• आँखों मे आ जाते है आँसू;<br/>
फिर भी लबों पे हँसी रखनी पड़ती है;<br/>
ये मोहब्बत भी क्या चीज़ है यारो;<br/>
जिस से करते हैं उसी से छुपानी पड़ती है।Upload to Facebook
    आँखों मे आ जाते है आँसू;
    फिर भी लबों पे हँसी रखनी पड़ती है;
    ये मोहब्बत भी क्या चीज़ है यारो;
    जिस से करते हैं उसी से छुपानी पड़ती है।
  • न हम कुछ कह पाते हैं, न वो कुछ कह पाते हैं;
    एक दूसरे को देखकर गुजर जाया करते हैं;
    कब तक चलता रहेगा ये सिलसिला;
    ये सोचकर दिन गुजर जाया करते हैं।
  • शायर तो हम है शायरी बना देंगे;<br/>
आपको शायरी मे क़ैद कर लेंगे;<br/>
कभी सुनाओ हमें अपनी आवाज़;<br/>
आपकी आवाज़ को हम ग़ज़ल बना देंगे।Upload to Facebook
    शायर तो हम है शायरी बना देंगे;
    आपको शायरी मे क़ैद कर लेंगे;
    कभी सुनाओ हमें अपनी आवाज़;
    आपकी आवाज़ को हम ग़ज़ल बना देंगे।
  • कब तक होश संभाले कोई, होश उड़े तो उड़ जाने दो;
    दिल कब सीधी राह चला है, राह मुड़े तो मुड़ जाने दो।
  • नक़ाब क्या छुपाएगा शबाब-ए-हुस्न को;<br/>
निगाह-ए-इश्क तो पत्थर भी चीर देती है।Upload to Facebook
    नक़ाब क्या छुपाएगा शबाब-ए-हुस्न को;
    निगाह-ए-इश्क तो पत्थर भी चीर देती है।
  • मोहब्बत एक नाम है दर्द और ख़ुशी की कहानी का;
    मोहब्बत एक नाम है हर पल मुस्कुराने का;
    ये कोई लम्हा दो लम्हों की पहचान नहीं है;
    मोहब्बत एक नाम है हर पल साथ निभाने का।
  • होठों पर मोहब्बत के फ़साने नहीं आते;
    साहिल पर समंदर के खजाने नहीं आते;
    पलकें भी चमक उठती हैं सोते हुए हमारी;
    आँखों को अभी ख्वाब छुपाने नहीं आते।
    ~ Bashir Badr
  • फ़िज़ा को महकाती शाम हो तुम;<br/>
प्यार में छलकता जाम हो तुम;<br/>
तुम्हें दिल में छुपाये फिरते हैं;<br/>
मेरी ज़िंदगी का दूसरा नाम हो तुम।Upload to Facebook
    फ़िज़ा को महकाती शाम हो तुम;
    प्यार में छलकता जाम हो तुम;
    तुम्हें दिल में छुपाये फिरते हैं;
    मेरी ज़िंदगी का दूसरा नाम हो तुम।
  • मैंने अपनी हर एक सांस तुम्हारी गुलाम कर रखी है;<br/>
लोगों में ये ज़िन्दगी बदनाम कर रखी है;<br/>
अब ये आइना भी क्या काम का मेरे;<br/>
मैंने तो अपनी परछाई भी तुम्हारे नाम कर रखी है।Upload to Facebook
    मैंने अपनी हर एक सांस तुम्हारी गुलाम कर रखी है;
    लोगों में ये ज़िन्दगी बदनाम कर रखी है;
    अब ये आइना भी क्या काम का मेरे;
    मैंने तो अपनी परछाई भी तुम्हारे नाम कर रखी है।
  • यूँ ही तो नहीं दिल मेरा तुझे तलाशता फिरता;
    कर यकीन मंज़िल का तू ही है किनारा मेरा;
    यूँ ही तो नहीं आयी सदा तेरी हवाओं में बह कर;
    हौले से तूने ही होगा नाम पुकारा मेरा।