• कसूर ना उनका था ना हमारा;<br/>
हम दोनों ही रिश्तों की रसम निभाते रहे;<br/>
वो दोस्ती का एहसास जताते रहे;<br/>
और हम मोहब्बत को दिल में छुपाते रहे​।Upload to Facebook
    कसूर ना उनका था ना हमारा;
    हम दोनों ही रिश्तों की रसम निभाते रहे;
    वो दोस्ती का एहसास जताते रहे;
    और हम मोहब्बत को दिल में छुपाते रहे​।
  • वो खुदा था मेरा अब मेरा ईमान है; ​​
    चला गया छोड़ कर, इसलिए दिल उदास है;
    बेवफा नही कहूंगा ​मैं उसको;
    क्यूंकी इश्क़ करना उसका मुझ पर अहसान है।
  • प्यार में कोई तो दिल तोड़ देता है;
    दोस्ती मेँ कोई तो भरोसा तोड़ देता है;
    जिंदगी जीना तो कोई गुलाब से सीखे;
    जो खुद टूट कर दो दिलों को जोड़ देता है।
  • कैसा सितम है आपका यह कि रोने भी नहीं देता;<br/>
करीब आते नहीं और खुद से जुदा होने भी नहीं देता।Upload to Facebook
    कैसा सितम है आपका यह कि रोने भी नहीं देता;
    करीब आते नहीं और खुद से जुदा होने भी नहीं देता।
  • जिस तरह रगों में खून रहता है;
    इस तरह तेरी चाहत का जुनून रहता है;
    ज़िंदगी की हर ख़ुशी मंसूब है तुमसे;
    बात हो तुमसे तो दिल को सुकून रहता है।
  • अब भी आता है तेरा नाम मेरे नाम के साथ;<br/>
लोग जल जल कर ख़ाक हुए जाते हैं;<br/>
उड़ता है दिल से जैसे धुआँ;<br/>
बस वो छूने से ही राख हुए जाते है।Upload to Facebook
    अब भी आता है तेरा नाम मेरे नाम के साथ;
    लोग जल जल कर ख़ाक हुए जाते हैं;
    उड़ता है दिल से जैसे धुआँ;
    बस वो छूने से ही राख हुए जाते है।
  • हाँ! मुझे रस्म-ए-मोहब्बत का सलीक़ा ही नहीं;<br/>
जा! किसी और का होने की इजाज़त है तुझे।Upload to Facebook
    हाँ! मुझे रस्म-ए-मोहब्बत का सलीक़ा ही नहीं;
    जा! किसी और का होने की इजाज़त है तुझे।
  • तलब करे तो मैं अपनी आँखें भी उन्हें देदू;
    मगर ये लोग मेरी आँखों के ख्वाब मांगते हैं।
  • बड़ी मुद्दत से चाहा है तुम्हे;<br/>
बड़ी दुआओ से पाया है तुम्हे;<br/>
तुझे भुलाने का सोचूं भी कैसे;<br/>
किस्मत की लकीरों से चुराया है तुम्हें।​Upload to Facebook
    बड़ी मुद्दत से चाहा है तुम्हे;
    बड़ी दुआओ से पाया है तुम्हे;
    तुझे भुलाने का सोचूं भी कैसे;
    किस्मत की लकीरों से चुराया है तुम्हें।​
  • यह रात इतनी तन्हा क्यों होती है;
    किस्मत से अपनी सबको शिकायत क्यों होती है;
    अजीब खेल खेलती है ये किस्मत भी;
    जिसे पा नहीं सकते उसी से मोहब्बत क्यों होती है।