• तू कहीं हो दिल-ए-दीवाना वहाँ पहुँचेगा;
    शमा होगी जहाँ परवाना वहाँ पहुँचेगा।
    ~ Bahadur Shah Zafar
  • ये चांदनी रात बड़ी देर के बाद आयी;<br/>
ये हसीं मुलाक़ात बड़ी देर के बाद आयी;<br/>
आज आये हैं वो मिलने को बड़ी देर के बाद;<br/>
आज की ये रात बड़ी देर के बाद आयी।
    ये चांदनी रात बड़ी देर के बाद आयी;
    ये हसीं मुलाक़ात बड़ी देर के बाद आयी;
    आज आये हैं वो मिलने को बड़ी देर के बाद;
    आज की ये रात बड़ी देर के बाद आयी।
  • ऐसा क्या कह दूं कि तेरे दिल को छू जाए;<br/>
ऐसी किससे दुआ मांगू कि तू मेरी हो जाए;<br/>
तुझे पाना नहीं तेरा हो जाना है मन्नत मेरी;<br/>
ऐसा क्या कर दूं कि ये मन्नत पूरी हो जाए।
    ऐसा क्या कह दूं कि तेरे दिल को छू जाए;
    ऐसी किससे दुआ मांगू कि तू मेरी हो जाए;
    तुझे पाना नहीं तेरा हो जाना है मन्नत मेरी;
    ऐसा क्या कर दूं कि ये मन्नत पूरी हो जाए।
  • तू होश में थी फिर भी हमें पहचान न पायी;<br/>
एक हम है कि पी कर भी तेरा नाम लेते रहे।
    तू होश में थी फिर भी हमें पहचान न पायी;
    एक हम है कि पी कर भी तेरा नाम लेते रहे।
  • हम कुछ ऐसे तेरे दीदार में खो जाते हैं;
    जैसे बच्चे भरे बाज़ार में खो जाते हैं।
    ~ Munawwar Rana
  • आपके बिन टूटकर बिखर जायेंगे;
    मिल जायेंगे आप तो गुलशन की तरह हम खिल जायेंगे;
    अगर न मिले आप तो जीते जी मर जायेंगे;
    पा लिया जो आपको तो मर कर भी जी जायेंगे।
  • तेरी आवाज़ की शहनाइयों से प्यार करते हैं;<br/>
तस्सवुर मैं तेरे तन्हाइयों से प्यार करते हैं;<br/>
जो मेरे नाम से तेरे नाम को जोड़े ज़माने वाले;<br/>
उन चर्चों से अब हम प्यार करते हैं।
    तेरी आवाज़ की शहनाइयों से प्यार करते हैं;
    तस्सवुर मैं तेरे तन्हाइयों से प्यार करते हैं;
    जो मेरे नाम से तेरे नाम को जोड़े ज़माने वाले;
    उन चर्चों से अब हम प्यार करते हैं।
  • कोई तीर जैसे जिगर के पार हुआ है;<br/>
जाने क्यों दिल इतना बेक़रार हुआ है;<br/>
पहले कभी देखा न मैंने तुम्हें;<br/>
फिर भी क्यों ऐ अजनबी इस कदर तुमसे प्यार हुआ है।
    कोई तीर जैसे जिगर के पार हुआ है;
    जाने क्यों दिल इतना बेक़रार हुआ है;
    पहले कभी देखा न मैंने तुम्हें;
    फिर भी क्यों ऐ अजनबी इस कदर तुमसे प्यार हुआ है।
  • आँखें मुझे तलवे से मलने नहीं देते;
    अरमान मेरे दिल के निकलने नहीं देते;
    खातिर से तेरी याद को टलने नहीं देते;
    सच है कि हमीं दिल को संभलने नहीं दते;
    किसी नाज़ से कहते हैं झुंझला के शब-ए-वस्ल;
    तुम तो हमें करवट भी बदलने नहीं देते।
    ~ Akbar Allahabadi
  • वो लाख तुझे पूजती होगी मगर तू खुश न हो ऐ खुदा;
    वो मंदिर भी जाती है तो मेरी गली से गुजरने के लिए!