• शब्दों को होठों पर रखकर दिल के भेद ना खोलो;<br/>
आंखें मेरी सुन लेंगी बस तुम आँखों से बोलो!
    शब्दों को होठों पर रखकर दिल के भेद ना खोलो;
    आंखें मेरी सुन लेंगी बस तुम आँखों से बोलो!
  • इतना बेताब न हो मुझसे बिछड़ने के लिए;
    तुझे आँखों से नहीं मेरे दिल से जुदा होना है।
  • धनक धनक मेरी पोरों के ख़्वाब कर देगा;<br/>
वो लम्स मेरे बदन को गुलाब कर देगा!<br/><br/>

धनक: इन्द्रधनुष<br/>
लम्स: स्पर्श
    धनक धनक मेरी पोरों के ख़्वाब कर देगा;
    वो लम्स मेरे बदन को गुलाब कर देगा!

    धनक: इन्द्रधनुष
    लम्स: स्पर्श
    ~ Parveen Shakir
  • मोहबबत में नहीं है फ़र्क जी ने और मरने का;<br/>
उसी को देख कर जीते हैं जिस क़ाफ़िर पे दम निकले!
    मोहबबत में नहीं है फ़र्क जी ने और मरने का;
    उसी को देख कर जीते हैं जिस क़ाफ़िर पे दम निकले!
    ~ Mirza Ghalib
  • अब तो मुझे अपनी आँखों से भी जलन होती है `ऐ ज़ालिम`;<br/>
खुली हो तो तलाश तेरी और बन्द हो तो ख्वाब तेरे!
    अब तो मुझे अपनी आँखों से भी जलन होती है "ऐ ज़ालिम";
    खुली हो तो तलाश तेरी और बन्द हो तो ख्वाब तेरे!
  • मोहब्बत के लिए कुछ ख़ास दिल मख़्सूस होते हैं;<br/>
ये वो नग़्मा है जो हर साज़ पर गाया नहीं जाता!
    मोहब्बत के लिए कुछ ख़ास दिल मख़्सूस होते हैं;
    ये वो नग़्मा है जो हर साज़ पर गाया नहीं जाता!
    ~ Makhmoor Dehlvi
  • आखिरी हिचकी तिरे ज़ानू पे आये;<br/>
मौत भी मैं शायराना चाहता हूँ!
    आखिरी हिचकी तिरे ज़ानू पे आये;
    मौत भी मैं शायराना चाहता हूँ!
    ~ Qateel Shifai
  • इश्क पर ज़ोर नहीं है ये वो आतिश 'ग़ालिब';<br/>
जो लगाये न लगे और बुझाये न बने!
    इश्क पर ज़ोर नहीं है ये वो आतिश 'ग़ालिब';
    जो लगाये न लगे और बुझाये न बने!
    ~ Mirza Ghalib
  • इन होठों को परदे में छुपा लिया कीजिये;<br/>
हम गुस्ताख़ लोग हैं, आँखों से चूम लिया करते हैं!
    इन होठों को परदे में छुपा लिया कीजिये;
    हम गुस्ताख़ लोग हैं, आँखों से चूम लिया करते हैं!
  • न ग़रज़ किसी से, न वास्ता, मुझे काम अपने ही काम से;<br/>
तिरे ज़िक्र से, तिरी फ़िक्र से, तिरी याद से तिरे नाम!
    न ग़रज़ किसी से, न वास्ता, मुझे काम अपने ही काम से;
    तिरे ज़िक्र से, तिरी फ़िक्र से, तिरी याद से तिरे नाम!