• मैंने अपनी हर एक सांस तुम्हारी गुलाम कर रखी है;<br/>
लोगों में ये ज़िन्दगी बदनाम कर रखी है;<br/>
अब ये आइना भी क्या काम का मेरे;<br/>
मैंने तो अपनी परछाई भी तुम्हारे नाम कर रखी है।Upload to Facebook
    मैंने अपनी हर एक सांस तुम्हारी गुलाम कर रखी है;
    लोगों में ये ज़िन्दगी बदनाम कर रखी है;
    अब ये आइना भी क्या काम का मेरे;
    मैंने तो अपनी परछाई भी तुम्हारे नाम कर रखी है।
  • यूँ ही तो नहीं दिल मेरा तुझे तलाशता फिरता;
    कर यकीन मंज़िल का तू ही है किनारा मेरा;
    यूँ ही तो नहीं आयी सदा तेरी हवाओं में बह कर;
    हौले से तूने ही होगा नाम पुकारा मेरा।
  • अरे आप क्यों नहीं समझते हो सनम;
    दिल का दर्द दबता नहीं है दबाने से;
    आपको मोहब्बत का इज़हार करना ही पड़ेगा;
    क्योंकि मोहब्बत छुपती नहीं छुपाने से।
  • वो बात क्या करूँ जिसकी खबर ही न हो;
    वो दुआ क्या करूँ जिसमे असर ही न हो;
    कैसे कह दूँ आपको लग जाये मेरी भी उम्र;
    क्या पता अगले पल मेरी उम्र ही न हो।
  • छुपा लूंगा तुझे इस तरह से मेरी बाहों में;
    हवा भी गुज़रने के लिए इज़ाज़त मांगे;
    हो जाऊं तेरे इश्क़ में मदहोश इस तरह;
    कि होश भी वापस आने के इज़ाज़त मांगे।
  • उधर ज़ुल्फ़ों में कंघी लग रही है और ख़म निकलता है;
    इधर रग-रग से खिंच-खिंच के हमारा दम निकलता है;
    इलाही ख़ैर कर उलझन पे उलझन पड़ती जाती है;
    ना उनका ख़म निकलता है ना अपना दम निकलता है।

    ख़म - उलझन
  • इश्क़ नाज़ुक मिजाज़ है बे-हद;
    अक्ल का बोझ उठा नहीं सकता।
  • तू ही बता ए दिल तुम्हें समझाऊं कैसे;<br/>
जिसे चाहता है तू उसे नज़दीक लाऊँ कैसे;<br/>
यूँ तो हर तमन्ना हर एहसास है वो मेरा;<br/>
मगर उस एहसास को ये एहसास दिलाऊं कैसे।Upload to Facebook
    तू ही बता ए दिल तुम्हें समझाऊं कैसे;
    जिसे चाहता है तू उसे नज़दीक लाऊँ कैसे;
    यूँ तो हर तमन्ना हर एहसास है वो मेरा;
    मगर उस एहसास को ये एहसास दिलाऊं कैसे।
  • क्या ज़रूरी है कि हम हार के जीतें 'तबिश';
    इश्क़ का खेल बराबर भी तो हो सकता है!
    ~ Abbas Tabish
  • कभी लफ्ज़ भूल जाऊं, कभी बात भूल जाऊं;<br/>
तूझे इस क़द्र चाहूँ के अपनी ज़ात भूल जाऊं;<br/>
उठ के तेरे पास से जो में चल दूँ;<br/>
जाते हुए खुद को तेरे पास भूल जाऊं!Upload to Facebook
    कभी लफ्ज़ भूल जाऊं, कभी बात भूल जाऊं;
    तूझे इस क़द्र चाहूँ के अपनी ज़ात भूल जाऊं;
    उठ के तेरे पास से जो में चल दूँ;
    जाते हुए खुद को तेरे पास भूल जाऊं!