• ​रुलाना हर किसी को आता है;​<br/>​हँसाना भी हर किसी को आता है;​<br/>​​रुला के जो मना ले वो सच्चा यार है;​​​<br/>​​और जो रुला के खुद भी रो पड़े वही सच्चा प्यार है। Upload to Facebook
    ​रुलाना हर किसी को आता है;​
    ​हँसाना भी हर किसी को आता है;​
    ​​रुला के जो मना ले वो सच्चा यार है;​​​
    ​​और जो रुला के खुद भी रो पड़े वही सच्चा प्यार है।
  • ​न​ज़​रे​ मिले तो प्यार हो जाता है;<br/>
पलके उठे तो इज़हार हो जाता हैं;<br/>
ना जाने क्या कशिश हैं चाहत में;<br/>
कि कोई अनजान भी हमारी;<br/> 
जिंदगी हक़दार हो जाता है।Upload to Facebook
    ​न​ज़​रे​ मिले तो प्यार हो जाता है;
    पलके उठे तो इज़हार हो जाता हैं;
    ना जाने क्या कशिश हैं चाहत में;
    कि कोई अनजान भी हमारी;
    जिंदगी हक़दार हो जाता है।
  • लबों की हँसी आपके नाम कर देंगे;<br/>
हर खुशी आप पर कुर्बान कर देँगेँ;<br/>
जिस दिन होगी कमी मेरे प्यार;<br/>
उस दिन हम इस दुनिया को सलाम कर देंगे।Upload to Facebook
    लबों की हँसी आपके नाम कर देंगे;
    हर खुशी आप पर कुर्बान कर देँगेँ;
    जिस दिन होगी कमी मेरे प्यार;
    उस दिन हम इस दुनिया को सलाम कर देंगे।
  • मुहब्बत के लिए इक ज़िंदगी कम पड़ गयी होगी;<br/> 
तभी तो सात जन्मों का खुदा ने कर दिया बंधन।Upload to Facebook
    मुहब्बत के लिए इक ज़िंदगी कम पड़ गयी होगी;
    तभी तो सात जन्मों का खुदा ने कर दिया बंधन।
  • जख्म बन जाने की आदत है उन्हें;<br/>
रुला कर मुस्कुराने की आदत है उन्हें;<br/>
मिलेंगे कभी तो खूब रुलाएंगे;<br/>
सुना हैं रोते हुए लिपट जाने की आदत है उन्हें।Upload to Facebook
    जख्म बन जाने की आदत है उन्हें;
    रुला कर मुस्कुराने की आदत है उन्हें;
    मिलेंगे कभी तो खूब रुलाएंगे;
    सुना हैं रोते हुए लिपट जाने की आदत है उन्हें।
  • जो आपने न लिया हो, ऐसा कोई इम्तिहान न रहा;
    इंसान आखिर मोहब्बत में इंसान न रहा;
    है कोई बस्ती, जहां से न उठा हो ज़नाज़ा दीवाने का;
    आशिक की कुर्बत से महरूम कोई कब्रिस्तान न रहा।
  • जनाजा रोक कर वो मेरा कुछ इस अन्दाज़ मे बोले;<br/>
गली छोड्ने को कहा था, तुमने तो दुनियां ही छोड दी।Upload to Facebook
    जनाजा रोक कर वो मेरा कुछ इस अन्दाज़ मे बोले;
    गली छोड्ने को कहा था, तुमने तो दुनियां ही छोड दी।
  • तुम रख ना सकोगे मेरा तौफ़ा संभालकर;<br/>
वरना मैं अभी दे दूं जिस्म से रूह निकाल कर।   Upload to Facebook
    तुम रख ना सकोगे मेरा तौफ़ा संभालकर;
    वरना मैं अभी दे दूं जिस्म से रूह निकाल कर।
  • किसी की क्या मजाल थी;<br/>
जो हमें खरीद सकता;<br/>
हम तो खुद ही बिक गये;<br/>
खरीददार देख के।Upload to Facebook
    किसी की क्या मजाल थी;
    जो हमें खरीद सकता;
    हम तो खुद ही बिक गये;
    खरीददार देख के।
    ~ Mirza Ghalib
  • अपनी तो यारो बस इतनी सी कहानी है;<br/>
कुछ तो खुद से ही बर्बाद थे;<br/>
कुछ इश्क की मेहरबानी है।Upload to Facebook
    अपनी तो यारो बस इतनी सी कहानी है;
    कुछ तो खुद से ही बर्बाद थे;
    कुछ इश्क की मेहरबानी है।