• हमें भी याद रखें जब लिखें तारीख गुलशन की;<br />
कि हमने भी लुटाया है चमन में आशियां अपना।Upload to Facebook
    हमें भी याद रखें जब लिखें तारीख गुलशन की;
    कि हमने भी लुटाया है चमन में आशियां अपना।
    ~ Aziz Indorvi
  • हर रात रो-रो के उसे भुलाने लगे;
    आंसुओं में उस के प्यार को बहाने लगे;
    ये दिल भी कितना अजीब है कि;
    रोये हम तो वो और भी याद आने लगे।
  • टूट गया दिल पर अरमां वही है;<br />
दूर रहते हैं फिर भी प्यार वही है;<br />
जानते हैं कि मिल नहीं पायेंगे;<br />
फिर भी इन आँखों में इंतज़ार वही है।Upload to Facebook
    टूट गया दिल पर अरमां वही है;
    दूर रहते हैं फिर भी प्यार वही है;
    जानते हैं कि मिल नहीं पायेंगे;
    फिर भी इन आँखों में इंतज़ार वही है।
  • हो मुखातिब तो कहूँ, क्या मर्ज़ है मेरा;
    अब तुम ख़त में पूछोगे, तो खैरियत ही कहेंगे।
  • तो मैं भी ख़ुश हूँ कोई उस से जा के कह देना;
    अगर वो ख़ुश है मुझे बे-क़रार करते हुए;

    तुम्हें ख़बर ही नहीं है कि कोई टूट गया;
    मोहब्बतों को बहुत पाएदार करते हुए;

    मैं मुस्कुराता हुआ आईने में उभरूँगा;
    वो रो पड़ेगी अचानक सिंघार करते हुए;

    मुझे ख़बर थी कि अब लौट कर न आऊँगा;
    सो तुझ को याद किया दिल पे वार करते हुए;

    ये कह रही थी समुंदर नहीं ये आँखें हैं;
    मैं इन में डूब गया ए'तिबार करते हुए;

    भँवर जो मुझ में पड़े हैं वो मैं ही जानता हूँ;
    तुम्हारे हिज्र के दरिया को पार करते हुए।
    ~ Syed Wasi Shah
  • मेरी ख़बर तो किसी को नहीं मगर 'अख़्तर';
    ज़माना अपने लिए होशियार कैसा है।
    ~ Akhtar Ansari
  • तेरा नज़रिया मेरे नज़रिये से अलग था शायद,<br />
तुझे वक्त गुज़ारना था और मुझे जिन्दगी।Upload to Facebook
    तेरा नज़रिया मेरे नज़रिये से अलग था शायद,
    तुझे वक्त गुज़ारना था और मुझे जिन्दगी।
  • मुझसे नफरत ही करनी है तो इरादे मजबूत रखना;<br />
जरा से भी चूक हुई तो मोहब्बत हो जायेगी।Upload to Facebook
    मुझसे नफरत ही करनी है तो इरादे मजबूत रखना;
    जरा से भी चूक हुई तो मोहब्बत हो जायेगी।
  • मिसाल इसकी कहाँ है ज़माने में,
    कि सारे खोने के ग़म पाये हमने पाने में,
    वो शक्ल पिघली तो हर शय में ढल गयी जैसे,
    अजीब बात हुई है उसे भुलाने में,
    जो मुंतज़िर ना मिला वो तो हम हैं शर्मिंदा,
    कि हमने देर लगा दी पलट के आने में।
  • हवा में फिरते हो क्या हिर्स और हवा के लिए;
    ग़ुरूर छोड़ दो ऐ ग़ाफ़िलो ख़ुदा के लिए;

    गिरा दिया है हमें किस ने चाह-ए-उल्फ़त में;
    हम आप डूबे किसी अपने आशना के लिए;

    जहाँ में चाहिए ऐवान ओ क़स्र शाहों को;
    ये एक गुम्बद-ए-गर्दूं है बस गदा के लिए;

    वो आईना है के जिस को है हाजत-ए-सीमाब;
    इक इज़्तिराब है काफ़ी दिल-ए-सफ़ा के लिए;

    तपिश से दिल का हो क्या जाने सीने में क्या हाल;
    जो तेरे तीर का रोज़न न हो हवा के लिए;

    जो हाथ आए 'ज़फ़र' ख़ाक-पा-ए-फ़ख़रूद्दीन;
    तो मैं रखूँ उसे आँखों के तूतया के लिए।
    ~ Bahadur Shah Zafar