• मैंने हर गम खुशी में ढाला है;<br/>
मेरा हर चलन निराला है;<br/>
लोग जिन हादसों से मरते हैं;<br/>
मुझको उन हादसों ने पाला है।
    मैंने हर गम खुशी में ढाला है;
    मेरा हर चलन निराला है;
    लोग जिन हादसों से मरते हैं;
    मुझको उन हादसों ने पाला है।
    ~ Narendra Kumar Shad
  • दीवार क्या गिरी मेरे कच्चे मकान की;<br/>
लोगों ने मेरे आँगन से रस्ते बना लिए।
    दीवार क्या गिरी मेरे कच्चे मकान की;
    लोगों ने मेरे आँगन से रस्ते बना लिए।
    ~ Narendra Kumar Shad
  • किसी को घर मिला हिस्से में या कोई दुकां आई;<br/>
मैं घर में सबसे छोटा था, मेरे हिस्से में माँ आई।
    किसी को घर मिला हिस्से में या कोई दुकां आई;
    मैं घर में सबसे छोटा था, मेरे हिस्से में माँ आई।
    ~ Munawwar Rana
  • अपने वजूद पर इतना तो यकीन है मुझको कि;<br/>   
कोई दूर तो हो सकता है मुझसे पर भूल नहीं सकता।
    अपने वजूद पर इतना तो यकीन है मुझको कि;
    कोई दूर तो हो सकता है मुझसे पर भूल नहीं सकता।
  • किस धुन में बढ़ा जाता है तू आगे ही आगे;<br/>
मंजिल तो बहुत पीछे तुझे ढूंढ़ रही है।
    किस धुन में बढ़ा जाता है तू आगे ही आगे;
    मंजिल तो बहुत पीछे तुझे ढूंढ़ रही है।
    ~ Matir Hoshiarpuri
  • बिक गया ये मुल्क मेरा रिश्वत के नाम पर;
    मगर है अब भी यहाँ तोड़ रहा है रोटी कोई 'मेहनत' के नाम पर!
  • बहुत से लोग थे मेहमान मेरे घर लेकिन;
    वो जानता था कि है एहतमाम किस के लिए!
  • मना लूँगा आपको रुठकर तो देखो;
    जोड़ लूँगा आपको टूटकर तो देखो;
    नादाँ हूँ पर इतना भी नहीं;
    थाम लूँगा आपको छूट कर तो देखो!
  • यह जो हिज्र में दीवार-ओ-दर को देखते हैं;
    कभी सबा को कभी नामबर को देखते हैं;
    वो आये घर में हमारे खुदा की कुदरत है;
    कभी हम उनको कभी अपने घर को देखते हैं!
  • बनती है अगर बात तो बांट लो हर ख़ुशी;<br/>
गम न ज़ाहिर करो तुम किसी से कभी;<br/>
दिल की गहराई में गम छुपाते रहो;<br/>
चार दिन की जिंदगी में सदा मुस्कुराते रहो!
    बनती है अगर बात तो बांट लो हर ख़ुशी;
    गम न ज़ाहिर करो तुम किसी से कभी;
    दिल की गहराई में गम छुपाते रहो;
    चार दिन की जिंदगी में सदा मुस्कुराते रहो!