• खुलेगी इस नज़र पे चश्म-ए-तर आहिस्ता आहिस्ता;
    किया जाता है पानी में सफ़र आहिस्ता आहिस्ता;
    कोई ज़ंजीर फिर वापस वहीं पर ले के आती है;
    कठिन हो राह तो छूटता है घर आहिस्ता आहिस्ता।
    ~ Parveen Shakir
  • सब फ़साने हैं दुनियादारी के,<br />
किस से किस का सुकून लूटा है;<br />
सच तो ये है कि इस ज़माने में,<br />
मैं भी झूठा हूँ तू भी झूठा है।Upload to Facebook
    सब फ़साने हैं दुनियादारी के,
    किस से किस का सुकून लूटा है;
    सच तो ये है कि इस ज़माने में,
    मैं भी झूठा हूँ तू भी झूठा है।
  • ख्याल में आता है जब भी उसका चेहरा;<br />
तो लबों पे अक्सर फरियाद आती है;<br />
भूल जाता हूँ सारे ग़म और सितम उसके;<br />
जब ही उसकी थोड़ी सी मोहब्बत याद आती है।Upload to Facebook
    ख्याल में आता है जब भी उसका चेहरा;
    तो लबों पे अक्सर फरियाद आती है;
    भूल जाता हूँ सारे ग़म और सितम उसके;
    जब ही उसकी थोड़ी सी मोहब्बत याद आती है।
  • फिर उसके जाते ही दिल सुनसान हो कर रह गया;
    अच्छा भला इक शहर वीरान हो कर रह गया;

    हर नक्श बतल हो गया अब के दयार-ए-हिज्र में;
    इक ज़ख्म गुज़रे वक्त की पहचान हो कर रह गया;

    रुत ने मेरे चारों तरफ खींचें हिसार-ए-बाम-ओ-दर;
    यह शहर फिर मेरे लिए ज़ान्दान हो कर रह गया;

    कुछ दिन मुझे आवाज़ दी लोगों ने उस के नाम से;
    फिर शहर भर में वो मेरी पहचान हो कर रह गया;

    इक ख्वाब हो कर रह गई गुलशन से अपनी निस्बतें;
    दिल रेज़ा रेज़ा कांच का गुलदान हो कर रह गया;

    ख्वाहिश तो थी "साजिद" मुझे तशीर-ए-मेहर-ओ-माह की;
    लेकिन फ़क़त मैं साहिब-ए-दीवान हो कर रह गया।
    ~ Aitbar Sajid
  • अर्ज़ किया है:<br />
वो कहती अपने भाइयों से, मेरे आशिक़ को यूँ ना पीटो;<br />

ज़रा गौर फरमाइये:<br />
वो कहती अपने भाइयों से, मेरे आशिक़ को यूँ ना पीटो;<br />
बड़ा ज़िद्दी है ये कमीना, पहले कुत्ते की तरह घसीटो।Upload to Facebook
    अर्ज़ किया है:
    वो कहती अपने भाइयों से, मेरे आशिक़ को यूँ ना पीटो;
    ज़रा गौर फरमाइये:
    वो कहती अपने भाइयों से, मेरे आशिक़ को यूँ ना पीटो;
    बड़ा ज़िद्दी है ये कमीना, पहले कुत्ते की तरह घसीटो।
  • तू कहीं हो दिल-ए-दीवाना वहाँ पहुँचेगा;
    शमा होगी जहाँ परवाना वहाँ पहुँचेगा।
    ~ Bahadur Shah Zafar
  • अपनी यादें अपनी बातें लेकर जाना भूल गये;<br />
जाने वाले जल्दी में मिलकर जाना भूल गये;<br />
मुड़-मुड़ कर देखा था जाते वक़्त रास्ते में उन्होंने;<br />
जैसे कुछ जरुरी था, जो वो हमें बताना भूल गये;<br />
वक़्त-ए-रुखसत भी रो रहा था हमारी बेबसी पर;<br />
उनके आंसू तो वहीं रह गये, वो बाहर ही आना भूल गये।Upload to Facebook
    अपनी यादें अपनी बातें लेकर जाना भूल गये;
    जाने वाले जल्दी में मिलकर जाना भूल गये;
    मुड़-मुड़ कर देखा था जाते वक़्त रास्ते में उन्होंने;
    जैसे कुछ जरुरी था, जो वो हमें बताना भूल गये;
    वक़्त-ए-रुखसत भी रो रहा था हमारी बेबसी पर;
    उनके आंसू तो वहीं रह गये, वो बाहर ही आना भूल गये।
  • बेनाम सा यह दर्द ठहर क्यों नही जाता;<br />
जो बीत गया है वो गुज़र क्यों नही जाता;<br />
वो एक ही चेहरा तो नही सारे जहाँ मैं;<br />
जो दूर है वो दिल से उतर क्यों नही जाता।Upload to Facebook
    बेनाम सा यह दर्द ठहर क्यों नही जाता;
    जो बीत गया है वो गुज़र क्यों नही जाता;
    वो एक ही चेहरा तो नही सारे जहाँ मैं;
    जो दूर है वो दिल से उतर क्यों नही जाता।
  • कभी दोस्ती कहेंगे कभी बेरुख़ी कहेंगे;
    जो मिलेगा कोई तुझसा उसे ज़िन्दगी कहेंगे;
    तेरा देखना है जादू तेरी गुफ़्तगू है खुशबू;
    जो तेरी तरह चमके उसे रोशनी कहेंगे।
  • कहाँ ले जाऊँ दिल...

    कहाँ ले जाऊँ दिल दोनों जहाँ में इसकी मुश्किल है;
    यहाँ परियों का मजमा है, वहाँ हूरों की महफ़िल है;

    इलाही कैसी-कैसी सूरतें तूने बनाई हैं;
    के हर सूरत कलेजे से लगा लेने के क़ाबिल है;

    ये दिल लेते ही शीशे की तरह पत्थर पे दे मारा;
    मैं कहता रह गया ज़ालिम मेरा दिल है, मेरा दिल;

    है जो देखा अक्स आईने में अपना बोले झुंजलाकर;
    अरे तू कौन है, हट सामने से क्यों मुक़ाबिल है;

    हज़ारों दिल मसल कर पांओ से झुंजला के फ़रमाया;
    लो पहचानो तुम्हारा इन दिलों में कौन सा दिल है।
    ~ Akbar Allahabadi