• तेरा ज़िक्र मेरी हर बात मैं है;<br/>
तुम पास नहीं पर साथ में है;<br/>
मैं तुझसे बिछड़ कर जाऊं कहाँ;<br/>
तेरा इश्क़ तो मेरी जात में है!
    तेरा ज़िक्र मेरी हर बात मैं है;
    तुम पास नहीं पर साथ में है;
    मैं तुझसे बिछड़ कर जाऊं कहाँ;
    तेरा इश्क़ तो मेरी जात में है!
  • मुहब्बत का खुमार उतरा तो तब साबित हुआ;<br/>
वो जो मंज़िल का रास्ता था, बे-मकसद सफर निकला!
    मुहब्बत का खुमार उतरा तो तब साबित हुआ;
    वो जो मंज़िल का रास्ता था, बे-मकसद सफर निकला!
  • मेह वो क्यों बहुत पीते बज़्म-ऐ-ग़ैर में या रब;<br/>
आज ही हुआ मंज़ूर उन को इम्तिहान अपना;<br/>
मँज़र इक बुलंदी पर और हम बना सकते `ग़ालिब`;<br/>
अर्श से इधर होता काश के माकन अपना!
    मेह वो क्यों बहुत पीते बज़्म-ऐ-ग़ैर में या रब;
    आज ही हुआ मंज़ूर उन को इम्तिहान अपना;
    मँज़र इक बुलंदी पर और हम बना सकते `ग़ालिब`;
    अर्श से इधर होता काश के माकन अपना!
    ~ Mir Taqi Mir
  • तुम चाहो तो ले लो मेरी रूह की तलाशी;<br/>
यकीन मानो, कुछ भी नहीं बचा मुझमे तुम्हारी मोहब्बत के सिवा!
    तुम चाहो तो ले लो मेरी रूह की तलाशी;
    यकीन मानो, कुछ भी नहीं बचा मुझमे तुम्हारी मोहब्बत के सिवा!
  • फिरते है मीर अब कहाँ ,कोई पूछता नहीं;<br/>
इस आशिक़ी में इज़्ज़त सादात भी गयी
    फिरते है मीर अब कहाँ ,कोई पूछता नहीं;
    इस आशिक़ी में इज़्ज़त सादात भी गयी
    ~ Mir Taqi Mir
  • ये शायरीयाँ कुछ और नहीं बेइंतहा इश्क है;<br/>
तड़प उनकी उठती है और `दर्द` लफ्जों में उतर आता है!
    ये शायरीयाँ कुछ और नहीं बेइंतहा इश्क है;
    तड़प उनकी उठती है और "दर्द" लफ्जों में उतर आता है!
  • तेरे साथ का मतलब जो भी हो;<br/>
तेरे बाद का मतलब कुछ भी नहीं!
    तेरे साथ का मतलब जो भी हो;
    तेरे बाद का मतलब कुछ भी नहीं!
  • पूरा दुःख और आधा चाँद हिजर की शब और ऐसा चाँद,<br/>
इतने घने बादल के पीछे कितना तनहा होगा चाँद;<br/>
मेरी करवट पर जाग उठे नींद का कितना कच्चा चाँद,<br/>
सेहरा सेहरा भटक रहा है अपने इश्क़ में सच्चा चाँद!
    पूरा दुःख और आधा चाँद हिजर की शब और ऐसा चाँद,
    इतने घने बादल के पीछे कितना तनहा होगा चाँद;
    मेरी करवट पर जाग उठे नींद का कितना कच्चा चाँद,
    सेहरा सेहरा भटक रहा है अपने इश्क़ में सच्चा चाँद!
    ~ Parveen Shakir
  • एक मुट्ठी इश्क़ बिखेर दो इस ज़मीन पे;<br/>
बारिश का मौसम है शायद मोहब्बत पनप जाए।
    एक मुट्ठी इश्क़ बिखेर दो इस ज़मीन पे;
    बारिश का मौसम है शायद मोहब्बत पनप जाए।
  • एक मुट्ठी इश्क़ बिखेर दो इस ज़मीन पे;<br/>
बारिश का मौसम है शायद मोहब्बत पनप जाए।
    एक मुट्ठी इश्क़ बिखेर दो इस ज़मीन पे;
    बारिश का मौसम है शायद मोहब्बत पनप जाए।