ख़ुद-ब-ख़ुद बहलने लगा;

    अजीब ख़्वाब थे शीशे की किर्चियों की तरह,
    जब उन को देखा तो आँखों से ख़ूँ निकलने लगा;

    बना के दाएरा यादें सिमट के बैठ गईं.
    ब-वक़्त-ए-शाम जो दिल का अलाव जलने लगा।
    ~ Ameer Imam