फ़लक देता है जिन को ऐश उन को ग़म भी होते हैं;
जहाँ बजते हैं नक़्क़ारे वहीं मातम भी होते हैं।
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दिल के दर्द छुपाना बड़ा मुश्किल है;
टूट कर फिर मुस्कुराना बड़ा मुश्किल है;
किसी अपने के साथ दूर तक जाओ फिर देखो;
अकेले लौट कर आना कितना मुश्किल है।
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ज़िंदगी हमारी यूँ सितम हो गयी;
ख़ुशी ना जाने कहाँ दफ़न हो गयी;
बहुत लिखी खुदा ने लोगों की मोहब्बत;
जब आयी हमारी बारी तो स्याही ही ख़त्म हो गयी।
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साथ रहते यूँ ही वक़्त गुज़र जायेगा;
दूर होने के बाद कौन किसे याद आयेगा;
जी लो ये पल जब हम साथ हैं;
कल क्या पता वक़्त कहाँ ले जायेगा।
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बड़ा वीरान मौसम है...

बड़ा वीरान मौसम है कभी मिलने चले आओ;
हर एक जानिब तेरा ग़म है कभी मिलने चले आओ;

हमारा दिल किसी गहरी जुदाई के भँवर में है;
हमारी आँख भी नम है कभी मिलने चले आओ;

मेरे हम-राह अगरचे दूर तक लोगों की रौनक़ है;
मगर जैसे कोई कम है कभी मिलने चले आओ;

तुम्हें तो इल्म है मेरे दिल-ए-वहशी के ज़ख़्मों को;
तुम्हारा वस्ल मरहम है कभी मिलने चले आओ;

अँधेरी रात की गहरी ख़मोशी और तनहा दिल;
दिए की लौ भी मद्धम है कभी मिलने चले आओ;

हवाओं और फूलों की नई ख़ुशबू बताती है;
तेरे आने का मौसम है कभी मिलने चले आओ।
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ख़मोशी से मुसीबत और भी संगीन होती है;
तड़प ऐ दिल तड़पने से ज़रा तस्कीन होती है।
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ज़ख़्म इतने गहरे हैं इज़हार क्या करें;
हम खुद निशाना बन गए वार क्या करें;
मर गए हम मगर खुली रही ये आँखें;
अब इससे ज्यादा उनका इंतज़ार क्या करें।
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बड़ी तब्दीलियां लायें हैं हम अपने आप में;
पर तुम्हारी याद में रहने की आदत अब भी बाकी है।
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आपकी याद दिल को बेकरार करती है;
नज़र तालाश आपको बार-बार करती है;
गिला नहीं जो हम हैं दूर आपसे;
हमारी तो जुदाई भी आपसे प्यार करती है।
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वो कभी मिल जाएँ तो...

वो कभी मिल जाएँ तो क्या कीजिए;
रात दिन सूरत को देखा कीजिए;

चाँदनी रातों में एक एक फूल को;
बे-ख़ुदी कहती है सजदा कीजिए;

जो तमन्ना बर न आए उम्र भर;
उम्र भर उस की तमन्ना कीजिए;

इश्क़ की रंगीनियों में डूब कर;
चाँदनी रातों में रोया कीजिए;

हम ही उस के इश्क़ के क़ाबिल न थे;
क्यों किसी ज़ालिम का शिकवा कीजिए;

कहते हैं 'अख़्तर' वो सुन कर मेरे शेर;
इस तरह हम को न रुसवा कीजिए।
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