• वज़ाहत इसकी पूछोगे तो फिर लाज़िम है उलझोगे;<br/>
ये अक्सर बे-वजह होता है जिसको इश्क़ कहते हैं!Upload to Facebook
    वज़ाहत इसकी पूछोगे तो फिर लाज़िम है उलझोगे;
    ये अक्सर बे-वजह होता है जिसको इश्क़ कहते हैं!
  • इश्क मुहब्बत तो सब करते हैं,<br/>
गम-ऐ-जुदाई से सब डरते हैं,<br/>
हम तो न इश्क करते हैं न मुहब्बत,<br/>
हम तो बस आपकी एक मुस्कुराहट पाने के लिए तरसते हैं!Upload to Facebook
    इश्क मुहब्बत तो सब करते हैं,
    गम-ऐ-जुदाई से सब डरते हैं,
    हम तो न इश्क करते हैं न मुहब्बत,
    हम तो बस आपकी एक मुस्कुराहट पाने के लिए तरसते हैं!
  • शब्दों को होठों पर रखकर दिल के भेद ना खोलो;<br/>
आंखें मेरी सुन लेंगी बस तुम आँखों से बोलो!Upload to Facebook
    शब्दों को होठों पर रखकर दिल के भेद ना खोलो;
    आंखें मेरी सुन लेंगी बस तुम आँखों से बोलो!
  • इतना बेताब न हो मुझसे बिछड़ने के लिए;
    तुझे आँखों से नहीं मेरे दिल से जुदा होना है।
  • धनक धनक मेरी पोरों के ख़्वाब कर देगा;<br/>
वो लम्स मेरे बदन को गुलाब कर देगा!<br/><br/>

धनक: इन्द्रधनुष<br/>
लम्स: स्पर्शUpload to Facebook
    धनक धनक मेरी पोरों के ख़्वाब कर देगा;
    वो लम्स मेरे बदन को गुलाब कर देगा!

    धनक: इन्द्रधनुष
    लम्स: स्पर्श
    ~ Parveen Shakir
  • मोहबबत में नहीं है फ़र्क जी ने और मरने का;<br/>
उसी को देख कर जीते हैं जिस क़ाफ़िर पे दम निकले!Upload to Facebook
    मोहबबत में नहीं है फ़र्क जी ने और मरने का;
    उसी को देख कर जीते हैं जिस क़ाफ़िर पे दम निकले!
    ~ Mirza Ghalib
  • अब तो मुझे अपनी आँखों से भी जलन होती है `ऐ ज़ालिम`;<br/>
खुली हो तो तलाश तेरी और बन्द हो तो ख्वाब तेरे!Upload to Facebook
    अब तो मुझे अपनी आँखों से भी जलन होती है "ऐ ज़ालिम";
    खुली हो तो तलाश तेरी और बन्द हो तो ख्वाब तेरे!
  • मोहब्बत के लिए कुछ ख़ास दिल मख़्सूस होते हैं;<br/>
ये वो नग़्मा है जो हर साज़ पर गाया नहीं जाता!Upload to Facebook
    मोहब्बत के लिए कुछ ख़ास दिल मख़्सूस होते हैं;
    ये वो नग़्मा है जो हर साज़ पर गाया नहीं जाता!
    ~ Makhmoor Dehlvi
  • आखिरी हिचकी तिरे ज़ानू पे आये;<br/>
मौत भी मैं शायराना चाहता हूँ!Upload to Facebook
    आखिरी हिचकी तिरे ज़ानू पे आये;
    मौत भी मैं शायराना चाहता हूँ!
    ~ Qateel Shifai
  • इश्क पर ज़ोर नहीं है ये वो आतिश 'ग़ालिब';<br/>
जो लगाये न लगे और बुझाये न बने!
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    इश्क पर ज़ोर नहीं है ये वो आतिश 'ग़ालिब';
    जो लगाये न लगे और बुझाये न बने!
    ~ Mirza Ghalib