• कहाँ आ के रुकने थे रास्ते कहाँ मोड़ था उसे भूल जा;
    वो जो मिल गया उसे याद रख जो नहीं मिला उसे भूल जा;
    वो तेरे नसीब की बारिशें किसी और छत पे बरस गई;
    दिल-ए-मुंतज़िर मेरी बात सुन उसे भूल जा उसे भूल जा।
    ~ Amjad Islam Amjad
  • पा लिया था दुनिया की सबसे हसीन को;<br />
इस बात का तो हमें कभी गुरूर न था;<br />
वो रह पाते पास कुछ दिन और हमारे;<br />
शायद यह हमारे नसीब को मंज़ूर नहीं था।Upload to Facebook
    पा लिया था दुनिया की सबसे हसीन को;
    इस बात का तो हमें कभी गुरूर न था;
    वो रह पाते पास कुछ दिन और हमारे;
    शायद यह हमारे नसीब को मंज़ूर नहीं था।
  • उदासियों की वजह तो बहुत है ज़िन्दगी में;<br />
पर बेवजह खुश रहने का मज़ा ही कुछ और है।Upload to Facebook
    उदासियों की वजह तो बहुत है ज़िन्दगी में;
    पर बेवजह खुश रहने का मज़ा ही कुछ और है।
  • ये नज़र नज़र की बात है कि किसे क्या तलाश है;
    तू हँसने को बेताब है मुझे तेरी मुस्कुराहटों की प्यास है।
  • पहले सौ बार...

    पहले सौ बार इधर और उधर देखा है;
    तब कहीं डर के तुम्हें एक नज़र देखा है;

    हम पे हँसती है जो दुनियाँ उसे देखा ही नहीं;
    हम ने उस शोख को अए दीदा-ए-तर देखा है;

    आज इस एक नज़र पर मुझे मर जाने दो;
    उस ने लोगों बड़ी मुश्किल से इधर देखा है;

    क्या ग़लत है जो मैं दीवाना हुआ, सच कहना;
    मेरे महबूब को तुम ने भी अगर देखा है।
    ~ Majrooh Sultanpuri
  • भेज दी तस्वीर अपनी उन को ये लिख कर 'शकील';
    आप की मर्ज़ी है चाहे जिस नज़र से देखिए।
    ~ Shakeel Badayuni
  • तेरा अंदाज़-ए-सँवरना भी क्या कमाल है;<br />
तुझे  देखूं तो दिल धड़के, ना देखूं तो बेचैन रहूँ।Upload to Facebook
    तेरा अंदाज़-ए-सँवरना भी क्या कमाल है;
    तुझे देखूं तो दिल धड़के, ना देखूं तो बेचैन रहूँ।
  • कितना इख़्तियार था उसे अपनी चाहत पर;<br />
जब चाहा याद किया जब चाहा भुला दिया;<br />
बहुत अच्छे से जानता है वो मुझे बहलाने के तरीके;<br />
जब चाहा हँसा दिया जब चाहा रुला दिया।Upload to Facebook
    कितना इख़्तियार था उसे अपनी चाहत पर;
    जब चाहा याद किया जब चाहा भुला दिया;
    बहुत अच्छे से जानता है वो मुझे बहलाने के तरीके;
    जब चाहा हँसा दिया जब चाहा रुला दिया।
  • कितना अजीब है लोगों का अंदाज़-ए-मोहब्बत;
    रोज़ एक नया ज़ख्म देकर कहते हैं अपना ख्याल रखना।
  • देखना भी तो उन्हें दूर से देखा करना;
    शेवा-ए-इश्क़ नहीं हुस्न को रुसवा करना;

    एक नज़र ही तेरी काफ़ी थी कि आई राहत-ए-जान;
    कुछ भी दुश्वार न था मुझ को शकेबा करना;

    उन को यहाँ वादे पे आ लेने दे ऐ अब्र-ए-बहार;
    जिस तरह चाहना फिर बाद में बरसा करना;

    शाम हो या कि सहर याद उन्हीं की रख ले;
    दिन हो या रात हमें ज़िक्र उन्हीं का करना;

    कुछ समझ में नहीं आता कि ये क्या है 'हसरत';
    उन से मिलकर भी न इज़हार-ए-तमन्ना करना।
    ~ Hasrat Mohani