• तपिश से बच के घटाओं में बैठ जाते हैं;
    गए हुए कि सदाओं में बैठ जाते हैं;
    हम इर्द-गिर्द के मौसम से घबरायें;
    तेरे ख्यालों की छाओं में बैठ जाते हैं।
    ~ Farhat Abbas Shah
  • हम जानते तो इश्क़ न करते किसी के साथ;
    ले जाते दिल को ख़ाक में इस आरज़ू के साथ।
    ~ Mir Taqi Mir
  • इश्क़ का शुक्रिया कुछ इस तरह अदा करूँ;<br/>
आप भूल भी जाओ तो मैं हर पल याद करूँ;<br/>
इस इश्क़ ने बस इतना सिखाया है मुझे;<br/>
कि खुद से पहले आपके लिए दुआ करूँ।
    इश्क़ का शुक्रिया कुछ इस तरह अदा करूँ;
    आप भूल भी जाओ तो मैं हर पल याद करूँ;
    इस इश्क़ ने बस इतना सिखाया है मुझे;
    कि खुद से पहले आपके लिए दुआ करूँ।
  • मुझे भी अब नींद की तलब नहीं;
    अब रातों को जागना अच्छा लगता है;
    पता नहीं वो मेरी तकदीर में है कि नहीं;
    पर उसे खुदा से माँगना अच्छा लगता है।
  • यूँ तो तमन्ना दिल में ना थी लेकिन;<br/>
ना जाने तुझे देखकर क्यों आशिक बन बैठे;<br/>
बंदगी तो खुदा की भी करते थे लेकिन;<br/>
ना जाने क्यों हम काफ़िर बन बैठे।
    यूँ तो तमन्ना दिल में ना थी लेकिन;
    ना जाने तुझे देखकर क्यों आशिक बन बैठे;
    बंदगी तो खुदा की भी करते थे लेकिन;
    ना जाने क्यों हम काफ़िर बन बैठे।
  • तू कहीं हो दिल-ए-दीवाना वहाँ पहुँचेगा;
    शमा होगी जहाँ परवाना वहाँ पहुँचेगा।
    ~ Bahadur Shah Zafar
  • ये चांदनी रात बड़ी देर के बाद आयी;<br/>
ये हसीं मुलाक़ात बड़ी देर के बाद आयी;<br/>
आज आये हैं वो मिलने को बड़ी देर के बाद;<br/>
आज की ये रात बड़ी देर के बाद आयी।
    ये चांदनी रात बड़ी देर के बाद आयी;
    ये हसीं मुलाक़ात बड़ी देर के बाद आयी;
    आज आये हैं वो मिलने को बड़ी देर के बाद;
    आज की ये रात बड़ी देर के बाद आयी।
  • ऐसा क्या कह दूं कि तेरे दिल को छू जाए;<br/>
ऐसी किससे दुआ मांगू कि तू मेरी हो जाए;<br/>
तुझे पाना नहीं तेरा हो जाना है मन्नत मेरी;<br/>
ऐसा क्या कर दूं कि ये मन्नत पूरी हो जाए।
    ऐसा क्या कह दूं कि तेरे दिल को छू जाए;
    ऐसी किससे दुआ मांगू कि तू मेरी हो जाए;
    तुझे पाना नहीं तेरा हो जाना है मन्नत मेरी;
    ऐसा क्या कर दूं कि ये मन्नत पूरी हो जाए।
  • तू होश में थी फिर भी हमें पहचान न पायी;<br/>
एक हम है कि पी कर भी तेरा नाम लेते रहे।
    तू होश में थी फिर भी हमें पहचान न पायी;
    एक हम है कि पी कर भी तेरा नाम लेते रहे।
  • हम कुछ ऐसे तेरे दीदार में खो जाते हैं;
    जैसे बच्चे भरे बाज़ार में खो जाते हैं।
    ~ Munawwar Rana