• मोहब्बत रंग दे जाती है जब दिल दिल से मिलता है;<br/>
मगर मुश्किल तो ये है दिल बड़ी मुश्किल से मिलता है!
    मोहब्बत रंग दे जाती है जब दिल दिल से मिलता है;
    मगर मुश्किल तो ये है दिल बड़ी मुश्किल से मिलता है!
    ~ Jaleel Manikpuri
  • आप दौलत के तराज़ू में दिलों को तौलें;<br/>
हम मोहब्बत से मोहब्बत का सिला देते हैं!
    आप दौलत के तराज़ू में दिलों को तौलें;
    हम मोहब्बत से मोहब्बत का सिला देते हैं!
    ~ Sahir Ludhianvi
  • कुछ लोग सितम करने को तैयार बैठे हैं,<br/>
कुछ लोग हम पर दिल हार बैठे हैं;<br/>
इश्क़ को आग का दरिया ही समझ लीजिये,<br/>
कुछ इस पार तो कुछ उस पार बैठे हैं!
    कुछ लोग सितम करने को तैयार बैठे हैं,
    कुछ लोग हम पर दिल हार बैठे हैं;
    इश्क़ को आग का दरिया ही समझ लीजिये,
    कुछ इस पार तो कुछ उस पार बैठे हैं!
  • अब वही करने लगे दीदार से आगे की बात;<br/>
जो कभी कहते थे बस दीदार होना चाहिए!
    अब वही करने लगे दीदार से आगे की बात;
    जो कभी कहते थे बस दीदार होना चाहिए!
    ~ Zafar Iqbal
  • कुछ यूँ तुम इश्क़ का आगाज़ कर दो,<br/>
नज़र आयें हम तो नज़र-अंदाज़ कर दो!
    कुछ यूँ तुम इश्क़ का आगाज़ कर दो,
    नज़र आयें हम तो नज़र-अंदाज़ कर दो!
  • दिल के सागर में लहरें उठाया ना करो,<br/>
ख्वाब बनकर नींद चुराया ना करो;<br/>
बहुत चोट लगती है मेरे दिल को,<br/>
तुम ख्वाबों में आकर यूँ तडपाया ना करो!
    दिल के सागर में लहरें उठाया ना करो,
    ख्वाब बनकर नींद चुराया ना करो;
    बहुत चोट लगती है मेरे दिल को,
    तुम ख्वाबों में आकर यूँ तडपाया ना करो!
  • बदलते नहीं जज़्बात मेरे तारीखों की तरह;<br/>
बेपनाह मोहब्बत पहले भी थी और आज भी है!
    बदलते नहीं जज़्बात मेरे तारीखों की तरह;
    बेपनाह मोहब्बत पहले भी थी और आज भी है!
  • हम वक़्त रोक लेंगे तुम्हारे लिए,<br/>
तुम बेवक्त मिलना तो शुरू करो!
    हम वक़्त रोक लेंगे तुम्हारे लिए,
    तुम बेवक्त मिलना तो शुरू करो!
  • ये मोहब्बत का शहर है ज़नाब,<br/>
यहाँ सवेरा सूरज से नहीं किसी के दीदार से होता है!
    ये मोहब्बत का शहर है ज़नाब,
    यहाँ सवेरा सूरज से नहीं किसी के दीदार से होता है!
  • मैं चलता गया, रास्ते मिलते गये,<br/>
राह के काँटे फूल बनकर खिलते गये;<br/>
ये जादू नहीं, आशीर्वाद है मेरे अपनों का,<br/>
वरना उसी राह पर लाखों फिसलते गये!
    मैं चलता गया, रास्ते मिलते गये,
    राह के काँटे फूल बनकर खिलते गये;
    ये जादू नहीं, आशीर्वाद है मेरे अपनों का,
    वरना उसी राह पर लाखों फिसलते गये!