• कतरे - कतरे की प्यास बुझाई है;<br/>
हमने आँख सहरा में भी बरसाई है!
    कतरे - कतरे की प्यास बुझाई है;
    हमने आँख सहरा में भी बरसाई है!
  • उभर फिर पुराना इक ग़म आ गया है;<br/>
आँखों में बरसात का मौसम आ गया है!
    उभर फिर पुराना इक ग़म आ गया है;
    आँखों में बरसात का मौसम आ गया है!
  • दिल से तो कई मौसम गुज़र जाते हैं;<br/>
आँखों से मगर  बरसात नहीं जाती!
    दिल से तो कई मौसम गुज़र जाते हैं;
    आँखों से मगर बरसात नहीं जाती!
  • रोकने की कोशिश तो बहुत की पलकों ने, मगर;<br/>
इश्क में पागल थे आँसू, ख़ुदकुशी करते चले गए!
    रोकने की कोशिश तो बहुत की पलकों ने, मगर;
    इश्क में पागल थे आँसू, ख़ुदकुशी करते चले गए!
  • सोचा न था जिंदगी में​ ऐसे भी फ़साने होंगे;<br/>
रोना भी जरूरी होगा और आसूँ भी छुपाने होंगे।
    सोचा न था जिंदगी में​ ऐसे भी फ़साने होंगे;
    रोना भी जरूरी होगा और आसूँ भी छुपाने होंगे।
  • जो ज़रा किसी ने छेड़ा छलक पड़ेंगे आँसू;<BR/>
कोई मुझ से यूँ न पूछे तेरा दिल उदास क्यों है!
    जो ज़रा किसी ने छेड़ा छलक पड़ेंगे आँसू;
    कोई मुझ से यूँ न पूछे तेरा दिल उदास क्यों है!
  • मेरी आंखों में आँसू हैं ना होठों पे तबस्सुम है;<br/>
समझ में क्या किसी की आयेगी तर्ज़-ए-फुगां मेरी!
    मेरी आंखों में आँसू हैं ना होठों पे तबस्सुम है;
    समझ में क्या किसी की आयेगी तर्ज़-ए-फुगां मेरी!
    ~ Shamsi Meenai
  • रगों में दौड़ते फिरने के हम नहीं कायल;<br/>
जब आँख से ही न टपका तो फिर लहू क्या है।
    रगों में दौड़ते फिरने के हम नहीं कायल;
    जब आँख से ही न टपका तो फिर लहू क्या है।
    ~ Mirza Ghalib
  • आँसू जानते हैं कौन अपना है, तभी अपनों के आगे निकलते हैं;<br/>
मुस्कुराहट का क्या है, ग़ैरों से भी वफ़ा कर लेती है!
    आँसू जानते हैं कौन अपना है, तभी अपनों के आगे निकलते हैं;
    मुस्कुराहट का क्या है, ग़ैरों से भी वफ़ा कर लेती है!
  • मैं ज़हर तो पी लूँ शौक़ से तेरी ख़ातिर;<br/>
पर शर्त ये है कि तुम सामने बैठ कर सासों को टूटता देखो।
    मैं ज़हर तो पी लूँ शौक़ से तेरी ख़ातिर;
    पर शर्त ये है कि तुम सामने बैठ कर सासों को टूटता देखो।