• भीड़ है बर-सर-ए-बाज़ार कहीं और चलें;<br/>
आ मेरे दिल मेरे ग़म-ख़्वार कहीं और चलें।Upload to Facebook
    भीड़ है बर-सर-ए-बाज़ार कहीं और चलें;
    आ मेरे दिल मेरे ग़म-ख़्वार कहीं और चलें।
    ~ Aitbar Sajid
  • सजा है मौसम तुम्हारी महक से आज फिर;<br/>
लगता है हवायें तुम्हें छू कर आयी हैं।Upload to Facebook
    सजा है मौसम तुम्हारी महक से आज फिर;
    लगता है हवायें तुम्हें छू कर आयी हैं।
  • चुपके चुपके पहले वो ज़िन्दगी में आते हैं;<br/>
मीठी मीठी बातों से दिल में उतर जाते हैं;<br/>
बच के रहना इन हुस्न वालों से यारो;<br/>
इन की आग में कई आशिक जल जाते हैं।Upload to Facebook
    चुपके चुपके पहले वो ज़िन्दगी में आते हैं;
    मीठी मीठी बातों से दिल में उतर जाते हैं;
    बच के रहना इन हुस्न वालों से यारो;
    इन की आग में कई आशिक जल जाते हैं।
  • बैठे हैं दिल में ये अरमां जगाये;<br/>
कि वो आज नजरों से अपनी पिलायें;<br/>
मजा तो तब है पीने का यारो;<br/>
इधर हम पियें और नशा उनको आये।Upload to Facebook
    बैठे हैं दिल में ये अरमां जगाये;
    कि वो आज नजरों से अपनी पिलायें;
    मजा तो तब है पीने का यारो;
    इधर हम पियें और नशा उनको आये।
  • निगाहों का मर्कज़ बना जा रहा हूँ;
    मोहब्बत के हाथों लुटा जा रहा हूँ;

    मैं क़तरा हूँ लेकिन ब-आग़ोशे-दरिया;
    अज़ल से अबद तक बहा जा रहा हूँ;

    वही हुस्न जिसके हैं ये सब मज़ाहिर;
    उसी हुस्न से हल हुआ जा रहा हूँ;

    न जाने कहाँ से न जाने किधर को;
    बस इक अपनी धुन में उड़ा जा रहा हूँ;

    न सूरत न मआनी न पैदा, न पिन्हाँ
    ये किस हुस्न में गुम हुआ जा रहा हूँ।
    ~ Jigar Moradabadi
  • कौन सी बात है जो उस में नहीं,<br/>
उस को देखे मेरी नज़र से कोई।Upload to Facebook
    कौन सी बात है जो उस में नहीं,
    उस को देखे मेरी नज़र से कोई।
    ~ Shahryar
  • उसकी पलकों से आँसू को चुरा रहे थे हम,<br/>
उसके ग़मो को हंसीं से सजा रहे थे हम,<br/>
जलाया उसी दिये ने मेरा हाथ,<br/>
जिसकी लो को हवा से बचा रहे थे हम।Upload to Facebook
    उसकी पलकों से आँसू को चुरा रहे थे हम,
    उसके ग़मो को हंसीं से सजा रहे थे हम,
    जलाया उसी दिये ने मेरा हाथ,
    जिसकी लो को हवा से बचा रहे थे हम।
  • जिसके नसीब मे हों ज़माने भर की ठोकरें,<br/>
उस बदनसीब से ना सहारों की बात कर। Upload to Facebook
    जिसके नसीब मे हों ज़माने भर की ठोकरें,
    उस बदनसीब से ना सहारों की बात कर।
  • करते नहीं इज़हार फिर क्यों करते हो तुम प्यार,<br/>
नज़रों से बातें बहुत हुई अब लब से करो इकरार।Upload to Facebook
    करते नहीं इज़हार फिर क्यों करते हो तुम प्यार,
    नज़रों से बातें बहुत हुई अब लब से करो इकरार।
  • बिछड़ा है जो एक बार तो मिलते नहीं देखा,
    इस ज़ख़्म को हमने कभी सिलते नहीं देखा;

    इस बार जिसे चाट गई धूप की ख़्वाहिश,
    फिर शाख़ पे उस फूल को खिलते नहीं देखा;

    यक-लख़्त गिरा है तो जड़ें तक निकल आईं,
    जिस पेड़ को आँधी में भी हिलते नहीं देखा;

    काँटों में घिरे फूल को चूम आयेगी तितली,
    तितली के परों को कभी छिलते नहीं देखा;

    किस तरह मेरी रूह हरी कर गया आख़िर,
    वो ज़हर जिसे जिस्म में खिलते नहीं देखा।
    ~ Parveen Shakir