• हमको मिटा सके, यह ज़माने में दम नहीं;
    हमसे ज़माना ख़ुद है, ज़माने से हम नहीं।
    ~ Jigar Moradabadi
  • हम दूर तक यूँ ही नहीं पहुंचे फ़राज़;<br/>
कुछ लोग कांधा देने आ गये थे।
    हम दूर तक यूँ ही नहीं पहुंचे फ़राज़;
    कुछ लोग कांधा देने आ गये थे।
    ~ Ahmad Faraz
  • क्या बनाने आये थे और क्या बना बैठे;
    कहीं मंदिर बना बैठे तो कहीं मस्जिद बना बैठे;
    हमसे तो जात अच्छी उन परिंदों की;
    जो कभी मंदिर पर जा बैठे तो कभी मस्जिद पे जा बैठे।
  • कहते है हर बात जुबां से हम;
    इशारा नहीं करते;
    आसमां पर चलने वाले;
    जमीं से गुज़ारा नहीं करते;
    हर हालात बद्दलने की हिम्मत है हम में;
    वक़्त का हर फैंसला हम गवारा नहीं करते।
  • ए तुफां तु ले ले मेरा इम्तिहां;<br/>
यहीं डटा हूं यहीं डटा रहूंगा;<br/>
आजमा ले तु अपनी ताकत जी भर के;<br/>
तेरा हौंसला मैं झुका के रहूँगा।
    ए तुफां तु ले ले मेरा इम्तिहां;
    यहीं डटा हूं यहीं डटा रहूंगा;
    आजमा ले तु अपनी ताकत जी भर के;
    तेरा हौंसला मैं झुका के रहूँगा।
  • जो हो गया उसे सोचा नहीं करते;
    जो मिल गया उसे खोया नहीं करते;
    हांसिल उन्हें होती हैं सफलता;
    जो वक़्त और हालत पर रोया नहीं करते।
  • हमें देख के चेहरा घुमा लेते है;
    मेरे नाम पे नज़रे फिरा लेते है;
    पर एक बात पे ना चले जोर उनका;
    करते है बातें गैरों की लेकिन;
    कसम मेरे नाम की खा लेते है।
  • मैंने हर गम खुशी में ढाला है;<br/>
मेरा हर चलन निराला है;<br/>
लोग जिन हादसों से मरते हैं;<br/>
मुझको उन हादसों ने पाला है।
    मैंने हर गम खुशी में ढाला है;
    मेरा हर चलन निराला है;
    लोग जिन हादसों से मरते हैं;
    मुझको उन हादसों ने पाला है।
    ~ Narendra Kumar Shad
  • दीवार क्या गिरी मेरे कच्चे मकान की;<br/>
लोगों ने मेरे आँगन से रस्ते बना लिए।
    दीवार क्या गिरी मेरे कच्चे मकान की;
    लोगों ने मेरे आँगन से रस्ते बना लिए।
    ~ Narendra Kumar Shad
  • किसी को घर मिला हिस्से में या कोई दुकां आई;<br/>
मैं घर में सबसे छोटा था, मेरे हिस्से में माँ आई।
    किसी को घर मिला हिस्से में या कोई दुकां आई;
    मैं घर में सबसे छोटा था, मेरे हिस्से में माँ आई।
    ~ Munawwar Rana