• किसी सबब से अगर बोलता नहीं हूँ मैं;<br/>
तो यूँ नहीं कि तुझे सोचता नहीं हूँ मैं!
    किसी सबब से अगर बोलता नहीं हूँ मैं;
    तो यूँ नहीं कि तुझे सोचता नहीं हूँ मैं!
    ~ Iftikhar Mughal
  • लोग कहते हैं कि क़ातिल को मसीहा कहिए;<br/>
कैसे मुमकिन है अंधेरों को उजाला कहिए!
    लोग कहते हैं कि क़ातिल को मसीहा कहिए;
    कैसे मुमकिन है अंधेरों को उजाला कहिए!
    ~ Faiz Ul Hasan Khayal
  • रफ़्ता रफ़्ता चीख़ना आराम हो जाने के बाद;<br/>
डूब जाना फिर निकलना शाम हो जाने के बाद!
    रफ़्ता रफ़्ता चीख़ना आराम हो जाने के बाद;
    डूब जाना फिर निकलना शाम हो जाने के बाद!
    ~ Parnav Mishra Tejas
  • कोई कैसा ही साबित हो तबीयत आ ही जाती है;<br/>
ख़ुदा जाने ये क्या आफ़त है आफ़त आ ही जाती है!<br/><br/>
*तबीयत: स्वभाव
    कोई कैसा ही साबित हो तबीयत आ ही जाती है;
    ख़ुदा जाने ये क्या आफ़त है आफ़त आ ही जाती है!

    *तबीयत: स्वभाव
    ~ Qalaq Merathi
  • ज़रा सा जोश क्या दरिया में आया;<br/>
समंदर की बुराई कर रहा है!
    ज़रा सा जोश क्या दरिया में आया;
    समंदर की बुराई कर रहा है!
    ~ Naeem Akhtar Khadimi
  • पुकार लेंगे उस को इतना आसरा तो चाहिए;<br/>
दुआ ख़िलाफ़-ए-वज़अ है मगर ख़ुदा तो चाहिए!<br/>

*ख़िलाफ़-ए-वज़अ - परंपरा के विपरीत
    पुकार लेंगे उस को इतना आसरा तो चाहिए;
    दुआ ख़िलाफ़-ए-वज़अ है मगर ख़ुदा तो चाहिए!
    *ख़िलाफ़-ए-वज़अ - परंपरा के विपरीत
    ~ Raees Faraz
  • ख़ुदा उसे भी किसी दिन ज़वाल देता है;<br/>
ज़माना जिस के हुनर की मिसाल देता है!<br/><br/>

* ज़वाल - पतन
    ख़ुदा उसे भी किसी दिन ज़वाल देता है;
    ज़माना जिस के हुनर की मिसाल देता है!

    * ज़वाल - पतन
    ~ Ejaz Ansari
  • दौर काग़जी था पर देर तक ख़तों में जज़्बात महफ़ूज़ रहते थे;<br/>
अब मशीनी दौर है उम्र भर की यादें ऊँगली से ही डिलीट हो जाती हैं।
    दौर काग़जी था पर देर तक ख़तों में जज़्बात महफ़ूज़ रहते थे;
    अब मशीनी दौर है उम्र भर की यादें ऊँगली से ही डिलीट हो जाती हैं।
  • देखूँ तो जुर्म और न देखूँ तो कुफ़्र है;<br/>
अब क्या कहूँ जमाल-ए-रुख़-ए-फ़ित्नागर को मैं!
    देखूँ तो जुर्म और न देखूँ तो कुफ़्र है;
    अब क्या कहूँ जमाल-ए-रुख़-ए-फ़ित्नागर को मैं!
  • ये ज़मीं आसमान रहने दे;<br/>
कोई तो साएबान रहने दे!<br/><br/>

* साएबान - शामियाना
    ये ज़मीं आसमान रहने दे;
    कोई तो साएबान रहने दे!

    * साएबान - शामियाना
    ~ Om Prakash Meghwanshi