• दुनिया ये मुहब्बत को, मुहब्बत नहीं देती;
    इनाम तो बड़ी चीज है, कीमत नहीं देती;
    देने को मैं भी दे सकता हूँ गाली उसे;
    मगर मेरी तहजीब मुझे इजाजत नहीं देती।
  • वो मेरी हर बात से इक्तफाक़ रखता है;
    चुप चुप के मगर मेरा तवाफ़ करता है;
    कहीं कोई और शख्स मेरे करीब ना आ जाए;
    इसीलिए वो सब को मेरे खिलाफ रखता है।
  • मार ही डाले जो बे मौत, ये दुनिया वाले;
    हम जो जिन्दा हैं तो जीने का हुनर रखते है।
  • अच्छी सीरत को देखता कौन है;<br/>
अच्छी सूरत पे लोग जान दे देते है।
    अच्छी सीरत को देखता कौन है;
    अच्छी सूरत पे लोग जान दे देते है।
    ~ Bismil Brtpuri
  • एक नूर सा आज मेरे देश पे बरस्ता है;<br/>
जिसे देख आसमां भी तरसता है;<br/>
सूरज भी इस बात से  हैरां है कि आज;<br/> 
भारत मेरे जैसा कैसे चमकता है।<br/>  
शुभ दीपावली!
    एक नूर सा आज मेरे देश पे बरस्ता है;
    जिसे देख आसमां भी तरसता है;
    सूरज भी इस बात से हैरां है कि आज;
    भारत मेरे जैसा कैसे चमकता है।
    शुभ दीपावली!
  • एक दुआ मांगते है हम अपने भगवान से;<br/>
चाहते है आपकी ख़ुशी पूरे इमान से;<br/>
सब हसरतें पूरी हो आपकी और;<br/>
आप मुस्कुराते रहें दिलों-जान से।<br/>
शुभ दीपावली!
    एक दुआ मांगते है हम अपने भगवान से;
    चाहते है आपकी ख़ुशी पूरे इमान से;
    सब हसरतें पूरी हो आपकी और;
    आप मुस्कुराते रहें दिलों-जान से।
    शुभ दीपावली!
  • राहो में निकले तो रास्ता विरान था;<br/>
एक तरफ़ आबादी एक तरफ़ कब्रिस्तान था;<br/>
हर वीरान कब्र का यहीं बयान था;<br/>
देख के चल मुसाफ़िर कभी मैं भी इन्सान था।
    राहो में निकले तो रास्ता विरान था;
    एक तरफ़ आबादी एक तरफ़ कब्रिस्तान था;
    हर वीरान कब्र का यहीं बयान था;
    देख के चल मुसाफ़िर कभी मैं भी इन्सान था।
  • इसे इत्तिफ़ाक़ समझो या मेरे दर्द की हकीक़त;<br/>
आँखे जब भी नम हुई, वजह तुम ही निकले।
    इसे इत्तिफ़ाक़ समझो या मेरे दर्द की हकीक़त;
    आँखे जब भी नम हुई, वजह तुम ही निकले।
  • न तेरी शान कम होती न रुतबा ही घटा होता;
    जो गुस्से मेँ कहा तुमने वही हंस के कहा होता।
  • उसके होंठों पे कभी बददुआ नहीं होती;
    बस इक माँ है जो मुझसे कभी खफा नहीं होती।