• तू होश में थी फिर भी हमें पहचान न पायी;<br/>
एक हम है कि पी कर भी तेरा नाम लेते रहे।
    तू होश में थी फिर भी हमें पहचान न पायी;
    एक हम है कि पी कर भी तेरा नाम लेते रहे।
  • हम कुछ ऐसे तेरे दीदार में खो जाते हैं;
    जैसे बच्चे भरे बाज़ार में खो जाते हैं।
    ~ Munawwar Rana
  • आपके बिन टूटकर बिखर जायेंगे;
    मिल जायेंगे आप तो गुलशन की तरह हम खिल जायेंगे;
    अगर न मिले आप तो जीते जी मर जायेंगे;
    पा लिया जो आपको तो मर कर भी जी जायेंगे।
  • तेरी आवाज़ की शहनाइयों से प्यार करते हैं;<br/>
तस्सवुर मैं तेरे तन्हाइयों से प्यार करते हैं;<br/>
जो मेरे नाम से तेरे नाम को जोड़े ज़माने वाले;<br/>
उन चर्चों से अब हम प्यार करते हैं।
    तेरी आवाज़ की शहनाइयों से प्यार करते हैं;
    तस्सवुर मैं तेरे तन्हाइयों से प्यार करते हैं;
    जो मेरे नाम से तेरे नाम को जोड़े ज़माने वाले;
    उन चर्चों से अब हम प्यार करते हैं।
  • कोई तीर जैसे जिगर के पार हुआ है;<br/>
जाने क्यों दिल इतना बेक़रार हुआ है;<br/>
पहले कभी देखा न मैंने तुम्हें;<br/>
फिर भी क्यों ऐ अजनबी इस कदर तुमसे प्यार हुआ है।
    कोई तीर जैसे जिगर के पार हुआ है;
    जाने क्यों दिल इतना बेक़रार हुआ है;
    पहले कभी देखा न मैंने तुम्हें;
    फिर भी क्यों ऐ अजनबी इस कदर तुमसे प्यार हुआ है।
  • आँखें मुझे तलवे से मलने नहीं देते;
    अरमान मेरे दिल के निकलने नहीं देते;
    खातिर से तेरी याद को टलने नहीं देते;
    सच है कि हमीं दिल को संभलने नहीं दते;
    किसी नाज़ से कहते हैं झुंझला के शब-ए-वस्ल;
    तुम तो हमें करवट भी बदलने नहीं देते।
    ~ Akbar Allahabadi
  • वो लाख तुझे पूजती होगी मगर तू खुश न हो ऐ खुदा;
    वो मंदिर भी जाती है तो मेरी गली से गुजरने के लिए!
  • मैंने अपनी हर एक सांस तुम्हारी गुलाम कर रखी है;
    लोगो में ये ज़िन्दगी बदनाम कर रखी है;
    अब ये आइना भी किस काम का मेरे;
    मैंने तो अपनी परछाई भी तुम्हारे नाम कर रखी है।
  • सपनों की दुनिया में हम खोते चले गए;
    मदहोश न थे पर मदहोश होते चले गए;
    ना जाने क्या बात थी उस चेहरे में;
    ना चाहते हुए भी उसके होते चले गए।
  • आरज़ू वस्ल की रखती है परेशाँ क्या क्या;
    क्या बताऊँ कि मिरे दिल में हैं अरमाँ क्या क्या;
    ग़म अज़ीज़ों का हसीनों की जुदाई देखी;
    देखें दिखलाए अभी गर्दिश-ए-दौराँ क्या क्या।
    ~ Akhtar Sheerani