• मेरे लफ्ज़ फ़ीके पड़ गए, तेरी एक अदा के सामने;
    मैं तुझे ख़ुदा कह गई, अपने ख़ुदा के सामने!
  • अब रिन्द बच रहे हैं ज़रा तेज़ रक़्स हो;
    महफ़िल से उठ लिए हैं नमाज़ी तो लीजिए!
  • जो व्यस्त थे, वो व्यस्त ही निकले;
    वक्त पर फ़ालतू लोग ही काम आये!
  • तुम्हारा होना इतवार के दिन जैसा है;<br/>
कुछ सूझता नहीं बस अच्छा लगता है!
    तुम्हारा होना इतवार के दिन जैसा है;
    कुछ सूझता नहीं बस अच्छा लगता है!
  • फिर उड़ गयी नींद ये सोच कर,<br/>
सरहद पर बहा वो ख़ून मेरी नींद के लिए था।
    फिर उड़ गयी नींद ये सोच कर,
    सरहद पर बहा वो ख़ून मेरी नींद के लिए था।
  • नज़रें झुका लेने से भला सादगी का क्या ताल्लुक़;<br/>
शराफ़त तब झलकती है जब नीयत में पर्दा हो!
    नज़रें झुका लेने से भला सादगी का क्या ताल्लुक़;
    शराफ़त तब झलकती है जब नीयत में पर्दा हो!
  • सारा जहान उसी का है, जो मुस्कुराना जानता है;<br/>
रौशनी भी उसी की है, जो शमा जलाना जानता है;<br/>
हर जगह मंदिर मस्जिद और गुरुद्वारे हैं;<br/>
लेकिन ईश्वर तो उसी का है, जो सिर झुकाना जानता है!
    सारा जहान उसी का है, जो मुस्कुराना जानता है;
    रौशनी भी उसी की है, जो शमा जलाना जानता है;
    हर जगह मंदिर मस्जिद और गुरुद्वारे हैं;
    लेकिन ईश्वर तो उसी का है, जो सिर झुकाना जानता है!
  • मशहूर होने का शौंक किसे है;
    मुझे तो मेरे अपने ही ठीक से पहचान लें, तो भी काफ़ी है!
  • मयख़ाने से बढ़कर कोई ज़मीन नहीं;
    जहाँ सिर्फ़ क़दम लड़खड़ाते हैं ज़मीर नहीं!
  • कौन पूछता है पिंजरे में बंद परिंदों को;
    याद वही आते हैं जो उड़ जाते हैं!