• सादगी तो देखो उन नज़रो की;<br/>
हमसे बचने की कोशिष में बार बार हमें ही देखती है!Upload to Facebook
    सादगी तो देखो उन नज़रो की;
    हमसे बचने की कोशिष में बार बार हमें ही देखती है!
  • चिलमन का उलट जाना ज़ाहिर का बहाना है;<br/>
उनको तो बहर-सूरत इक जलवा दिख़ाना है!<br/><br/>

चिलमन: घूंघट<br/>
ज़ाहिर: स्पष्ठ<br/>
बहर-सूरत: हर हाल मेंUpload to Facebook
    चिलमन का उलट जाना ज़ाहिर का बहाना है;
    उनको तो बहर-सूरत इक जलवा दिख़ाना है!

    चिलमन: घूंघट
    ज़ाहिर: स्पष्ठ
    बहर-सूरत: हर हाल में
    ~ Meer Mehdi Majrooh
  • वज़ाहत इसकी पूछोगे तो फिर लाज़िम है उलझोगे;<br/>
ये अक्सर बे-वजह होता है जिसको इश्क़ कहते हैं!Upload to Facebook
    वज़ाहत इसकी पूछोगे तो फिर लाज़िम है उलझोगे;
    ये अक्सर बे-वजह होता है जिसको इश्क़ कहते हैं!
  • इश्क मुहब्बत तो सब करते हैं,<br/>
गम-ऐ-जुदाई से सब डरते हैं,<br/>
हम तो न इश्क करते हैं न मुहब्बत,<br/>
हम तो बस आपकी एक मुस्कुराहट पाने के लिए तरसते हैं!Upload to Facebook
    इश्क मुहब्बत तो सब करते हैं,
    गम-ऐ-जुदाई से सब डरते हैं,
    हम तो न इश्क करते हैं न मुहब्बत,
    हम तो बस आपकी एक मुस्कुराहट पाने के लिए तरसते हैं!
  • फिर निगाहों में धूल उड़ती है;<BR/>
अक्स फिर आइने बदलने लगे!Upload to Facebook
    फिर निगाहों में धूल उड़ती है;
    अक्स फिर आइने बदलने लगे!
    ~ Amjad Islam Amjad
  • जो ज़रा किसी ने छेड़ा छलक पड़ेंगे आँसू;<BR/>
कोई मुझ से यूँ न पूछे तेरा दिल उदास क्यों है!Upload to Facebook
    जो ज़रा किसी ने छेड़ा छलक पड़ेंगे आँसू;
    कोई मुझ से यूँ न पूछे तेरा दिल उदास क्यों है!
  • हम भी मजबूरियों का उज़्र करें;<br/>
फिर कहीं और मुब्तला हो जाएँ!Upload to Facebook
    हम भी मजबूरियों का उज़्र करें;
    फिर कहीं और मुब्तला हो जाएँ!
    ~ Ahmad Faraz
  • खामोश बैठे हैं तो लोग कहते हैं उदासी अच्छी नही;<br/>
और ज़रा सा हंस लें तो लोग मुस्कुराने की वजह पूछ लेते है।Upload to Facebook
    खामोश बैठे हैं तो लोग कहते हैं उदासी अच्छी नही;
    और ज़रा सा हंस लें तो लोग मुस्कुराने की वजह पूछ लेते है।
  • हमारे अहद की तहज़ीब में क़बा ही नहीं;<br/>
अगर क़बा हो तो बंद-ए-क़बा की बात करें!<br/><br/>
तहज़ीब: सभ्यता<br/>
क़बा: गाउन, चोंगा<br/>
बंद-ए-क़बा: कपड़े की गाँठUpload to Facebook
    हमारे अहद की तहज़ीब में क़बा ही नहीं;
    अगर क़बा हो तो बंद-ए-क़बा की बात करें!

    तहज़ीब: सभ्यता
    क़बा: गाउन, चोंगा
    बंद-ए-क़बा: कपड़े की गाँठ
    ~ Sahir Ludhianvi
  • क्यों मुझसे तुम दूर-दूर सा रहते हो;<br/>
अपने हुस्न पर मगरूर सा रहते हो;<br/>
प्यार की कसमों के राजदार थे कभी;<br/>
अब बेवफा बनकर हुजूर सा रहते हो!Upload to Facebook
    क्यों मुझसे तुम दूर-दूर सा रहते हो;
    अपने हुस्न पर मगरूर सा रहते हो;
    प्यार की कसमों के राजदार थे कभी;
    अब बेवफा बनकर हुजूर सा रहते हो!