• इक साल गया इक साल नया है आने को;<br/>
पर वक़्त का अब भी होश नहीं दीवाने को!
    इक साल गया इक साल नया है आने को;
    पर वक़्त का अब भी होश नहीं दीवाने को!
    ~ Ibn e Insha
  • तारीख़ें भी जवान हो रही हैं;<br/>
सुना है कैलेंडर को बीसवाँ साल लग रहा है!
    तारीख़ें भी जवान हो रही हैं;
    सुना है कैलेंडर को बीसवाँ साल लग रहा है!
  • तजुर्बे ने शेरों को खामोश रहना सिखाया है;<br/>
क्योंकि दहाड़ कर शिकार नहीं किया जाता!
    तजुर्बे ने शेरों को खामोश रहना सिखाया है;
    क्योंकि दहाड़ कर शिकार नहीं किया जाता!
  • इंसान की अकड़ वाजिब है जनाब,<br/>
पैसा आने पर तो बटुआ भी फूल जाता है!
    इंसान की अकड़ वाजिब है जनाब,
    पैसा आने पर तो बटुआ भी फूल जाता है!
  • हवा को गुमान था अपने आज़ाद होने का;<br/>
किसी ने उसे भी गुबारे में कैद कर बेच दिया।
    हवा को गुमान था अपने आज़ाद होने का;
    किसी ने उसे भी गुबारे में कैद कर बेच दिया।
  • वो आज मशहूर हो गए जो कभी काबिल न थे;
    और मंजिले उनको मिली जो दौड़ में कभी शामिल न थे!
  • न इब्तिदा की ख़बर है न इंतिहा मालूम;<br/>
रहा ये वहम कि हम हैं सो वो भी क्या मालूम!
    न इब्तिदा की ख़बर है न इंतिहा मालूम;
    रहा ये वहम कि हम हैं सो वो भी क्या मालूम!
  • परख से कब जाहिर हुई शख्सियत किसी की;<br/>
हम तो बस उन्हीं के हैं, जिन्हें हम पर यकीन है!
    परख से कब जाहिर हुई शख्सियत किसी की;
    हम तो बस उन्हीं के हैं, जिन्हें हम पर यकीन है!
  • ख़िज़ां की रुत में गुलाब लहजा बनाके रखना, कमाल ये है;<br/>
हवा की ज़द पे दिया जलाना, जला के रखना, कमाल ये है!<br/><br/>
ख़िज़ां - पतझड़
    ख़िज़ां की रुत में गुलाब लहजा बनाके रखना, कमाल ये है;
    हवा की ज़द पे दिया जलाना, जला के रखना, कमाल ये है!

    ख़िज़ां - पतझड़
    ~ Mubarak Siddiqui
  • रिश्तों को जेबों में नहीं हुजूर दिलों में रखिये;<br/>
क्योंकि वक्त से शातिर कोई जेब कतरा नहीं होता!
    रिश्तों को जेबों में नहीं हुजूर दिलों में रखिये;
    क्योंकि वक्त से शातिर कोई जेब कतरा नहीं होता!