• मुस्कुराते पलकों पे सनम चले आते हैं;<br/>
आप क्या जानो कहां से हमारे गम आते हैं;<br/>
आज भी उस मोड़ पर खड़े हैं;<br/>
जहां किसी ने कहा था कि ठहरो हम अभी आते हैं!
    मुस्कुराते पलकों पे सनम चले आते हैं;
    आप क्या जानो कहां से हमारे गम आते हैं;
    आज भी उस मोड़ पर खड़े हैं;
    जहां किसी ने कहा था कि ठहरो हम अभी आते हैं!
  • गुमान था कि कोई दुश्मन जान नही ले सकता;<br/>
अपनों के वार का तो ख़याल तक ना था!
    गुमान था कि कोई दुश्मन जान नही ले सकता;
    अपनों के वार का तो ख़याल तक ना था!
  • हाल जब भी पूछो खैरियत बताते हो;<br/>
लगता है मोहब्बत छोड़ दी तुमने!
    हाल जब भी पूछो खैरियत बताते हो;
    लगता है मोहब्बत छोड़ दी तुमने!
  • इजहार गर जुबां से हो तो मजा क्या है;<br/>
चाहने वाला जो निगाहों को पढ़े तो बुरा क्या है!
    इजहार गर जुबां से हो तो मजा क्या है;
    चाहने वाला जो निगाहों को पढ़े तो बुरा क्या है!
  • रहने दो मुझे यूँ ही उलझा हुआ सा अपने सब दोस्तों में;<br/>
सुना है सुलझ जाने के बाद धागे अलग-अलग हो जाते हैं!
    रहने दो मुझे यूँ ही उलझा हुआ सा अपने सब दोस्तों में;
    सुना है सुलझ जाने के बाद धागे अलग-अलग हो जाते हैं!
  • सफर-ए-मोहब्बत अब खत़म हीं समझिए साहिब,<br/>

उनके रवैये से अब जुदाई की महक आने लगी है!
    सफर-ए-मोहब्बत अब खत़म हीं समझिए साहिब,
    उनके रवैये से अब जुदाई की महक आने लगी है!
  • अगर एहसास बयां हो जाते लफ्जों से;<br/>
तो फिर कौन तारीफ करता खामोशियों की!
    अगर एहसास बयां हो जाते लफ्जों से;
    तो फिर कौन तारीफ करता खामोशियों की!
  • मसरूफ़ हैं यहाँ लोग, दूसरों की कहानियाँ जानने में;<br/>
इतनी शिद्दत से ख़ुद को  अगर पढ़ते, तो ख़ुद़ा हो जाते!
    मसरूफ़ हैं यहाँ लोग, दूसरों की कहानियाँ जानने में;
    इतनी शिद्दत से ख़ुद को अगर पढ़ते, तो ख़ुद़ा हो जाते!
  • किताब -ए- दिल का कोई भी पन्ना सादा नहीं होता;<br/>
निगाह उस को भी पढ़ लेती है जो लिखा नही होता!
    किताब -ए- दिल का कोई भी पन्ना सादा नहीं होता;
    निगाह उस को भी पढ़ लेती है जो लिखा नही होता!
  • दोस्तों के दिल में रहने की इज़ाज़त नहीं मांगी जाती;<br/>
ये तो वो जगह है जहां कब्जा किया जाता है!
    दोस्तों के दिल में रहने की इज़ाज़त नहीं मांगी जाती;
    ये तो वो जगह है जहां कब्जा किया जाता है!