• शरीर के लड़खड़ाने पे तो सबकी है नज़र;<br/>
सिर पर है कितना बोझ, कोई देखता नहीं।Upload to Facebook
    शरीर के लड़खड़ाने पे तो सबकी है नज़र;
    सिर पर है कितना बोझ, कोई देखता नहीं।
  • दिल दिया जिस ने किसी को वो हुआ साहेब-ए-दिल;<br/>
हाथ आ जाती है खो देने से दौलत दिल की!
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    दिल दिया जिस ने किसी को वो हुआ साहेब-ए-दिल;
    हाथ आ जाती है खो देने से दौलत दिल की!
    ~ Aasi Ghazipuri
  • ये जो तुम ने खुद को बदला है;<br/>
ये बदला है, या बदला है।Upload to Facebook
    ये जो तुम ने खुद को बदला है;
    ये बदला है, या बदला है।
  • खींचो न कमानों को न तलवार निकालो;<br/>
जब तोप मुक़ाबिल हो तो अख़बार निकालो।Upload to Facebook
    खींचो न कमानों को न तलवार निकालो;
    जब तोप मुक़ाबिल हो तो अख़बार निकालो।
    ~ Akbar Allahabadi
  • हर नजर में मुमकिन नहीं है बेगुनाह रहना;<br/>
वादा ये करें कि खुद की नजर में बेदाग रहें।Upload to Facebook
    हर नजर में मुमकिन नहीं है बेगुनाह रहना;
    वादा ये करें कि खुद की नजर में बेदाग रहें।
  • तेग़-बाज़ी का शौक़ अपनी जगह;<br/>
आप तो क़त्ल-ए-आम कर रहे हैं!<br/><br/>
Meaning:<br/>
तेग़-बाज़ी  =  तलवार बाज़ी, तलवार चलानाUpload to Facebook
    तेग़-बाज़ी का शौक़ अपनी जगह;
    आप तो क़त्ल-ए-आम कर रहे हैं!

    Meaning:
    तेग़-बाज़ी = तलवार बाज़ी, तलवार चलाना
    ~ Jon Elia
  • रक़ीबों के लिए अच्छा ठिकाना हो गया पैदा;<br/>
ख़ुदा आबाद रखे मैं तो कहता हूँ जहन्नम को।<br/><br/>

Meaning:<br/>
रक़ीब  =  दुश्मन, शत्रुUpload to Facebook
    रक़ीबों के लिए अच्छा ठिकाना हो गया पैदा;
    ख़ुदा आबाद रखे मैं तो कहता हूँ जहन्नम को।

    Meaning:
    रक़ीब = दुश्मन, शत्रु
    ~ Bekhud Dehlvi
  • अब हम मकान में ताला लगाने वाले हैं;<br/>
पता चला हैं कि मेहमान आने वाले हैं।Upload to Facebook
    अब हम मकान में ताला लगाने वाले हैं;
    पता चला हैं कि मेहमान आने वाले हैं।
    ~ Rahat Indori
  • हैं और भी दुनिया में सुखन-वर बहुत अच्छे,<br/>
कहते हैं कि ग़ालिब का है अंदाज़-ए-बयाँ और।Upload to Facebook
    हैं और भी दुनिया में सुखन-वर बहुत अच्छे,
    कहते हैं कि ग़ालिब का है अंदाज़-ए-बयाँ और।
    ~ Mirza Ghalib
  • कोई तो परचम ले कर निकले अपने गरेबान का `जालिब`;<br/>
चारो जानिब सन्नाटा है, दीवाने याद आते है।Upload to Facebook
    कोई तो परचम ले कर निकले अपने गरेबान का "जालिब";
    चारो जानिब सन्नाटा है, दीवाने याद आते है।
    ~ Habib Jalib