• जब से मुँह को लग गई अख़्तर मोहब्बत की शराब,<br/>
बे-पिए आठों पहर मदहोश रहना आ गया।Upload to Facebook
    जब से मुँह को लग गई अख़्तर मोहब्बत की शराब,
    बे-पिए आठों पहर मदहोश रहना आ गया।
    ~ Akhtar Ansari
  • ना कोई एहसास हैं, ना कोई जज्बात हैं;<br/>
बस एक रूह हैं, और कुछ अनकहे अल्फाज हैं।Upload to Facebook
    ना कोई एहसास हैं, ना कोई जज्बात हैं;
    बस एक रूह हैं, और कुछ अनकहे अल्फाज हैं।
  • मोहब्बत मुझे तुम से नहीं तेरे किरदार से है,<br/>
वरना हसीन लोग तो बाजार में आम मिला करते हैं।Upload to Facebook
    मोहब्बत मुझे तुम से नहीं तेरे किरदार से है,
    वरना हसीन लोग तो बाजार में आम मिला करते हैं।
  • उस की बाहों में सोने का अभी तक शौंक है मुझको,<br/>
मोहब्बत में उजड़ कर भी मेरी आदत नहीं बदली।Upload to Facebook
    उस की बाहों में सोने का अभी तक शौंक है मुझको,
    मोहब्बत में उजड़ कर भी मेरी आदत नहीं बदली।
  • अपने हाथों की लकीरों में बसा ले मुझको,
    मैं हूँ तेरा तो नसीब अपना बना ले मुझको;

    मुझसे तू पूछने आया है वफ़ा के माने,
    ये तेरी सादा-दिली मार ना डाले मुझको;

    ख़ुद को मैं बाँट ना डालूँ कहीं दामन-दामन,
    कर दिया तूने अगर मेरे हवाले मुझको;

    बादाह फिर बादाह है मैं ज़हर भी पी जाऊँ 'क़तील',
    शर्त ये है कोई बाहों में सम्भाले मुझको।
    ~ Qateel Shifai
  • कहीं वो आ के मिटा दें न इंतज़ार का लुत्फ़,<br/>
कहीं क़ुबूल न हो जाए इल्तिजा मेरी।Upload to Facebook
    कहीं वो आ के मिटा दें न इंतज़ार का लुत्फ़,
    कहीं क़ुबूल न हो जाए इल्तिजा मेरी।
    ~ Hasrat Jaipuri
  • धडकनों को कुछ तो काबू में कर ए दिल,<br/>
अभी तो पलकें झुकाई हैं मुस्कुराना अभी बाकी है उनका।Upload to Facebook
    धडकनों को कुछ तो काबू में कर ए दिल,
    अभी तो पलकें झुकाई हैं मुस्कुराना अभी बाकी है उनका।
  • मोहब्बत मुझे थे उसी से सनम,<br/>
यादों में उसकी यह दिल तड़पता रहा,<br/>
मौत भी मेरी चाहत को न रोक सकी,<br/>
क़ब्र में भी यह दिल उसके लिए धड़कता रहा।Upload to Facebook
    मोहब्बत मुझे थे उसी से सनम,
    यादों में उसकी यह दिल तड़पता रहा,
    मौत भी मेरी चाहत को न रोक सकी,
    क़ब्र में भी यह दिल उसके लिए धड़कता रहा।
  • एक ख़्वाब ने आँखें खोली हैं, क्या मोड़ आया है कहानी में,<br/>
वो भीग रही है बारिश में, और आग लगी है पानी में।Upload to Facebook
    एक ख़्वाब ने आँखें खोली हैं, क्या मोड़ आया है कहानी में,
    वो भीग रही है बारिश में, और आग लगी है पानी में।
  • निकले हम कहाँ से और किधर निकले;
    हर मोड़ पे चौंकाए ऐसा अपना सफ़र निकले;

    तु समझाया किया रो-रो के अपनी बात;
    तेरे हमदर्द भी लेकिन बड़े बे-असर निकले;

    बरसों करते रहे उनके पैगाम का इंतजार;
    जब आया वो तो उनके बेवफा होने की खबर निकले;

    अब संभले के चले 'ज़हर' और सफ़र की सोच;
    ऐसा ना हो कि फिर से ये जगह उसी का शहर निकले;

    तु भी रखता इरादे ऊँचे तेरा भी कोई मक़ाम होता;
    पर तेरी किस्मत की हमेशा हर बात पे मगर निकले।