• काम अब कोई न आएगा बस इक दिल के सिवा;
    रास्ते बंद हैं सब कूचा-ए-क़ातिल के सिवा।
    ~ Ali Sardar Jafri
  • रोते रहे तुम भी, रोते रहे हम भी;<br/>
कहते रहे तुम भी और कहते रहे हम भी;<br/>
ना जाने इस ज़माने को हमारे इश्क़ से क्या नाराज़गी थी;<br/>
बस समझाते रहे तुम भी और समझाते रहे हम भी।Upload to Facebook
    रोते रहे तुम भी, रोते रहे हम भी;
    कहते रहे तुम भी और कहते रहे हम भी;
    ना जाने इस ज़माने को हमारे इश्क़ से क्या नाराज़गी थी;
    बस समझाते रहे तुम भी और समझाते रहे हम भी।
  • आँखों में आकर रुक जाते हैं आँसू;
    पलकों पर आकर रुक जाते हैं आँसू;
    मन तो करता है बह जाने दूँ इनको;
    पर आपकी हँसी को देख रुक जाते हैं आँसू।
  • ताल्लुक हो तो रूह से रूह का हो;<br/>
दिल तो अकसर एक दूसरे से भर जाया करते हैं।Upload to Facebook
    ताल्लुक हो तो रूह से रूह का हो;
    दिल तो अकसर एक दूसरे से भर जाया करते हैं।
  • कोई तो फूल खिलाए...

    कोई तो फूल खिलाए दुआ के लहजे में;
    अजब तरह की घुटन है हवा के लहजे में;

    ये वक़्त किस की रुऊनत पे ख़ाक डाल गया;
    ये कौन बोल रहा था ख़ुदा के लहजे में;

    न जाने ख़ल्क़-ए-ख़ुदा कौन से अज़ाब में है;
    हवाएँ चीख़ पड़ीं इल्तिजा के लहजे में;

    खुला फ़रेब-ए-मोहब्बत दिखाई देता है;
    अजब कमाल है उस बे-वफ़ा के लहजे में;

    यही है मसलहत-ए-जब्र-ए-एहतियात तो फिर;
    हम अपना हाल कहेंगे छुपा के लहजे में।
    ~ Iftikhar Arif
  • ये क्या जगह है दोस्तो ये कौन सा दयार है;
    हद्द-ए-निगाह तक जहाँ ग़ुबार ही ग़ुबार है।
    ~ Shahryar
  • मानते हैं सारा जहाँ तेरे साथ होगा;<br/>
खुशी का हर लम्हा तेरे पास होगा;<br/>
जिस दिन टूट जाएँगी साँसे हमारी;<br/>
उस दिन तुझे हमारी कमी का एहसास होगा।Upload to Facebook
    मानते हैं सारा जहाँ तेरे साथ होगा;
    खुशी का हर लम्हा तेरे पास होगा;
    जिस दिन टूट जाएँगी साँसे हमारी;
    उस दिन तुझे हमारी कमी का एहसास होगा।
  • किसी ने यूँ ही पुछ लिया हमसे कि दर्द की कीमत क्या है;<br/>
हमने हँसते हुए कहा, पता नहीं कुछ अपने मुफ्त में दे जाते हैं।Upload to Facebook
    किसी ने यूँ ही पुछ लिया हमसे कि दर्द की कीमत क्या है;
    हमने हँसते हुए कहा, पता नहीं कुछ अपने मुफ्त में दे जाते हैं।
  • कुदरत के इन हसीन नज़ारों का हम क्या करें;
    जब तुम ही साथ नहीं तो इन चाँद सितारों का क्या करें।
  • ये नाम मुमकिन रहेगा मक़ाम मुमकिन नहीं रहेगा;
    ग़ुरूर लहजे में आ गया तो कलाम मुमकिन नहीं रहेगा;

    ये बर्फ़-मौसम जो शहर-ए-जाँ में कुछ और लम्हे ठहर गया तो;
    लहू का दिल की किसी गली में क़याम मुमकिन नहीं रहेगा;

    तुम अपनी साँसों से मेरी साँसे अलग तो करने लगे हो लेकिन;
    जो काम आसाँ समझ रहे हो वो काम मुमकिन नहीं रहेगा;

    वफ़ा का काग़ज़ तो भीग जाएगा बद-गुमानी की बारिशों में;
    ख़तों की बातें ख़्वाब होंगी पयाम मुमकिन नहीं रहेगा;

    ये हम मोहब्बत में ला-तअल्लुक़ से हो रहे हैं तू देख लेना;
    दुआएँ तो ख़ैर कौन देगा सलाम मुमकिन नहीं रहेगा।
    ~ Noshi Gilani