• तुम्हारी याद के जब ज़ख़्म भरने लगते हैं;
    किसी बहाने तुम्हें याद करने लगते हैं।
    ~ Faiz Ahmad Faiz
  • पढ़ तो लिए है मगर अब कैसे फेंक दूँ;<br />
खुशबू तुम्हारे हाथों की इन कागज़ों में जो है।Upload to Facebook
    पढ़ तो लिए है मगर अब कैसे फेंक दूँ;
    खुशबू तुम्हारे हाथों की इन कागज़ों में जो है।
  • और भी बनती लकीरें दर्द की शायद कई;
    शुक्र है तेरा खुदा जो हाथ छोटा सा दिया;
    तूने जो बख्शी हमें बस चार दिन की ज़िंदगी;
    या ख़ुदा अच्छा किया जो साथ छोटा सा दिया।
  • चेहरे पे ख़ुशी छा जाती है, आँखों में सुरूर आ जाता है;<br />
जब तुम मुझे अपना कहते हो तो अपने पे गुरूर आ जाता है;<br />
तुम हुस्न की खुद एक दुनिया हो शायद ये तुम्हें मालूम नहीं;<br />
महफ़िल में तुम्हारे आने से हर चीज़ पे नूर आ जाता है।Upload to Facebook
    चेहरे पे ख़ुशी छा जाती है, आँखों में सुरूर आ जाता है;
    जब तुम मुझे अपना कहते हो तो अपने पे गुरूर आ जाता है;
    तुम हुस्न की खुद एक दुनिया हो शायद ये तुम्हें मालूम नहीं;
    महफ़िल में तुम्हारे आने से हर चीज़ पे नूर आ जाता है।
  • इसी में ख़ुश हूँ...

    इसी में ख़ुश हूँ मेरा दुख कोई तो सहता है;
    चली चलूँ कि जहाँ तक ये साथ रहता है;

    ज़मीन-ए-दिल यूँ ही शादाब तो नहीं ऐ दोस्त;
    क़रीब में कोई दरिया ज़रूर बहता है;

    न जाने कौन सा फ़िक़्रा कहाँ रक़्म हो जाये;
    दिलों का हाल भी अब कौन किस से कहता है;

    मेरे बदन को नमी खा गई अश्कों की;
    भरी बहार में जैसे मकान ढहता है।
    ~ Parveen Shakir
  • कोई मेरे दिल से पूछे तेरे तीर-ए-नीम-कश को;
    ये ख़लिश कहाँ से होती जो जिगर के पार होता।
    ~ Mirza Ghalib
  • यहाँ गमगीन मत होना, कोई जो भूल जाए तो;<br />
यहाँ रब को भी सब, वक़्त-ए-ज़रूरत याद करते हैं।Upload to Facebook
    यहाँ गमगीन मत होना, कोई जो भूल जाए तो;
    यहाँ रब को भी सब, वक़्त-ए-ज़रूरत याद करते हैं।
  • तेरी चुप्पी अगर तेरी कोई मज़बूरी है;<br />
तो रहने दे इश्क़ कौन सा ज़रूरी है।Upload to Facebook
    तेरी चुप्पी अगर तेरी कोई मज़बूरी है;
    तो रहने दे इश्क़ कौन सा ज़रूरी है।
  • कुछ ही पलों में ज़िन्दगी की तस्वीर बदल जाती है;
    कुछ ही पलों में ज़िन्दगी की तक़दीर बदल जाती है;
    कभी किसी को अपना बना कर दूर मत जाना;
    क्योंकि एक ही जुदाई से किसी की पूरी ज़िन्दगी बिखर जाती है।
  • तुम हक़ीक़त नहीं हो हसरत हो;
    जो मिले ख़्वाब में वो दौलत हो;

    तुम हो ख़ुशबू के ख़्वाब की ख़ुशबू;
    औए इतने ही बेमुरव्वत हो;

    तुम हो पहलू में पर क़रार नहीं;
    यानी ऐसा है जैसे फुरक़त हो;

    है मेरी आरज़ू के मेरे सिवा;
    तुम्हें सब शायरों से वहशत हो;

    किस तरह छोड़ दूँ तुम्हें जानाँ;
    तुम मेरी ज़िन्दगी की आदत हो;

    किस लिए देखते हो आईना;
    तुम तो ख़ुद से भी ख़ूबसूरत हो;

    दास्ताँ ख़त्म होने वाली है;
    तुम मेरी आख़िरी मोहब्बत हो।
    ~ Jon Elia