• एक अलग सी पहचान बनाने की आदत है हमें;
    जख्म हो जितना गहरा उतना मुस्कुराने की आदत है हमें!
  • वो इत्रदान सा लहज़ा मेरे बुजुर्गों का;
    रची बसी हुई उर्दू ज़बान की ख़ुशबू!
  • मुठ्ठियों में कैद है जो खुशियाँ सब में बांट दो;<br/>                            
तेरी हो चाहे मेरी हो एक दिन हथेलियां तो खुल ही जानी हैं!
    मुठ्ठियों में कैद है जो खुशियाँ सब में बांट दो;
    तेरी हो चाहे मेरी हो एक दिन हथेलियां तो खुल ही जानी हैं!
  • ठुकराया हमने भी बहुतों को है तेरी खातिर;<br/>
तुझसे फासला भी शायद उन की बद-दुआओं का असर है!
    ठुकराया हमने भी बहुतों को है तेरी खातिर;
    तुझसे फासला भी शायद उन की बद-दुआओं का असर है!
  • कभी हम मिले तो भी क्या मिले वही दूरियाँ वही फ़ासले;<br/>
न कभी हमारे क़दम बढ़े न कभी तुम्हारी झिझक गई!
    कभी हम मिले तो भी क्या मिले वही दूरियाँ वही फ़ासले;
    न कभी हमारे क़दम बढ़े न कभी तुम्हारी झिझक गई!
  • जनाजे लौट के आते, तो उनको सबूत मिल जाते;<br/>
जांबाज लौट के आ गये, ये क्या बदकिस्मती हो गयी!
    जनाजे लौट के आते, तो उनको सबूत मिल जाते;
    जांबाज लौट के आ गये, ये क्या बदकिस्मती हो गयी!
  • तूने फूँकों से हटाए हैं पहाड़ों के पहाड़;
    मेरे तलवे पे लुढ़कता हुआ कंकर है ज़रा उसको हटा दे!
  • जब तोलने बैठते हो रिश्तों को;<br/>
जरा बताना दूसरे पलड़े में क्या रखते हो!
    जब तोलने बैठते हो रिश्तों को;
    जरा बताना दूसरे पलड़े में क्या रखते हो!
  • मेरे लफ्ज़ फ़ीके पड़ गए, तेरी एक अदा के सामने;
    मैं तुझे ख़ुदा कह गई, अपने ख़ुदा के सामने!
  • अब रिन्द बच रहे हैं ज़रा तेज़ रक़्स हो;
    महफ़िल से उठ लिए हैं नमाज़ी तो लीजिए!