• लब तो खामोश रहेंगे ये वादा है तुमसे मेरा;
    अगर कह दें कुछ निगाहें तो खफा ना होना!
  • मैंने पूछा कैसे जान जाते हो मेरे दिल की बातें,<br/>

वो बोली जब रूह में बसे हो फिर ये सवाल क्यूँ।
    मैंने पूछा कैसे जान जाते हो मेरे दिल की बातें,
    वो बोली जब रूह में बसे हो फिर ये सवाल क्यूँ।
  • मै भी तलाश में हूँ किसी अपने की;<BR/>
कोई तुम सा हो लेकिन किसी और का ना हो!
    मै भी तलाश में हूँ किसी अपने की;
    कोई तुम सा हो लेकिन किसी और का ना हो!
  • बोसा-ए-रुख़्सार पर तकरार रहने दीजिए;<BR/>
लीजिए या दीजिए इंकार रहने दीजिए!
    बोसा-ए-रुख़्सार पर तकरार रहने दीजिए;
    लीजिए या दीजिए इंकार रहने दीजिए!
  • एक दूसरे से बिछड़ के हम कितने रंगीले हो गये;<br/>
मेरी आँखें लाल हो गयी और तेरे हाथ पीले हो गए!
    एक दूसरे से बिछड़ के हम कितने रंगीले हो गये;
    मेरी आँखें लाल हो गयी और तेरे हाथ पीले हो गए!
  • मेरे हम-सकूँ का यह हुक्म था के कलाम उससे मैं कम करूँ;<br/>
मेरे होंठ ऐसे सिले के फिर उसे मेरी चुप ने रुला दिया!
    मेरे हम-सकूँ का यह हुक्म था के कलाम उससे मैं कम करूँ;
    मेरे होंठ ऐसे सिले के फिर उसे मेरी चुप ने रुला दिया!
    ~ Parveen Shakir
  • तेरे बदलने के बावसफ भी तुझ को चाहा है;<br/>
यह एतराफ़ भी शामिल मेरे गुनाहों में है!
    तेरे बदलने के बावसफ भी तुझ को चाहा है;
    यह एतराफ़ भी शामिल मेरे गुनाहों में है!
    ~ Parveen Shakir
  • अपने चेहरे से जो ज़ाहिर है छुपाएँ कैसे;<br/>
तेरी मर्ज़ी के मुताबिक़ नज़र आएँ कैसे!
    अपने चेहरे से जो ज़ाहिर है छुपाएँ कैसे;
    तेरी मर्ज़ी के मुताबिक़ नज़र आएँ कैसे!
    ~ Wasim Barelvi
  • फूल की पती से कट सकता है हीरे का जिगर;<br/>
मर्दे नादाँ पर कलाम-ऐ-नरम-ऐ-नाज़ुक बेअसर!
    फूल की पती से कट सकता है हीरे का जिगर;
    मर्दे नादाँ पर कलाम-ऐ-नरम-ऐ-नाज़ुक बेअसर!
  • खुशबू की तरह आया वो तेज़ हवाओं में;<br/>
माँगा था जिसे हम ने दिन रात दुआओं में;<br/> 
तुम चाट पे नहीं आये मैं घर से नहीं निकल;<br/>
यह चाँद बहुत भटकता है सावन की घटाओं में!
    खुशबू की तरह आया वो तेज़ हवाओं में;
    माँगा था जिसे हम ने दिन रात दुआओं में;
    तुम चाट पे नहीं आये मैं घर से नहीं निकल;
    यह चाँद बहुत भटकता है सावन की घटाओं में!