• मोहब्बत एक नाम है दर्द और ख़ुशी की कहानी का;
    मोहब्बत एक नाम है हर पल मुस्कुराने का;
    ये कोई लम्हा दो लम्हों की पहचान नहीं है;
    मोहब्बत एक नाम है हर पल साथ निभाने का।
  • होठों पर मोहब्बत के फ़साने नहीं आते;
    साहिल पर समंदर के खजाने नहीं आते;
    पलकें भी चमक उठती हैं सोते हुए हमारी;
    आँखों को अभी ख्वाब छुपाने नहीं आते।
    ~ Bashir Badr
  • फ़िज़ा को महकाती शाम हो तुम;<br/>
प्यार में छलकता जाम हो तुम;<br/>
तुम्हें दिल में छुपाये फिरते हैं;<br/>
मेरी ज़िंदगी का दूसरा नाम हो तुम।
    फ़िज़ा को महकाती शाम हो तुम;
    प्यार में छलकता जाम हो तुम;
    तुम्हें दिल में छुपाये फिरते हैं;
    मेरी ज़िंदगी का दूसरा नाम हो तुम।
  • मैंने अपनी हर एक सांस तुम्हारी गुलाम कर रखी है;<br/>
लोगों में ये ज़िन्दगी बदनाम कर रखी है;<br/>
अब ये आइना भी क्या काम का मेरे;<br/>
मैंने तो अपनी परछाई भी तुम्हारे नाम कर रखी है।
    मैंने अपनी हर एक सांस तुम्हारी गुलाम कर रखी है;
    लोगों में ये ज़िन्दगी बदनाम कर रखी है;
    अब ये आइना भी क्या काम का मेरे;
    मैंने तो अपनी परछाई भी तुम्हारे नाम कर रखी है।
  • यूँ ही तो नहीं दिल मेरा तुझे तलाशता फिरता;
    कर यकीन मंज़िल का तू ही है किनारा मेरा;
    यूँ ही तो नहीं आयी सदा तेरी हवाओं में बह कर;
    हौले से तूने ही होगा नाम पुकारा मेरा।
  • अरे आप क्यों नहीं समझते हो सनम;
    दिल का दर्द दबता नहीं है दबाने से;
    आपको मोहब्बत का इज़हार करना ही पड़ेगा;
    क्योंकि मोहब्बत छुपती नहीं छुपाने से।
  • वो बात क्या करूँ जिसकी खबर ही न हो;
    वो दुआ क्या करूँ जिसमे असर ही न हो;
    कैसे कह दूँ आपको लग जाये मेरी भी उम्र;
    क्या पता अगले पल मेरी उम्र ही न हो।
  • छुपा लूंगा तुझे इस तरह से मेरी बाहों में;
    हवा भी गुज़रने के लिए इज़ाज़त मांगे;
    हो जाऊं तेरे इश्क़ में मदहोश इस तरह;
    कि होश भी वापस आने के इज़ाज़त मांगे।
  • उधर ज़ुल्फ़ों में कंघी लग रही है और ख़म निकलता है;
    इधर रग-रग से खिंच-खिंच के हमारा दम निकलता है;
    इलाही ख़ैर कर उलझन पे उलझन पड़ती जाती है;
    ना उनका ख़म निकलता है ना अपना दम निकलता है।

    ख़म - उलझन
  • इश्क़ नाज़ुक मिजाज़ है बे-हद;
    अक्ल का बोझ उठा नहीं सकता।