• तुझे बाँहों में भर लेने की ख़्वाहिश यूँ उभरती है;<br/>
कि मैं अपनी नज़र में आप रुस्वा हो सा जाता हूँ।<br/><br/>

रुस्वा  =  बदनाम
    तुझे बाँहों में भर लेने की ख़्वाहिश यूँ उभरती है;
    कि मैं अपनी नज़र में आप रुस्वा हो सा जाता हूँ।

    रुस्वा = बदनाम
    ~ Jaan Nisar Akhtar
  • मोम के पास कभी आग को लाकर देखूँ;<br/>
सोचता हूँ कि तुम्हें हाथ लगा कर देखूँ!
    मोम के पास कभी आग को लाकर देखूँ;
    सोचता हूँ कि तुम्हें हाथ लगा कर देखूँ!
  • बरसों बाद भी, तेरी ज़िद्द की आदत ना बदली;<br/>
काश हम मोहब्बत नहीं, तेरी आदत होते!
    बरसों बाद भी, तेरी ज़िद्द की आदत ना बदली;
    काश हम मोहब्बत नहीं, तेरी आदत होते!
  • पलकों में आँसू और दिल में दर्द सोया है;<br/>
हँसने वालों को क्या पता रोने वाला किस कदर रोया है;<br/>
ये तो बस वो ही जान सकता है, मेरी तन्हाई का आलम;<br/>
जिसने ज़िंदगी में, किसी को पाने से पहले खोया हो!
    पलकों में आँसू और दिल में दर्द सोया है;
    हँसने वालों को क्या पता रोने वाला किस कदर रोया है;
    ये तो बस वो ही जान सकता है, मेरी तन्हाई का आलम;
    जिसने ज़िंदगी में, किसी को पाने से पहले खोया हो!
  • काश! मैं भी पानी का एक घूँट होता;<br/>
तेरे होंठों से लगता और तेरी रग-रग में समा जाता!
    काश! मैं भी पानी का एक घूँट होता;
    तेरे होंठों से लगता और तेरी रग-रग में समा जाता!
  • हमारे बगैर भी आबाद थीं महफिलें उनकी;
    और हम समझते थे कि उनकी रौनकें हम से है!
  • ताश के पत्ते तो खुशनसीब है यारों;
    बिखरने के बाद उठाने वाला तो कोई है!
  • हम भी मुस्कुराते थे कभी बेपरवाह अंदाज से;<br/>
देखा है खुद को आज पुरानी तस्वीरों में!
    हम भी मुस्कुराते थे कभी बेपरवाह अंदाज से;
    देखा है खुद को आज पुरानी तस्वीरों में!
  • ताबीज़ जैसा था वो शख्स;<br/>
गले लगते ही सुकूँ मिलता था!
    ताबीज़ जैसा था वो शख्स;
    गले लगते ही सुकूँ मिलता था!
  • छू ना सकूं आसमान, तो ना ही सही दोस्तो,
    आपके दिल को छू जाऊं, बस इतनी सी तमन्ना है।