• एहसास-ए-मोहब्बत के लिए बस इतना ही काफी है;<br/>
तेरे बगैर भी हम, तेरे ही रहते हैं!
    एहसास-ए-मोहब्बत के लिए बस इतना ही काफी है;
    तेरे बगैर भी हम, तेरे ही रहते हैं!
  • मुझे तो आज पता चला कि मैं किस क़दर तनहा हूँ;<br/>
पीछे जब भी मुड़ कर देखता हूँ तो मेरा साया भी मुँह फेर लेता है।
    मुझे तो आज पता चला कि मैं किस क़दर तनहा हूँ;
    पीछे जब भी मुड़ कर देखता हूँ तो मेरा साया भी मुँह फेर लेता है।
  • कब उनकी आँखों से इज़हार होगा,<br/>
दिल के किसी कोने में हमारे लिए प्यार होगा,<br/>
गुज़र रही हे रात उनकी याद में,<br/>
कबि तो उनको भी हमारा इंतज़ार होगा!
    कब उनकी आँखों से इज़हार होगा,
    दिल के किसी कोने में हमारे लिए प्यार होगा,
    गुज़र रही हे रात उनकी याद में,
    कबि तो उनको भी हमारा इंतज़ार होगा!
  • वो आ रहे हैं वो आते हैं आ रहे होंगे,<br/>
शब-ए-फ़िराक़ ये कह कर गुज़ार दी हम ने।
    वो आ रहे हैं वो आते हैं आ रहे होंगे,
    शब-ए-फ़िराक़ ये कह कर गुज़ार दी हम ने।
    ~ Faiz Ahmad Faiz
  • दिन भर भटकते रहते हैं अरमान तुझ से मिलने के,<br/>
न दिल ठहरता है न इंतज़ार रुकता है।
    दिन भर भटकते रहते हैं अरमान तुझ से मिलने के,
    न दिल ठहरता है न इंतज़ार रुकता है।
  • है ख़ुशी इंतज़ार की हर दम,<br/>
मैं ये क्यों पूछूं कब मिलेंगे आप।
    है ख़ुशी इंतज़ार की हर दम,
    मैं ये क्यों पूछूं कब मिलेंगे आप।
    ~ Nizam Rampuri
  • मोहब्बत वो हसीं गुनाह है जो हर इंसान ख़ुशी ख़ुशी करता है,<br/>
मोहब्बत में इंतज़ार वो सज़ा है जो वही सहता है जो सच्ची मोहब्बत करता है।
    मोहब्बत वो हसीं गुनाह है जो हर इंसान ख़ुशी ख़ुशी करता है,
    मोहब्बत में इंतज़ार वो सज़ा है जो वही सहता है जो सच्ची मोहब्बत करता है।
  • टूट गया दिल पर अरमां वही है;<br />
दूर रहते हैं फिर भी प्यार वही है;<br />
जानते हैं कि मिल नहीं पायेंगे;<br />
फिर भी इन आँखों में इंतज़ार वही है।
    टूट गया दिल पर अरमां वही है;
    दूर रहते हैं फिर भी प्यार वही है;
    जानते हैं कि मिल नहीं पायेंगे;
    फिर भी इन आँखों में इंतज़ार वही है।
  • भरे हैं काँटों से रास्ते सारे, मगर फिर भी हम चले जा रहे हैं;
    भूल गया है कोई अपना हमें, मगर हम उन्हें याद किये जा रहे हैं;
    आयेंगे एक बार वो फिर ये उम्मीद है;
    इसी उम्मीद के सहारे हम बस जिए जा रहे हैं।
  • जीने की ख्वाहिश में हर रोज़ मरते हैं;<br />
वो आये न आये हम इंतज़ार करते हैं;<br />
झूठा ही सही मेरे यार का वादा;<br />
हम सच मान कर ऐतबार करते हैं।
    जीने की ख्वाहिश में हर रोज़ मरते हैं;
    वो आये न आये हम इंतज़ार करते हैं;
    झूठा ही सही मेरे यार का वादा;
    हम सच मान कर ऐतबार करते हैं।