फ़क़त इस शौक़ में पूछी हैं हज़ारों बातें;
मैं तेरा हुस्न तेरे हुस्न-ए-बयाँ तक देखूँ।

अनुवाद:
फ़क़त = सिर्फ
हुस्न-ए-बयाँ = सुंदरता की परिभाषा
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एक लफ्ज़ उनको सुनाने के लिए;
कितने अल्फ़ाज़ लिखे हमने ज़माने के लिए;
उनका मिलना ही मुक़द्दर में न था;
वर्ना क्या कुछ नहीं किया उनको पाने के लिए।
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कौन रोकेगा अब इन बहती हुई आँखों को;
क्योंकि रुलाना तो पुरानी आदत है ज़माने की;
एक ही शख्स था जो थाम लेता था हमको;
पर अब उसे भी आदत हो गयी है आज़माने की।
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दर्द है दिल में पर इसका एहसास नहीं होता;
रोता है दिल जब वो पास नहीं होता;
बर्बाद हो गए हम उसके प्यार में;
और वो कहते हैं इस तरह प्यार नहीं होता।
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घर का रस्ता...

घर का रस्ता भी मिला था शायद;
राह में संग-ए-वफ़ा था शायद;

इस क़दर तेज़ हवा के झोंके;
शाख़ पर फूल खिला था शायद;

जिस की बातों के फ़साने लिखे;
उस ने तो कुछ न कहा था शायद;

लोग बे-मेहर न होते होंगे;
वहम सा दिल को हुआ था शायद;

तुझ को भूले तो दुआ तक भूले;
और वही वक़्त-ए-दुआ था शायद;

ख़ून-ए-दिल में तो डुबोया था क़लम;
और फिर कुछ न लिखा था शायद;

दिल का जो रंग है ये रंग-ए-'अदा'
पहले आँखों में रचा था शायद।
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फ़लक देता है जिन को ऐश उन को ग़म भी होते हैं;
जहाँ बजते हैं नक़्क़ारे वहीं मातम भी होते हैं।
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दिल के दर्द छुपाना बड़ा मुश्किल है;
टूट कर फिर मुस्कुराना बड़ा मुश्किल है;
किसी अपने के साथ दूर तक जाओ फिर देखो;
अकेले लौट कर आना कितना मुश्किल है।
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ज़िंदगी हमारी यूँ सितम हो गयी;
ख़ुशी ना जाने कहाँ दफ़न हो गयी;
बहुत लिखी खुदा ने लोगों की मोहब्बत;
जब आयी हमारी बारी तो स्याही ही ख़त्म हो गयी।
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साथ रहते यूँ ही वक़्त गुज़र जायेगा;
दूर होने के बाद कौन किसे याद आयेगा;
जी लो ये पल जब हम साथ हैं;
कल क्या पता वक़्त कहाँ ले जायेगा।
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बड़ा वीरान मौसम है...

बड़ा वीरान मौसम है कभी मिलने चले आओ;
हर एक जानिब तेरा ग़म है कभी मिलने चले आओ;

हमारा दिल किसी गहरी जुदाई के भँवर में है;
हमारी आँख भी नम है कभी मिलने चले आओ;

मेरे हम-राह अगरचे दूर तक लोगों की रौनक़ है;
मगर जैसे कोई कम है कभी मिलने चले आओ;

तुम्हें तो इल्म है मेरे दिल-ए-वहशी के ज़ख़्मों को;
तुम्हारा वस्ल मरहम है कभी मिलने चले आओ;

अँधेरी रात की गहरी ख़मोशी और तनहा दिल;
दिए की लौ भी मद्धम है कभी मिलने चले आओ;

हवाओं और फूलों की नई ख़ुशबू बताती है;
तेरे आने का मौसम है कभी मिलने चले आओ।
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