• कुछ यूँ तुम इश्क़ का आगाज़ कर दो,<br/>
नज़र आयें हम तो नज़र-अंदाज़ कर दो!
    कुछ यूँ तुम इश्क़ का आगाज़ कर दो,
    नज़र आयें हम तो नज़र-अंदाज़ कर दो!
  • दिल को तोड़ने के लिए पत्थरों की ज़रूरत नहीं होती,<br/>
ये दिल तो बिखर जाते है सिर्फ लफ़्ज़ों की चोट से!
    दिल को तोड़ने के लिए पत्थरों की ज़रूरत नहीं होती,
    ये दिल तो बिखर जाते है सिर्फ लफ़्ज़ों की चोट से!
  • हम तो तेरे दिल की महफ़िल सजाने आए थे,<br/>
तेरी कसम तुझे अपना बनाने आए थे;<br/>
किस बात की सजा दी तुमने हमको बेवफा,<br/>
हम तो तेरे दर्द को अपना बनाने आए थे!
    हम तो तेरे दिल की महफ़िल सजाने आए थे,
    तेरी कसम तुझे अपना बनाने आए थे;
    किस बात की सजा दी तुमने हमको बेवफा,
    हम तो तेरे दर्द को अपना बनाने आए थे!
  • दिल के सागर में लहरें उठाया ना करो,<br/>
ख्वाब बनकर नींद चुराया ना करो;<br/>
बहुत चोट लगती है मेरे दिल को,<br/>
तुम ख्वाबों में आकर यूँ तडपाया ना करो!
    दिल के सागर में लहरें उठाया ना करो,
    ख्वाब बनकर नींद चुराया ना करो;
    बहुत चोट लगती है मेरे दिल को,
    तुम ख्वाबों में आकर यूँ तडपाया ना करो!
  • अक्सर यूँ ही एक सवाल आता है उमड़ कर जेहन में मेरे;<br/>
आज बे वजह क्यों भूल गये कल तक बेवजह चाहने वाले!
    अक्सर यूँ ही एक सवाल आता है उमड़ कर जेहन में मेरे;
    आज बे वजह क्यों भूल गये कल तक बेवजह चाहने वाले!
  • आईना कब किसको सच बता पाया है;<br/>
जब देखा बांया, तो दांया ही नजर आया है!
    आईना कब किसको सच बता पाया है;
    जब देखा बांया, तो दांया ही नजर आया है!
  • चलो चलते हैं उस जहान में जहाँ रिश्तों का नाम नहीं पूछा जाता;<br/>
धडकनों पर कोई बंदिश नहीं ख्वाबों पर कोई इलज़ाम नहीं दिया जाता!
    चलो चलते हैं उस जहान में जहाँ रिश्तों का नाम नहीं पूछा जाता;
    धडकनों पर कोई बंदिश नहीं ख्वाबों पर कोई इलज़ाम नहीं दिया जाता!
  • ना फिसलो इस उम्मीद में कि कोई तुम्हें उठा लेगा,<br/>
सोच कर मत डूबो दरिया में कि तुम्हें कोई बचा लेगा;<br/>
ये दुनिया तो एक अड्डा है तमाशबीनों का,<br/>
अगर देखा तुम्हें मुसीबत में तो हर कोई यहाँ मज़ा लेगा!
    ना फिसलो इस उम्मीद में कि कोई तुम्हें उठा लेगा,
    सोच कर मत डूबो दरिया में कि तुम्हें कोई बचा लेगा;
    ये दुनिया तो एक अड्डा है तमाशबीनों का,
    अगर देखा तुम्हें मुसीबत में तो हर कोई यहाँ मज़ा लेगा!
  • जाने क्यों अकेले रहने को मज़बूर हो गए,<br/>
यादों के साये भी हमसे दूर हो गए,<br/>
हो गए तन्हा इस महफ़िल में,<br/>
हमारे अपने भी हमसे दूर हो गए!
    जाने क्यों अकेले रहने को मज़बूर हो गए,
    यादों के साये भी हमसे दूर हो गए,
    हो गए तन्हा इस महफ़िल में,
    हमारे अपने भी हमसे दूर हो गए!
  • पीते-पीते ज़हर-ए-ग़म अब जिस्म नीला पड़ गया;<br/>
कुछ दिनों में देखना हम आसमां होने को हैं!
    पीते-पीते ज़हर-ए-ग़म अब जिस्म नीला पड़ गया;
    कुछ दिनों में देखना हम आसमां होने को हैं!