• ना जाने वो कौन तेरा हबीब होगा;<br />
तेरे हाथों में जिसका नसीब होगा;<br />
कोई तुम्हें चाहे ये कोई बड़ी बात नहीं;<br />
लेकिन तुम जिसको चाहो, वो खुश नसीब होगा!
    ना जाने वो कौन तेरा हबीब होगा;
    तेरे हाथों में जिसका नसीब होगा;
    कोई तुम्हें चाहे ये कोई बड़ी बात नहीं;
    लेकिन तुम जिसको चाहो, वो खुश नसीब होगा!
  • आँखों में आंसुओं की लकीर बन गई;
    जैसी चाहिए थी वैसी तकदीर बन गई;
    हमने तो सिर्फ रेत में उंगलियाँ घुमाई थी;
    गौर से देखा तो आपकी तस्वीर बन गई!
  • जिस्म तो बहुत संवार चुके रूह का सिंगार कीजिये;
    फूल शाख से न तोड़िए खुशबुओं से प्यार कीजिये!
  • जो दिल से करीब हो उसे रुसवा नहीं कहते;<br />
यूं अपनी मोहब्बत का तमाशा नहीं करते;<br />
खामोश रहेंगे तो घुटन और बढ़ेगी;<br />
इसलिए अपनों से कोई बात छुपाया नहीं करते!
    जो दिल से करीब हो उसे रुसवा नहीं कहते;
    यूं अपनी मोहब्बत का तमाशा नहीं करते;
    खामोश रहेंगे तो घुटन और बढ़ेगी;
    इसलिए अपनों से कोई बात छुपाया नहीं करते!
  • तस्वीर में ख्याल होना तो लाज़मी सा है;
    मगर एक तस्वीर है, जो ख्यालों में बनी है!
    ग़ालिब मिर्ज़ा!
  • Unke Dekhne Se Jo Aa Jaatie Hai Munh Par Raunaq;
    Woh Samajhte Hain Ke Beemaar Ka Haal Achcha Hai!
  • वफ़ा का लाज हम वफा से निभायेगें;<br />
चाहत के दीप हम आँखों से जलाएंगे;<br />
कभी जो गुजरना हो तुम्हें दूसरे रास्तों से;<br />
हम फूल बनकर तेरी राहों में बिखर जायेंगे!
    वफ़ा का लाज हम वफा से निभायेगें;
    चाहत के दीप हम आँखों से जलाएंगे;
    कभी जो गुजरना हो तुम्हें दूसरे रास्तों से;
    हम फूल बनकर तेरी राहों में बिखर जायेंगे!
  • ना आना लेकर उसे मेरे जनाजे में;<br />
मेरी मोहब्बत की तौहीन होगी;<br />
मैं चार लोगो के कंधे पर हूंगा;<br />
और मेरी जान पैदल होगी!
    ना आना लेकर उसे मेरे जनाजे में;
    मेरी मोहब्बत की तौहीन होगी;
    मैं चार लोगो के कंधे पर हूंगा;
    और मेरी जान पैदल होगी!
  • कोई छुपाता है, कोई बताता है;
    कोई रुलाता है, तो कोई हंसाता है;
    प्यार तो हर किसी को ही किसी न किसी से हो जाता है;
    फर्क तो इतना है कि कोई अजमाता है और कोई निभाता है!
  • हम रूठे तो किसके भरोसे, कौन आएगा हमें मनाने के लिए;<br />
हो सकता है, तरस आ भी जाए आपको;<br />
पर दिल कहाँ से लाये, आप से रूठ जाने के लिए!
    हम रूठे तो किसके भरोसे, कौन आएगा हमें मनाने के लिए;
    हो सकता है, तरस आ भी जाए आपको;
    पर दिल कहाँ से लाये, आप से रूठ जाने के लिए!