• मुस्कुराते पलकों पे सनम चले आते हैं;<br/>
आप क्या जानो कहां से हमारे गम आते हैं;<br/>
आज भी उस मोड़ पर खड़े हैं;<br/>
जहां किसी ने कहा था कि ठहरो हम अभी आते हैं!
    मुस्कुराते पलकों पे सनम चले आते हैं;
    आप क्या जानो कहां से हमारे गम आते हैं;
    आज भी उस मोड़ पर खड़े हैं;
    जहां किसी ने कहा था कि ठहरो हम अभी आते हैं!
  • काश तकदीर भी होती जुल्फ की तरह,<br/>
जब जब बिखरती, तब तब सवार लेते!
    काश तकदीर भी होती जुल्फ की तरह,
    जब जब बिखरती, तब तब सवार लेते!
  • तलाश में हूँ उसके, मगर अब तक नाकाम हूँ,<br/>

ख़ुद में ख़ुदा ढूंढना भी, गज़ब की इबादत है!
    तलाश में हूँ उसके, मगर अब तक नाकाम हूँ,
    ख़ुद में ख़ुदा ढूंढना भी, गज़ब की इबादत है!
  • मुंतज़िर किसका हूँ टूटी हुयी दहलीज़ पर मैं;<br/>
कौन आयेगा यहाँ कौन है आनेवाला!<br/><br/>

मुंतज़िर: इंतज़ार<br/>
दहलीज़: दहरी
    मुंतज़िर किसका हूँ टूटी हुयी दहलीज़ पर मैं;
    कौन आयेगा यहाँ कौन है आनेवाला!

    मुंतज़िर: इंतज़ार
    दहलीज़: दहरी
    ~ Ahmad Faraz
  • दिल नाशिकेब, रूह परेशान, नज़र उदास;<br/>
ये क्या बना दिया है तिरे इंतिज़ार ने!
    दिल नाशिकेब, रूह परेशान, नज़र उदास;
    ये क्या बना दिया है तिरे इंतिज़ार ने!
    ~ Seemab Akbarabadi
  • जहान-ए-रंग-ओ-बू में क्यों तलाश-ए-हुस्न हो मुझको;<br/>
हजारों जलवे रख्शिंदा है मेरे दिल के पर्दे में!<br/><br/>
जहान-ए-रंग-ओ-बू = रंग और खुश्बू की दुनिया,<br/>
जलवा = नज्जारा,<br/>
दृश्य, तमाशा,<br/>
रख्शिंदा = चमकने वाले, दीप्त, प्रकाशमान
    जहान-ए-रंग-ओ-बू में क्यों तलाश-ए-हुस्न हो मुझको;
    हजारों जलवे रख्शिंदा है मेरे दिल के पर्दे में!

    जहान-ए-रंग-ओ-बू = रंग और खुश्बू की दुनिया,
    जलवा = नज्जारा,
    दृश्य, तमाशा,
    रख्शिंदा = चमकने वाले, दीप्त, प्रकाशमान
    ~ Shakeel Badayuni
  • उदास आँखों में अपनी करार देखा है,<br/>
पहली बार उसे बेक़रार देखा है;<br/>
जिसे खबर ना होती थी मेरे आने-जाने की,
उसकी आँखों में अब इंतज़ार देखा है!
    उदास आँखों में अपनी करार देखा है,
    पहली बार उसे बेक़रार देखा है;
    जिसे खबर ना होती थी मेरे आने-जाने की, उसकी आँखों में अब इंतज़ार देखा है!
  • बहुत दिनों के बाद उसका कोरा कागज़ आया;<br/>
शायर हूँ साहब, लिखी हुई खामोशी पढ़ ली मैंने!
    बहुत दिनों के बाद उसका कोरा कागज़ आया;
    शायर हूँ साहब, लिखी हुई खामोशी पढ़ ली मैंने!
  • हम हैं मसरूफ़-ए-इंतिज़ाम मगर;<br/>
जाने क्या इंतिज़ाम कर रहे हैं।
    हम हैं मसरूफ़-ए-इंतिज़ाम मगर;
    जाने क्या इंतिज़ाम कर रहे हैं।
    ~ Jon Elia
  • मुद्दत से ख्वाब में भी नहीं नींद का ख्याल;<br/>
हैरत में हूँ ये किस का मुझे इंतज़ार है।
    मुद्दत से ख्वाब में भी नहीं नींद का ख्याल;
    हैरत में हूँ ये किस का मुझे इंतज़ार है।