• सच को तमीज़ ही नहीं बात करने की;<br/>
झूठ को देखो, कितना मीठा बोलता है।
    सच को तमीज़ ही नहीं बात करने की;
    झूठ को देखो, कितना मीठा बोलता है।
  • एक तेरी ज़िद्द ने हमें किस हाल में ला दिया,<br/>
जो जज़्बात सिर्फ़ तेरे लिए थे, उन्हें ज़माना पढ़ रहा है!
    एक तेरी ज़िद्द ने हमें किस हाल में ला दिया,
    जो जज़्बात सिर्फ़ तेरे लिए थे, उन्हें ज़माना पढ़ रहा है!
  • जहाँ कमरों में कैद हो जाती है `जिंदगी`,<br/>
लोग उसे `बड़ा शहर` कहते हैं!
    जहाँ कमरों में कैद हो जाती है "जिंदगी",
    लोग उसे "बड़ा शहर" कहते हैं!
  • वही ज़मीन है वही आसमान वही हम तुम;<br/>
सवाल यह है ज़माना बदल गया कैसे!
    वही ज़मीन है वही आसमान वही हम तुम;
    सवाल यह है ज़माना बदल गया कैसे!
  • वो शायद मतलब से मिलते है;<br/>
मुझे तो मिलने से मतलब है!
    वो शायद मतलब से मिलते है;
    मुझे तो मिलने से मतलब है!
  • रिश्ते बनाना इतना आसान जैसे,<br/>
'मिट्टी' पर 'मिट्टी' से  `मिट्टी`  लिखना;<br/>
लेकिन रिश्ते निभाना उतना ही मुश्किल जैसे,<br/>
'पानी' पर 'पानी' से  `पानी`  लिखना!
    रिश्ते बनाना इतना आसान जैसे,
    'मिट्टी' पर 'मिट्टी' से "मिट्टी" लिखना;
    लेकिन रिश्ते निभाना उतना ही मुश्किल जैसे,
    'पानी' पर 'पानी' से "पानी" लिखना!
  • तुम्हें सिर्फ ठेला दिखता है सड़क पर साहब,<br/>
हक़ीक़त में वो अपना पूरा घर खींचता है!
    तुम्हें सिर्फ ठेला दिखता है सड़क पर साहब,
    हक़ीक़त में वो अपना पूरा घर खींचता है!
  • तमाम लोगों को अपनी अपनी मंजिल मिल चुकी,<BR/> 
कमबख्त हमारा दिल है, कि अब भी सफर में है।
    तमाम लोगों को अपनी अपनी मंजिल मिल चुकी,
    कमबख्त हमारा दिल है, कि अब भी सफर में है।
  • बरसात का बादल तो दीवाना है क्या जाने;<br/>
किस राह से बचना है किस छत को भिगोना है!
    बरसात का बादल तो दीवाना है क्या जाने;
    किस राह से बचना है किस छत को भिगोना है!
    ~ Nida Fazli
  • वो इत्र-दान सा लहजा मेरे बुज़ुर्गों का;<br/>
रची-बसी हुई उर्दू ज़बान की ख़ुश्बू!
    वो इत्र-दान सा लहजा मेरे बुज़ुर्गों का;
    रची-बसी हुई उर्दू ज़बान की ख़ुश्बू!
    ~ Bashir Badr