• गुज़र जाते हैं खूबसूरत लम्हें यूँ ही मुसाफिरों की तरह;<br/>
यादें वहीं खड़ी रह जाती हैं, रूके रास्तों की तरह।Upload to Facebook
    गुज़र जाते हैं खूबसूरत लम्हें यूँ ही मुसाफिरों की तरह;
    यादें वहीं खड़ी रह जाती हैं, रूके रास्तों की तरह।
  • जब खाक ही होना था मुझको तो खाक-ए-रह-ए-सहरा होता,<br/>
इक कोशिश-ए-पैहम तो होती, उड़ता होता, गिरता होता।<br/><br/>
 
1. खाक - धूल, रंज, गर्द, मिट्टी जमीन<br/>
2. खाक-ए-रह-ए-सहरा - मरूस्थल या रेगिस्तान के रास्ते की धूलUpload to Facebook
    जब खाक ही होना था मुझको तो खाक-ए-रह-ए-सहरा होता,
    इक कोशिश-ए-पैहम तो होती, उड़ता होता, गिरता होता।

    1. खाक - धूल, रंज, गर्द, मिट्टी जमीन
    2. खाक-ए-रह-ए-सहरा - मरूस्थल या रेगिस्तान के रास्ते की धूल
    ~ Jameel Mazhari
  • ख्वाहिशें हैं कि तेरे दिल मे उतर जाऊं,
    मुद्दतों बाद मैं हद से गुज़र जाऊं;

    कतारों में हैं मेरे कई चाहने वाले,
    तुम कहो तो मैं सब से मुकर जाऊं;

    तुम परेशान हो शायद मेरी हरकतों से,
    सोचता हूँ कि अब मैं सुधर जाऊं;

    जब भी तुम फूलों सा महकती हो,
    दिल करता है कि तुम्हे कुतर जाऊं;

    बहूत महीन हो गया है मेरा मुकद्दर,
    काश मैं फिर से उभर जाऊं।
  • नजर अदांज करने की कुछ तो वजह बताई होती;<br/>
अब मैं कहाँ-कहाँ खुद में बुराई खोज सकता हूँ।Upload to Facebook
    नजर अदांज करने की कुछ तो वजह बताई होती;
    अब मैं कहाँ-कहाँ खुद में बुराई खोज सकता हूँ।
  • अब क्या करूँ तलाश किसी कारवां को मैं,<br/>
गुम हो गया हूँ पाके तेरे आस्ताँ को मैं।<br/><br/>

1. आस्ताँ - चौखट, दहलीज, ड्योढ़ीUpload to Facebook
    अब क्या करूँ तलाश किसी कारवां को मैं,
    गुम हो गया हूँ पाके तेरे आस्ताँ को मैं।

    1. आस्ताँ - चौखट, दहलीज, ड्योढ़ी
    ~ Jaleel Manikpuri
  • ये जो तुम ने खुद को बदला है;<br/>
ये बदला है, या बदला है।Upload to Facebook
    ये जो तुम ने खुद को बदला है;
    ये बदला है, या बदला है।
  • मुझ को शिकस्त-ए-दिल का मज़ा याद आ गया,<br/>
तुम क्यों उदास हो गए तुम्हें क्या याद आ गया;<br/>
कहने को ज़िन्दगी थी बहुत मुख़्तसर मगर,<br/>
कुछ यूँ बसर हुई कि ख़ुदा याद आ गया।Upload to Facebook
    मुझ को शिकस्त-ए-दिल का मज़ा याद आ गया,
    तुम क्यों उदास हो गए तुम्हें क्या याद आ गया;
    कहने को ज़िन्दगी थी बहुत मुख़्तसर मगर,
    कुछ यूँ बसर हुई कि ख़ुदा याद आ गया।
  • अब उतर आये हैं वह तारीफ पर,<br/>
हम जो आदी हो गये दुश्नाम के।Upload to Facebook
    अब उतर आये हैं वह तारीफ पर,
    हम जो आदी हो गये दुश्नाम के।
    ~ Daagh Dehlvi
  • मुकम्मल ना सही अधूरा ही रहने दो;<br/>
ये इश्क़ है कोई मक़सद तो नहीं।Upload to Facebook
    मुकम्मल ना सही अधूरा ही रहने दो;
    ये इश्क़ है कोई मक़सद तो नहीं।
  • चलते थे इस जहाँ में कभी सीना तान के हम भी;<br/>
ये कम्बख्त इश्क़ क्या हुआ घुटनो पे आ गए।Upload to Facebook
    चलते थे इस जहाँ में कभी सीना तान के हम भी;
    ये कम्बख्त इश्क़ क्या हुआ घुटनो पे आ गए।