• खुदा तो इक तरफ, खुद से भी कोसों दूर होता है,<br/>
बशर जिस वक्त ताकत के नशे में चूर होता है!<br/><br/>

बशर - मानव
    खुदा तो इक तरफ, खुद से भी कोसों दूर होता है,
    बशर जिस वक्त ताकत के नशे में चूर होता है!

    बशर - मानव
  • चंद तस्वीर-ऐ-बुताँ, चंद हसीनों के खतूत;<br/>
बाद मरने के मेरे घर से यह सामान निकला!
    चंद तस्वीर-ऐ-बुताँ, चंद हसीनों के खतूत;
    बाद मरने के मेरे घर से यह सामान निकला!
    ~ Mirza Ghalib
  • गलतफहमी से बढ़कर दोस्ती का दुश्मन नहीं कोई,<br/>
परिंदों को उड़ाना हो तो बस शाख़ें हिला दीजिए!
    गलतफहमी से बढ़कर दोस्ती का दुश्मन नहीं कोई,
    परिंदों को उड़ाना हो तो बस शाख़ें हिला दीजिए!
  • ये कश्मकश है ज़िंदगी की, कि कैसे बसर करें;<br/>
चादर बड़ी करें या, ख़्वाहिशे दफ़न करे!
    ये कश्मकश है ज़िंदगी की, कि कैसे बसर करें;
    चादर बड़ी करें या, ख़्वाहिशे दफ़न करे!
  • आज हर ख़ामोशी को मिटा देने का मन है;<br/>
जो भी छिपा रखा है मन में लूटा देने का मन है!
    आज हर ख़ामोशी को मिटा देने का मन है;
    जो भी छिपा रखा है मन में लूटा देने का मन है!
    ~ Gulzar
  • मयखाने से पूछा आज, इतना सन्नाटा क्यों है,<br/>
मयखाना भी मुस्कुरा के बोला, लहू का दौर है साहब, अब शराब कौन पीता है!
    मयखाने से पूछा आज, इतना सन्नाटा क्यों है,
    मयखाना भी मुस्कुरा के बोला, लहू का दौर है साहब, अब शराब कौन पीता है!
  • कभी तो कोई ख़ुशी चखा ऐ ज़िंदगी;<br/>

तुझसे किसने कह दिया के हमारा रोज़ा है!
    कभी तो कोई ख़ुशी चखा ऐ ज़िंदगी;
    तुझसे किसने कह दिया के हमारा रोज़ा है!
  • एक ही बात सीखी है रंगों से;<br/>
ग़र निखरना है तो बिखरना ज़रूरी है!
    एक ही बात सीखी है रंगों से;
    ग़र निखरना है तो बिखरना ज़रूरी है!
  • बरसो बाद आज, तेरे करीब से गुज़रे;<br/>
जो न संभलते, तो गुज़र ही जाते!
    बरसो बाद आज, तेरे करीब से गुज़रे;
    जो न संभलते, तो गुज़र ही जाते!
  • मेरे शहर में खुदाओं की कमी नहीं,<br/>

दिक्कत मुझे इंसान ढूँढने में होती है।
    मेरे शहर में खुदाओं की कमी नहीं,
    दिक्कत मुझे इंसान ढूँढने में होती है।