• चंद तस्वीर-ऐ-बुताँ, चंद हसीनों के खतूत;<br/>
बाद मरने के मेरे घर से यह सामान निकला!
    चंद तस्वीर-ऐ-बुताँ, चंद हसीनों के खतूत;
    बाद मरने के मेरे घर से यह सामान निकला!
    ~ Mirza Ghalib
  • गलतफहमी से बढ़कर दोस्ती का दुश्मन नहीं कोई,<br/>
परिंदों को उड़ाना हो तो बस शाख़ें हिला दीजिए!
    गलतफहमी से बढ़कर दोस्ती का दुश्मन नहीं कोई,
    परिंदों को उड़ाना हो तो बस शाख़ें हिला दीजिए!
  • ये कश्मकश है ज़िंदगी की, कि कैसे बसर करें;<br/>
चादर बड़ी करें या, ख़्वाहिशे दफ़न करे!
    ये कश्मकश है ज़िंदगी की, कि कैसे बसर करें;
    चादर बड़ी करें या, ख़्वाहिशे दफ़न करे!
  • मसरूफ़ हैं यहाँ लोग, दूसरों की कहानियाँ जानने में,<br/>
इतनी शिद्दत से ख़ुद को अगर पढ़ते, तो ख़ुद़ा हो जाते|
    मसरूफ़ हैं यहाँ लोग, दूसरों की कहानियाँ जानने में,
    इतनी शिद्दत से ख़ुद को अगर पढ़ते, तो ख़ुद़ा हो जाते|
  • आज हर ख़ामोशी को मिटा देने का मन है;<br/>
जो भी छिपा रखा है मन में लूटा देने का मन है!
    आज हर ख़ामोशी को मिटा देने का मन है;
    जो भी छिपा रखा है मन में लूटा देने का मन है!
    ~ Gulzar
  • एक तिल का पहरा भी जरूरी है, लबो के आसपास,<br/>
मुझे डर है कहीं तेरी मुस्कुराहट को, कोई नज़र न लगा दे|
    एक तिल का पहरा भी जरूरी है, लबो के आसपास,
    मुझे डर है कहीं तेरी मुस्कुराहट को, कोई नज़र न लगा दे|
  • इतना दर्द तो मुझे मरने से भी नही होगा;<br/>
जितना दर्द तुम्हारी खामोशी ने दिया है!
    इतना दर्द तो मुझे मरने से भी नही होगा;
    जितना दर्द तुम्हारी खामोशी ने दिया है!
  • हम तो फूलों की तरह, अपनी आदत से बेबस हैं;<br/>
तोडने वाले को भी, खुशबू की सजा देते हैं!
    हम तो फूलों की तरह, अपनी आदत से बेबस हैं;
    तोडने वाले को भी, खुशबू की सजा देते हैं!
  • बुलंदीयो को पाने कि ख्वाईश तो बहुत हे मेरी;<br/>
मगर ओरो को रोंदने का हुनर कहा से लाऊ!
    बुलंदीयो को पाने कि ख्वाईश तो बहुत हे मेरी;
    मगर ओरो को रोंदने का हुनर कहा से लाऊ!
  • अच्छा है तुम्हारा दिल जो खवाबोे में मान जाता है;<br/>
एक कम्बक्त हमारा दिल है की रूबरू होने को तड़पता है।
    अच्छा है तुम्हारा दिल जो खवाबोे में मान जाता है;
    एक कम्बक्त हमारा दिल है की रूबरू होने को तड़पता है।