Hindi Shayari
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आग दिल में लगी जब वो खफ़ा हुए;
महसूस हुआ तब, जब वो जुदा हुए;
करके वफ़ा कुछ दे ना सके वो;
पर बहुत कुछ दे गए जब वो बेवफ़ा!
महसूस हुआ तब, जब वो जुदा हुए;
करके वफ़ा कुछ दे ना सके वो;
पर बहुत कुछ दे गए जब वो बेवफ़ा!
तक़दीर के आईने में मेरी तस्वीर खो गई;
आज हमेशा के लिए मेरी रूह सो गई;
मोहब्बत करके क्या पाया मैंने;
वो कल मेरी थी आज किसी और की हो गई!
आज हमेशा के लिए मेरी रूह सो गई;
मोहब्बत करके क्या पाया मैंने;
वो कल मेरी थी आज किसी और की हो गई!
किसी के दिल में बसना कुछ बुरा तो नही;
किसी को दिल में बसाना कोई खता तो नही;
गुनाह हो यह ज़माने की नजर में तो क्या;
यह ज़माने वाले कोई खुदा तो नही!
किसी को दिल में बसाना कोई खता तो नही;
गुनाह हो यह ज़माने की नजर में तो क्या;
यह ज़माने वाले कोई खुदा तो नही!

जब टूटने लगे हौंसला तो बस ये याद रखना;
बिना मेहनत के हासिल तख़्त-ओ-ताज नहीं होते;
ढूढ़ लेना अंधेरे में ही मंजिल अपनी दोस्तों;
क्योंकि जुगनू कभी रोशनी के मोहताज़ नहीं होते।
बिना मेहनत के हासिल तख़्त-ओ-ताज नहीं होते;
ढूढ़ लेना अंधेरे में ही मंजिल अपनी दोस्तों;
क्योंकि जुगनू कभी रोशनी के मोहताज़ नहीं होते।

कितने खड़े हैं पैरें अपना दिखा के सीना;
सीना चमक रहा है हीरे का ज्यूँ नगीना;
आधे बदन पे है पानी आधे पे है पसीना;
सर्वों का बह गोया कि इक करीना।
~ Nazeer Akbarabadi
सीना चमक रहा है हीरे का ज्यूँ नगीना;
आधे बदन पे है पानी आधे पे है पसीना;
सर्वों का बह गोया कि इक करीना।
~ Nazeer Akbarabadi

आगे तो परीजाद ये रखते थे हमें घेर;
आते थे चले आप जो लगती थी ज़रा देर;
सो आके बुढ़ापे ने किया हाय ये अंधेरे;
जो दौड़ के मिलते थे वो अब हैं मुंह फेर।
~ Nazeer Akbarabadi
आते थे चले आप जो लगती थी ज़रा देर;
सो आके बुढ़ापे ने किया हाय ये अंधेरे;
जो दौड़ के मिलते थे वो अब हैं मुंह फेर।
~ Nazeer Akbarabadi

तुमसे मिला था प्यार कुछ अच्छे नसीब थे;
हम उन दिनों अमीर थे, जब तुम गरीब थे।
हम उन दिनों अमीर थे, जब तुम गरीब थे।

बनकर अजनबी मिले थे जिन्दगी के सफर में;
इन यादों के लम्हों को मिटायेंगे नही;
अगर याद रखना फितरत है आपकी;
तो वादा है हम भी आपको कभी भुलायेंगे नही।
इन यादों के लम्हों को मिटायेंगे नही;
अगर याद रखना फितरत है आपकी;
तो वादा है हम भी आपको कभी भुलायेंगे नही।

अर्ज़ किया है:
उड़ती हुई फ्रॉक को काबू में रखो;
उड़ती हुई फ्रॉक को काबू में रखो;
वाह! वाह!
पैंटी ना पहनो कोई बात नहीं, कम से कम बगीचा तो साफ़ रखो।
उड़ती हुई फ्रॉक को काबू में रखो;
उड़ती हुई फ्रॉक को काबू में रखो;
वाह! वाह!
पैंटी ना पहनो कोई बात नहीं, कम से कम बगीचा तो साफ़ रखो।
यहाँ सब कुछ बिकता है, दोस्तों रहना जरा संभाल के;
बेचने वाले हवा भी बेच देते हैं, गुब्बारों में भर के;
सच बिकता है, झूट बिकता है, बिकती है हर कहानी;
तीन लोक में फैला है, फिर भी बिकता है बोतल में पानी।
बेचने वाले हवा भी बेच देते हैं, गुब्बारों में भर के;
सच बिकता है, झूट बिकता है, बिकती है हर कहानी;
तीन लोक में फैला है, फिर भी बिकता है बोतल में पानी।

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