• आसाँ नहीं दरिया-ए-मोहब्बत से गुज़रना;<br/>
याँ नूह की कश्ती को भी तूफ़ान का डर है!
    आसाँ नहीं दरिया-ए-मोहब्बत से गुज़रना;
    याँ नूह की कश्ती को भी तूफ़ान का डर है!
  • खुदा से मिलती है सूरत मेरे महबूब की;<br/>
अपनी तो मोहब्बत भी हो जाती है और इबादत भी!
    खुदा से मिलती है सूरत मेरे महबूब की;
    अपनी तो मोहब्बत भी हो जाती है और इबादत भी!
  • तुम चाहो तो ले लो मेरी रूह की तलाशी;<br/>
यकीन मानो, कुछ भी नहीं बचा मुझमे तुम्हारी मोहब्बत के सिवा!
    तुम चाहो तो ले लो मेरी रूह की तलाशी;
    यकीन मानो, कुछ भी नहीं बचा मुझमे तुम्हारी मोहब्बत के सिवा!
  • फिरते है मीर अब कहाँ, कोई पूछता नहीं;<br/>
इस आशिक़ी में इज़्ज़त सादात भी गयी!
    फिरते है मीर अब कहाँ, कोई पूछता नहीं;
    इस आशिक़ी में इज़्ज़त सादात भी गयी!
    ~ Mir Taqi Mir
  • जख्म ऐ दिल पर हाथ रखकर मुस्कुराना भी इश्क है;<br/>
याद रखना `याद` करना और `याद` आना भी इश्क है!
    जख्म ऐ दिल पर हाथ रखकर मुस्कुराना भी इश्क है;
    याद रखना "याद" करना और "याद" आना भी इश्क है!
  • तेरे साथ का मतलब जो भी हो;<br/>
तेरे बाद का मतलब कुछ भी नहीं!
    तेरे साथ का मतलब जो भी हो;
    तेरे बाद का मतलब कुछ भी नहीं!
  • यह मेरा इश्क़ था या फिर दीवानगी की इन्तहा,<br/> 
कि तेरे ही करीब से गुज़र गए तेरे ही ख्याल में!
    यह मेरा इश्क़ था या फिर दीवानगी की इन्तहा,
    कि तेरे ही करीब से गुज़र गए तेरे ही ख्याल में!
  • शायरी उसी के लबों पर सजती है साहिब;<br/>

जिसकी आँखों में इश्क रोता हो!
    शायरी उसी के लबों पर सजती है साहिब;
    जिसकी आँखों में इश्क रोता हो!
  • तेरा ज़िक्र मेरी हर बात मैं है;<br/>
तुम पास नहीं पर साथ में है;<br/>
मैं तुझसे बिछड़ कर जाऊं कहाँ;<br/>
तेरा इश्क़ तो मेरी जात में है!
    तेरा ज़िक्र मेरी हर बात मैं है;
    तुम पास नहीं पर साथ में है;
    मैं तुझसे बिछड़ कर जाऊं कहाँ;
    तेरा इश्क़ तो मेरी जात में है!
  • मुहब्बत का खुमार उतरा तो तब साबित हुआ;<br/>
वो जो मंज़िल का रास्ता था, बे-मकसद सफर निकला!
    मुहब्बत का खुमार उतरा तो तब साबित हुआ;
    वो जो मंज़िल का रास्ता था, बे-मकसद सफर निकला!