• सच के हक़ में खड़ा हुआ जाए;<br/>
जुर्म भी है, तो ये किया जाए; <br/>
हर मुसाफ़िर को ये शऊर कहाँ;<br/>
कब रुका जाए, कब चला जाए!
    सच के हक़ में खड़ा हुआ जाए;
    जुर्म भी है, तो ये किया जाए;
    हर मुसाफ़िर को ये शऊर कहाँ;
    कब रुका जाए, कब चला जाए!
  • रहने दे उधार इक मुलाकात यूँ ही;<br/>
सुना है उधार वालों को लोग भुलाया नहीं करते!
    रहने दे उधार इक मुलाकात यूँ ही;
    सुना है उधार वालों को लोग भुलाया नहीं करते!
  • सुना है आज समंदर को बड़ा गुमान आया है,<br/>
उधर ही ले चलो कश्ती जहाँ तूफान आया है।
    सुना है आज समंदर को बड़ा गुमान आया है,
    उधर ही ले चलो कश्ती जहाँ तूफान आया है।
  • सच को तमीज़ ही नहीं बात करने की;<br/>
झूठ को देखो, कितना मीठा बोलता है।
    सच को तमीज़ ही नहीं बात करने की;
    झूठ को देखो, कितना मीठा बोलता है।
  • एक तेरी ज़िद्द ने हमें किस हाल में ला दिया,<br/>
जो जज़्बात सिर्फ़ तेरे लिए थे, उन्हें ज़माना पढ़ रहा है!
    एक तेरी ज़िद्द ने हमें किस हाल में ला दिया,
    जो जज़्बात सिर्फ़ तेरे लिए थे, उन्हें ज़माना पढ़ रहा है!
  • जहाँ कमरों में कैद हो जाती है `जिंदगी`,<br/>
लोग उसे `बड़ा शहर` कहते हैं!
    जहाँ कमरों में कैद हो जाती है "जिंदगी",
    लोग उसे "बड़ा शहर" कहते हैं!
  • वही ज़मीन है वही आसमान वही हम तुम;<br/>
सवाल यह है ज़माना बदल गया कैसे!
    वही ज़मीन है वही आसमान वही हम तुम;
    सवाल यह है ज़माना बदल गया कैसे!
  • वो शायद मतलब से मिलते है;<br/>
मुझे तो मिलने से मतलब है!
    वो शायद मतलब से मिलते है;
    मुझे तो मिलने से मतलब है!
  • रिश्ते बनाना इतना आसान जैसे,<br/>
'मिट्टी' पर 'मिट्टी' से  `मिट्टी`  लिखना;<br/>
लेकिन रिश्ते निभाना उतना ही मुश्किल जैसे,<br/>
'पानी' पर 'पानी' से  `पानी`  लिखना!
    रिश्ते बनाना इतना आसान जैसे,
    'मिट्टी' पर 'मिट्टी' से "मिट्टी" लिखना;
    लेकिन रिश्ते निभाना उतना ही मुश्किल जैसे,
    'पानी' पर 'पानी' से "पानी" लिखना!
  • तुम्हें सिर्फ ठेला दिखता है सड़क पर साहब,<br/>
हक़ीक़त में वो अपना पूरा घर खींचता है!
    तुम्हें सिर्फ ठेला दिखता है सड़क पर साहब,
    हक़ीक़त में वो अपना पूरा घर खींचता है!