• ज़माना तो बड़े शौक से सुन रहा था;<br/>
हम ही सो गए दास्ताँ कहते कहते।
    ज़माना तो बड़े शौक से सुन रहा था;
    हम ही सो गए दास्ताँ कहते कहते।
  • चिरागो की रोशनी, जो जरा हिली;
    लगा तुम्हारी एक, आहट सी मिली;
    जाके देखा जब दर पे तो;
    फिर वही काफ़िर हवा मिली।
  • ज़िंदगी की असली उड़ान बाकी है;<br/>
मेरे इरादों का इम्तिहान बाकी है;<br/>
अभी तो नापी है मुट्ठी भर जमीन;<br/>
अभी तो सारा आसमान बाकी है।
    ज़िंदगी की असली उड़ान बाकी है;
    मेरे इरादों का इम्तिहान बाकी है;
    अभी तो नापी है मुट्ठी भर जमीन;
    अभी तो सारा आसमान बाकी है।
  • मैंने कल शब चाहतों की सब किताबें फाड़ दी;
    सिर्फ एक कागज़ पर लफ्जे माँ रहने दिया।
  • जल के आशियाँ अपना ख़ाक हो चुका कब का;<br/>
आज तक ये आलम है रोशनी से डरते है।
    जल के आशियाँ अपना ख़ाक हो चुका कब का;
    आज तक ये आलम है रोशनी से डरते है।
    ~ Khumar Barabankvi
  • दुनिया ये मुहब्बत को, मुहब्बत नहीं देती;
    इनाम तो बड़ी चीज है, कीमत नहीं देती;
    देने को मैं भी दे सकता हूँ गाली उसे;
    मगर मेरी तहजीब मुझे इजाजत नहीं देती।
  • वो मेरी हर बात से इक्तफाक़ रखता है;
    चुप चुप के मगर मेरा तवाफ़ करता है;
    कहीं कोई और शख्स मेरे करीब ना आ जाए;
    इसीलिए वो सब को मेरे खिलाफ रखता है।
  • मार ही डाले जो बे मौत, ये दुनिया वाले;
    हम जो जिन्दा हैं तो जीने का हुनर रखते है।
  • अच्छी सीरत को देखता कौन है;<br/>
अच्छी सूरत पे लोग जान दे देते है।
    अच्छी सीरत को देखता कौन है;
    अच्छी सूरत पे लोग जान दे देते है।
    ~ Bismil Brtpuri
  • एक नूर सा आज मेरे देश पे बरस्ता है;<br/>
जिसे देख आसमां भी तरसता है;<br/>
सूरज भी इस बात से  हैरां है कि आज;<br/> 
भारत मेरे जैसा कैसे चमकता है।<br/>  
शुभ दीपावली!
    एक नूर सा आज मेरे देश पे बरस्ता है;
    जिसे देख आसमां भी तरसता है;
    सूरज भी इस बात से हैरां है कि आज;
    भारत मेरे जैसा कैसे चमकता है।
    शुभ दीपावली!